पटना: मुखिया जी के अधिकार में कटौती को लेकर सरकार और मुखिया संघ में ठन गयी है। एक तरफ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मुखिया के अधिकार में कटौती कर वार्ड सदस्यों को मजबूत कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ मुखिया संघ अपने अधिकार छोड़ने को तैयार नहीं है। बुधवार को सरकार ने यह फैसला लिया था। लेकिन सरकार के फैसले के विरोध में मुखिया संघ द्वारा धरना,प्रदर्शन किये जा रहे हैं। यहां तक मुख्यमंत्री के काफिले का घेराव भी किया गया।
क्या है मामला
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक बिहार पंचायत राज अधिनियम- 2006 में संशोधन किया गया। इस संशोधन के जरिए सरकार ने ग्राम पंचायतों के वार्ड सदस्यों को ताकतवर बनाने वाली नियमावली को मंजूरी प्रदान कर दी। गांवों के लिए योजनाओं के चयन और संचालन के लिए वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति गठित करने का रास्ता भी साफ कर दिया। इसके अंतर्गत अब मुखिया नहीं बल्कि संबंधित वार्ड के सदस्य इस समिति के अध्यक्ष होंगे।
वार्ड सदस्यों को मिलेगी मजबूती
वैसे तो बिहार में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था लागू है। इसके अंतर्गत मुखिया को वार्ड सदस्यों के सहयोग से ही उनके साथ बैठक कर योजना बनाने और कार्यान्यवयन का अधिकार है। लेकिन ज्यादातर मामलों यह महज खानापूर्ती साबित होता रहा है। मुखिया अपने अधिकारों का प्रयोग बिना वार्ड सदस्यों की सहमती के करता रहा है लेकिन अब सरकार के इस पहल से ग्राम पंचायतों के एक लाख,15 हजार वार्ड सदस्यों की ताकत बढ़ गई हैं। वार्ड स्तर पर समिति गठन के लिए आधिनियम में धारा 170 ख और ग जोड़ी गई है। धारा 170 ग के तहत राज्य सरकार को यह शक्ति मिल गई है कि वह वार्ड के लिए अनुमोदित योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए वार्ड समिति को आदेश देगी। इसके जरिए त्रिस्तरीय पंचायतों में चल रही योजनाओं खासकर सात निश्चय को लागू करने में सरकार मदद मिलेगी। अब आसानी से योजनाओं के चयन और क्रियान्वयन की प्रक्रिया का विकेंद्रीकरण हो सकेगा।
समिति को मिला महत्व
अब किस तरह के विकास कार्यक्रम लागू किये जायेंगे या किस काम को प्राथमिकता देना है यह तय करने का अधिकार समिति के पास होगा । समिति जलपूर्ति, सार्वजनिक स्वच्छता इकाइयों और अन्य सार्वजनिक सुविधा योजनाओं के लिए उपयुक्त स्थल का चयन करेगी। इसके साथ ही महामारी तथा प्राकृतिक आपदा की रोकथाम के लिए वार्ड सभा/ग्राम पंचायत के सामान्य नियंत्रण के अधीन कार्य करना और इनके द्वारा सौंपे गए कार्यक्रमों और दायित्वों का क्रियान्वयन करना होगा। इतना ही नहीं सरकार ग्राम पंचायत के अधीन गठित सभी समितियों को और सशक्त बनाने के साथ ही योजनाओं-कार्यक्रमों का अनुश्रवण और पर्यवेक्षण की जिम्मेवारी समिति के पास रखा गया है।
ये समितियां करती है काम
पंचायत में योजना, समन्वय और वित्त समिति, उत्पादन समिति, सामाजिक न्याय समिति, शिक्षा समिति, लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण और ग्रामीण स्वच्छता समिति और लोक निर्माण समिति के गठन की व्यवस्था है।
संशोधन के क्या हैं फायदे
संशोधन के बाद अब ग्राम पंचायतों को पंचायत निधि की राशि के उपयोग के मामले में अब राज्य सरकार का आदेश मानना बाध्यकारी होगा। साथ ही उप मुखिया सामाजिक न्याय समिति के पदेन अध्यक्ष होंगे। जबकि पहले मुखिया को या अधिकार दिया गया था कि वह निर्वाचित सदस्यों के बीच से किसी को अध्यक्ष नामित कर सकेगा। ऐसे में मुखिया अपनी मनमर्जी से किसी को भी अध्यक्ष नामित कर देता था।
संशोधन से अदालती अर्चन दूर
बिहार पंचायत राज अधिनियम के हवाले से पटना उच्च न्यायालय ने 17 मई को इस दलील के साथ पंचायत के वार्ड विकास समिति के गठन को खारिज करते हुए टिप्पणी की थी कि इसका प्रावधान में नहीं है। इसके बाद ही सरकार ने अधिनियम में संशोधन करने का फैसला किया है। हालांकि मुखिया संघ सात निश्चय के तहत हर घर नल से जल और गली-नाली पक्कीकरण का काम वार्ड विकास समिति से कराने के सरकार के फैसले के खिलाफ अदालत की शरण में है।
बुधवार को मुखिया के अधिकार में कटौती का फैसला लिये जाने के विरोध में मुखिया संघ ने गुरुवार को जगह—जगह विरोध प्रदर्शन किया। सड़क जाम किये गये। जिला मुख्यालय से लेकर प्रखंड मुख्यालयों में चक्का जाम कर नाराजगी जतायी। यहां तक मुखिया संघ के प्रतिनिधियों ने फतुहां के मोमिनपुर फोर लेन पर नीतीश कुमार के काफिले का घेराव भी किया। हालांकि बाद में प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद ही काफिला आगे बढ़ पाया।
क्या कह रहे हैं मुखिया
अमावां पंचायत के मुखिया ने बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा ग्राम स्वराज के सपने को साकार होने से रोका जा रहा है। मुखिया के अधिकार में कटौती की जा रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना ,कबीर अंत्येष्ठि ,कन्या विवाह योजना का समय पैसा नहीं भेजा जाता है।



