भूमिहीनों को 3 डिसमिल मयस्सर नहीं.. कहां गई भूदानी जमीन?

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  अखिलेश अखिल, वरिष्ठ पत्रकार

आजाद देश के रहनुमाओं ने इस देश को किस तरह से लूटा है इसकी बानगी तो आप हमेशा देखते रहे है और मजा भी लेते रहे हैं। इसी श्रृंखला में एक और लूट की बानगी आपके सामने है। चूकि केंद्र में मोदी जी की सरकार है इसलिए इस उम्मीद की जा सकती है कि इस लूट की ओर उनकी नजरें भी जाए।   खबर ये है कि कि क्या इस देश के लोगों को पता है कि भूदान की लाखों एकड़ जमीन कहां है? इसी देश के एक महान संत और समाज सुधारक विनोवा भावे ने देश भर में घूम घूम कर जमींदारों से लाखों एकड़ जमीन दान में ली थी ताकि भूमिहीनों को जीने लायक जमीन दी जा सके। लेकिन देश के लूटेरों ने गांधी, विनोवा के उस सपने को भी चूर चूर कर दिया। कह सकते है कि आधुनिक पूजीपतियों ने विनोवा के सपने भी लूट लिए और दान में ली गई जमीन को राजनीतिक साठगांठ के जरिए हड़प ली। भूदानी जमीन की लूट आजाद भारत की सबसे बड़ी लूट है। हम इस खबर की तह में आपको ले चलेंगे और बताऐंगे राज्यवार भूदानी जमीनों की हकीकत और उसकी लूट की कहानी को। लेकिन सबसे पहले थोडी जानकारी भूमिहीनों को लेकर की गई भावे के आंदोलन की ला जाए ।

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भारत में आजादी के बाद से ही आवादी का एक बड़ा हिस्सा भूमिहीनों का रहा है। इनके पास खेती करने की जमीन तो दूर ,दफन होने के लिए 6 गज जमीन भी मयस्सर नही है। इसी सोंच के तहत गांधी के सच्चे आदमी विनोबा भावे ने भूमिहीनों को जमीन देने के लिए गांव गांव जाकर जमींदारों से भूमि मांगने की शुरूआत की थी । इसके लिए सबसे पहले विनोबा जी 1951 में अपने पनवार आश्रम से चलकर हैदराबाद के दक्षिण में शिवरामपल्ली गांव पहुंचे ।वहां तीसरे सर्वोदय सम्मेलन का आयोजन था । 18 अप्रैल 1951 को विनोबा जी नांगलोंड पहुंचे। यह इलाका तब भी लाल सलाम के नारों से गूंजता था । विनोबा जी पोचमपल्ली गांव में ठहरे। 700 की आवादी वाले इस गांव में दो तिहाई लोग भूमिहीन थे । भूमिहीनों ने विनोबा जी से 80 एकड़ जमीन की मांग की। विनोबा जी के आग्रह पर गांव के जमींदार रामचंद्र रेउ्डी 100 एकड़ जमीन देने की घोषणा की। इसके बाद विनोबा जी ने इसे आंदोलन का रूप देकर पूरे देश से अपने जीवन में 47 लाख एकड़ जमीन दान में ली। ये जमीने बांटने का काम राज्य और जिला भूदान समिति को दी गई। चूकि भूमि राज्य का मामला है इसलिए राज्य सरकार का सहयोग जरूरी है। लेकिन देखा जा रहा है कि भूदान की जमीने लूट की शिकार होती गई हैं। आगे बढे इससे पहले एक नजर भूदानी जमीनो पर।

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देश भर में स्थापित भूदान यज्ञ समिति के अनुसार सर्वोदयी नेता विनोबा भावे के भूदान आंदोलन के तहत कुल 47 लाख, 63 हजार, 676 एकड़ जमीन भूमिहीनों के लिए दान में मिली थी। यहां पेश है कुछ राज्यों में पिछले 4 साल के भूदानी जमीनों के आंकड़े एकड़ में –

राज्य     दान की जमीन     बांटी गई जमीन   बची जमीन

बिहार       6,48,593           2,78,320           3,40,273

आंध्रा       2,52,119               1,8,770              1,43,349

झारखंड      14,69,280             4,88,735         9,80,545

उड़ीसा         6,38,706               5,79,984         58,722

राजस्थान     5,46,965               1,42,699          4,04,266

उत्तरप्रदेश       4,36,362           4,18,958           17,404

दिल्ली         300                     180                  120

मध्यप्रदेश      4,10,151             2,37,629         1,72,522

महाराष्ट्       1,58,160             1,13,230            44,930

जम्मू कश्मीर     211                       5                   206

असम                877                 877               0

पंजाब           5168                 1026             4,152

तामिलनाडू     27677              22837           4,840

केरल        26,293               5,774           20,519

कर्नाटक        15,864                 5017          10,847

हिमाचल     5,240                     2,531          2,709

गुजरात         1,03,530               50,984         52,546

आपको बता दें कि संयुक्त बिहार से सबसे ज्यादा जमीनें भूदान आंदोलन को दान की गई थी । कोई 22 लाख एकड़ जमीने संयुक्त बिहार से मिली थी । इनमें से बिहार के जमींदारों ने 6,48,593 एकड़ और झारख्ंड के जमिंदारों ने 14,69,280 एकड़ जमीने विनोबा जी को दी थी ।

( अगली कड़ी में… बिहार के भूदानी जमीन का हाल )

 

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