पंचायत खबर टोली
पटना: बिहार में पंचायत चुनाव कई कारणों से टलते नजर आ रहे हैं। यदि समय नहीं हुए तो पंचायती राज संस्थाओं में बीडीओ राज कायम हो जाएगा। जिन कार्यों की जिम्मेवारी पंचायती राज संस्थाओं की होती है, उन्हें संपन्न करने की जिम्मेवारी अफसरों की होगी। जब तक पंचायती राज संस्थाओं के नव निर्वाचित सदस्यों का शपथ-ग्रहण नहीं हो जाता,यह स्थिति बनी रहेगी।
अदालत में फंसा है मामला
पंचायत चुनाव को लेकर मामला अदालत में है। मुख्य विवाद ईवीएम को लेकर है। ईवीएम से बिहार पंचायत चुनाव कराने की राज्य निर्वाचन आयोग की याचिका पर अब 12 अप्रैल को पटना उच्च न्यायालय में सुनवायी होगी। जबकी चुनाव आयोग हाइकोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहा है जिसके बाद चुनाव कार्यक्रमों की घोषणा की जायेगी। ईवीएम की खरीद इसीआइएल से किया जाना है और भारत निर्वाचन आयोग द्वारा इसको लेकर अनापत्ति प्रमाण पत्र देने है।
सूत्रों की माने तो पंचायत चुनाव के मद्देनजर भारत निर्वाचन आयोग (इसीआइ) ने ईवीएम के मसले का हल निकालने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग के आयुक्त दीपक प्रसाद को 14 अप्रैल को तकनीकी टीम के साथ दिल्ली तलब किया है। इससे पहले वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये कई बार राज्य चुनाव आयोग के आयुक्त आयुक्त दीपक प्रसाद भारतीय चुनाव आयोग के अधिकारियों से बात कर चुके हैं।
नवगठित पंचायतों के पुर्नगठन का काम बाकी
चुनाव आयोग ने भी जिलों से तीन सौ से अधिक पंचायतों के नव गठित नगर निकायों में शामिल होने के बाद नवीनतम रिपोर्ट तलब की है। जिलों से कहा गया है कि नवगठित पंचायतों और दूसरी पंचायत में शामिल हुए गांवों को नयी पंचायतों में जोड़ते हुए मतदाताओं का ब्योरा उपलब्ध कराये। इसी आधार पर आयोग नये सिरे से मतदाता सूची बनाने का निर्देश देगा, तभी पंचायत चुनाव संपन्न कराये जा सकेंगे
15 जून को पूरा होगा कार्यकाल
बिहार की पंचायती राज संस्थानों का कार्यकाल इस वर्ष 15 जून को पूरा हो रहा है। इसके पहले पंचायत चुनाव नहीं होने पर पंचायती राज संस्थाएं अवक्रमित हो जाएगी। मुखिया, पंचायत प्रमुख आदि के अधिकार छिन जाएगे। पंचायती राज अधिनियम में अगली व्यवस्था होने तक कार्यवाहक के रुप में कार्य करने का प्रावधान नहीं किया गया है, जैसाकि विधानसभा और लोकसभा के मामले में है। ऐसी स्थिति में क्या किया जाए, इसके बारे में अधिनियम चुप है। पंचायत चुनाव नहीं हो पाने की स्थिती में पंचायती राज संस्थानों के कार्यभार स्थानीय सरकारी अधिकारियों को सौंप दिया जाएगा। ग्राम पंचायत और पंचायत समितियों के मामले में वह अधिकारी बीडीओ यानी प्रखंड विकास पदाधिकारी होगा तो जिला परिषद के मामले में जिला उप विकास आयुक्त जिला परिषद के कामकाज की देखरेख करेंगे।
संशोधन पर हो रहा है विचार
पंचायत चुनाव के मद्देनजर पंचायती राज अधिनियम में कार्यवाहक अधिकारी का प्रावधान नहीं होने की चूक पर नजर जाने के बाद इसमें संशोधन करने की जरूरत भी महसूस की जा रही है। अभी जो स्थिति है, उसमें 15 जून के पहले पंचायत चुनाव हो जाने के आसार नजर नहीं आ रहे।
