केंद्रीय वित्तमंत्री अरूण जेटली के साथ राज्यों के वित्त मंत्रियों की हुई बजट पूर्व बैठक में वैसे तो कई मुद्दे उठे जिनपर राज्यों ने चिताएं जताई। लेकिन इस बैठक के बाद वित्तमंत्री ने यह स्पस्ट संकेत दिया कि राज्य सरकारें खेती की प्राथमिकता को लेकर चिंतित है। इसलिए ऐसा संभव है कि आगामी बजट में खेती किसानी को प्राथमिकता देते हुए किसानों के लिए बजट राशि बढ़ायी जाए। खेती के विकास और किसान कल्याण की योजनायें इस बजट में महत्व पायेंगी। इस बीच राज्यों ने सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के मद्दे नजर अपने यहां भी वेतन वृद्धि पर अतिरिक्त व्यय की भरपाई के लिए केंद्र से अधिक आबंटन की मांग की है.
जेटली ने कहा, ‘‘ जहां तक केंद्र सरकार का संबंध है, हम प्रत्येक राज्य के साथ सहयोग करना चाहेंगे क्योंकि राज्यों की वृद्धि दर बढने से राष्ट्रीय वृद्धि दर भी बढेगी.” बैठक में राज्यों ने कृषि क्षेत्र पर विशेष ध्यान देने का सुझाव दिया. कमजोर मानसून के चलते पिछले दो साल से कृषि क्षेत्र प्रभावित हुआ है.उन्होंने कुछ सामाजिक विकासोन्मुखी केंद्रीय योजनाओं जैसे सर्व शिक्षा अभियान, माध्यमिक शिक्षा अभियान, आईसीडीएस, राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन आदि को पुराने तर्ज पर जारी रखने की मांग की क्योंकि कई राज्यों को अपने संसाधनों से इन्हें जारी रखने में मुश्किलें आ रही हैं.
माँगा बिहार को विशेष राज्य का दर्जा
लेकिन बैठक में बिहार की तरफ से विशेष राज्य के दर्जे की मांग को जोर—शोर से उठाया गया है। बिहार के वित्त मंत्री अब्दुल बारी सिद्दीकी ने बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग की उन्होंने कहा कि बिहार इसके लिए उपयुक्त राज्य है। साथ ही यह भी दुहराया की बिहार जैसे सभी पिछडे राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा मिले। सिद्दीकी ने कहा की चुनाव के दोरान प्रधान मंत्री ने विशेष पैकेज की बात कही थी, अब केंद्र सरकार को वह राशि आम बजट में जरी करनी चाहिए ताकि रुकी हुई परियोजनाओं को पूरा किया जा सके। इनके लिए केंद्र सरकार वित्तीय मदद दे। उन्होंने यद् दिलाया की प्रधान मंत्री ने बिहार पैकागे के अंतर्गत 1,25,000 हजार करोड़ दिए जाने की बात कही थी। इसके साथ ही उन्होंने पिछड़ा चेत्र अनुदान की राशि भी उपलब्ध करने का आग्रह केंद्र सरकार से किया। साथ ही साथ सातवें वेतन आयोग की सिफारिशो को लागू करने पर जो अतरिक्त व्यय होगा उशकी भरपाई केंद्र द्वारा किये जाने की बात कही।


