नगर निकायों में महिलाओं का परचम: राजनीति में बदलाव के संकेत

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अमरनाथ झा

पटना: बिहार में नगर निकायों के चुनावों में महिलाएं आरक्षण से अधिक स्थानों पर निर्वाचित हुई हैं। स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए पचास प्रतिशत स्थान आरक्षित हैं, पर ज्यादातर निकायों में महिलाओं ने उससे अधिक स्थानों पर जीत हासिल की है। पटना नगर निगम के 75 वार्डों में से 49 में महिला पार्षद निर्वाचित हुई है जबकि आरक्षण केवल 36 का था। मेयर का पद महिलाओं के लिए आरक्षित है।

ज्यादातर पार्षद पहली बार निर्वाचित

पटना जिले के विभिन्न नगर निकायों में 297 वार्ड पार्षदों के लिए चुनाव हुए जिसमें से 187 महिलाए निर्वाचित हुई। पुरुषों को केवल 110 स्थान मिले हैं। दूसरा रोचक तथ्य यह है कि पहली बार निर्वाचित पार्षदों की संख्या ज्यादा है। पटना के 75 पार्षदों में 58 पहली बार निर्वाचित हुए हैं। आयु के लिहाज से सबसे अधिक 40 से 50 वर्ष उम्र के हैं। पटना में सबसे कम उम्र की पार्षद शारदा देवी अभी महज 22 वर्ष की है। केवल छह वार्ड पार्षद पचास से साठ वर्ष उम्र की हैं। दो की उम्र 70 के आसपास है। महिलाओं का बडी संख्या में निर्वाचित तो हुई हैं, लेकिन उनमें अनेक पूर्व पार्षदों की पत्नी या नजदीकी रिश्तेदार हैं। इसमें महजबीं भी हैं जो पूर्व मेयर अफजल इमाम की पत्नी हैं और मेयर पद की प्रबल दावेदार मानी जा रही हैं। अन्य मजबूत उम्मीदवारों में मधु चैरसिया और भारती देवी भी पूर्व पार्षदों की पत्नी हैं। छह नगर निगमों में महिलाएं मेयर चुन ली गई हैं। आरा नगर निगम की मेयर प्रियम हुई हैं वीणा कुमारी बिहारशरीफ, बैजयंती खेडिया दरभंगा, सीमा साह भागलपुर की मेयर हुई हैं।

पटना ही नही यह रूझान पूरे बिहार का है। हालांकि सभी जगहों के पूरे आंकडे अभी उपलब्ध नहीं है। पर अस्सी प्रतिशत से अधिक निकायों की कमान नए हाथों में गई हैं जिनमें लगभग 66 प्रतिशत महिलाएं हैं। कई महिलाएं ऐसी है जो पहलीबार पार्षद चुनी गई हैं और नगर निकाय की प्रमुख बन गई हैं। कई जिलों में सारे के सारे नगर निकाय के अध्यक्ष पद पर महिलाओं का कब्जा हो गया है। सीवान जिले के तीनों नगर निकायों के अध्यक्ष पद पर महिलाओं का कब्जा हो गया है। सभी नए चेहरे हैं। सीवान नगर परिषद की अध्यक्ष सिंधु देवी पहली बार चुनाव मैदान में उतरी और नगर परिषद की अध्यक्ष चुन ली गई हैं। मधुबनी नगर परिषद अध्यक्ष बनी सुनैना देवी भी पहली बार पार्षद बनी हैं। रोहतास जिले के पांच नगर निकायों में चार के अध्यक्ष नए है और उनमें तीन महिलाएं हैं। नवादा जिले के तीन नगर निकायों के अध्यक्ष नए है, जिनमें दो महिलाएं हैं। औरंगाबाद, जहानाबाद, कैमूर जिले के सभी नगर निकायों के अध्यक्ष नए चेहरे हैं। भागलपुर के चारों नगर निकायों पर मेयर और अध्यक्ष पद पर महिलाओं का कब्जा हो गया है। सहरसा में भी दोनो नगर निकायों पर महिलाओं का परचम लहरा रहा है। जमुई और खगडिया में महिलाएं ही नगर सरकार का संचालन करेंगे। मुजफरपुर नगर निगम और कांटी नगर पंचायत पर नए लोगों को मौका मिला है। पश्चिम चंपारण के तीन नगर परिषद और दो नगर पंचायतों में पहली बार जीत कर आए लोग कमान संभालेंगे। बेतिया नगर परिषद की अध्यक्ष गरीमा सिकारिया पहली बार चुनकर आई हैं। बक्सर, हाजीपुर,बोधगया, मोतीहारी, सीतामढी,बांका, सहरसा,मधेपुरा, सुपौल, किशनगंज,कटिहार, जमालपुर,शेखपुरा इत्यादि में भी नगर सरकार की कमान महिलाओं के हाथों में है। कुल मिलाकर 31 नगर परिषद और 63 नगर पंचायतों के अध्यक्ष पद का चुनाव हो चुका है।

अनेक पूर्व पार्षदों की पत्नियां निर्वाचित

राजनीतिक प्रेक्षकों का मानना है कि महिलाओं और नए लोगों के बडी संख्या में जीत कर आने से प्रदेश की जमीनी राजनीति में बदलाव अवश्यंभावी है। वैसे इनमें अनेक पूर्व पार्षदों की पत्नियां हैं। इसलिए आशंका है कि कामकाज पार्षद पति ही संभालेंगे। लेकिन कम से कम बैठकों में जाना और हस्ताक्षर करना निर्वाचित पार्षदों को ही करना होगा। इतने से भी उनकी राजनीतिक चेतना में बदलाव आएंगा। इधर पटना के मेयर पद के लिए हो रही जोड़ तोड़ में राजनीतिक पार्टियों की दिलचस्पी भी दिख रही है। पूर्व मेयर अफजल इमाम की पत्नी महजबीं जहां जदयू-राजद खेमे की पसंद मानी जा रही हैं वहीं भाजपा के दिग्गज गंगा प्रसाद की पुत्रबधू मधु चौरसिया भाजपा खेमे की उम्मीदवार समझी जा रही हैं। दोनों खेमों के पक्ष में स्थानीय विधायकों और दूसरे नेताओं सक्रियता दिख रही है। वैसे अभी मेयर पद की कुल 11 उम्मीदवारों का नाम सामने आ चुका है। मेयर का चुनाव 19 जून को होना है इसबीच काफी सरगर्मी रहने वाली है।

 

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