बिहार फिर से एक चुनाव के लिए तैयार खड़ा है. वही बिहार जो कभी दशरथ मांझी के तौर पर सामने आता है और देश को झकझोर जाता है तो कभी गांधी जी के सत्याग्रह की सीढ़ी बनता है… ये वही बिहार है जहाँ से सम्राट अशोक ने अपनी विजय पताका लहराई थी और बुद्ध एवं महावीर ने ज्ञान का प्रकाश फैलाया था.
एक अत्यंत गौरवशाली अतीत का स्वामी ये बिहार आज अनिश्चिन्ताओं के मध्य एक और अनिश्चिनता भरे चुनाव के लिए कमर कस रहा है… जो कभी सबसे शक्ति-शाली और संपन्न हुआ करता था वो भू-भाग अभी प्रधानमन्त्री के दिए सवा लाख करोड़ के पैकेज की बात जोह रहा है और उम्मीद कर रहा है कि इसका गौरव के दिन वापस लौटेंगे. वो दिन फिर से आयेंगे जब लोग बिहार को घोटालों, अपराध और पिछड़ेपन का प्रदेश मानने की जगह ज्ञान और संस्कृति का विहार मानते थे. और उम्मीद करे भी क्यूँ न… जब स्वयं देश के प्रधानमन्त्री नित नयी रैली कर रहे हैं, और लोकसभा में प्रतिपक्ष की नेत्री स्वाभिमान रैली कर रही हों तो आशाओं का पहाड़ तो खड़ा ही होगा.
बहुत सारे मुद्दे हैं इस चुनाव में… कहीं जाति का मुद्दा है तो कहीं डीएनए की पड़ताल है लेकिन इन सब के बीच मुंह बाए खड़ा है एक मुद्दा विकास का. विकास उस प्रदेश का जहाँ अभी भी बहुत सारे लोग एक अदद पुल की बाट जोह रहे हैं… गड़े हुए खभों की ओर टकटकी लगा बैठे हैं कि कभी तो सही, इस रास्ते बिजली उनके घर भी आएगी. जहाँ बच्चे स्कूल बस औपचारिकता पूरी करने जाते हैं क्योंकि उनकी असल लड़ाई भूख की है… उन्हें माँ-बाप के काम में सहारा बनना है. आइये जानते हैं, ऐसे ही बिहार को थोडा नज़दीक से जिसे शायद न तो किसी सरकारी दावे से कोई सरोकार है न ही किसी मुद्दे से कोई मतलब. पग-पग पर सघर्ष जहाँ जीवन का परम सत्य है.
जान-पहचान की इन्ही कवायदों में मिलते हैं सहरसा जिले के सिमरी बख्तियार पुर प्रखंड के भटपुरा—भटौनी ग्रामवासियों से जिन्हें गौरव तो राष्ट्रीय उच्च-मार्ग से जुड़े होने का मिला है लेकिन विडम्बना ये है कि इस राज-मार्ग ने उनके गाँव के अन्दर आवागमन के रास्ते को ही लील लिया है. जो कच्चा रास्ता कभी उनके एक जगह से दूसरे जगह जाने का साथी होता था आज वो लगभग पांच साल पूर्व NH-107 के निर्माण लिए मिटटी भरने के लिए जेसीबी मशीन से खोदे गए गड्ढे में कहीं समां गया है और लोग-बाग़ इन्ही गड्ढों के रास्ते पार उतरते हैं. परिस्थिति और भी विषम हो जाती है जब बारिश के मौसम में इन खदैयों ( गहरे गड्ढे) में पानी भर जाता है….
:- अनुशक्ति सिंह


[फोटो : अजय कुमार]