भोजपुरी की पहचान मिटाते ये अश्लील भोजपुरी गाने व एलबम

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alokkk_nआलोक रंजन, युवा पत्रकार

भोजपुरी संगीत या पोर्न ओडीयो शीर्षक देखकर चौकिये मत , यह सत्य है । चलिये पहले आपको कूछ भोजपुरी संगीत का के बोल बताता हूँ।

१ पतोहिए पऽ होली में ससुरा पगलात बा … पतोहिए के चोली पऽ ससुरा पगलात बा

२ तोहर फुलल-फुलल फुलौना कहीयो आवाज को जाई …

३ मुँह खोलs .. मुँह खोलs …..तो मुँहवा में डालदी….

४ लगा दिही चोलिया के हूक राजा जी …. ५ खाली बतीये से पेट न भड़ी ऐ बलम जी ….. कस के कोरवा में आव कुछ करी ….

. ६ बीस पचास पर मानब ना बतिया … देबऽ हजरिया त उठाइब घघरिया… तोहर छोट बा उमरिया, मूसर घूसी ना भितरिया…

७ मांगता देवरा खेले के खेलौना बतावऽ का दीं .. हमार टोवेला फुलौना बतावऽ का दी

आपने भी इस प्रकार गाने कहीं न कहीं सुने ही होंगें । अब क्या करें इन्हीं गानों पर विवाह , मुंडन तो छोड़ीये सरस्वती पूजा , दुर्गा पूजा , विश्वकर्मा पूजा एवम् उसके विसर्जन के जूलूस में हमारे आज के घनघोर धार्मिक युवा मदिरा पान कर नागिन डांस करते देखे जाते हैं तो भला कोई कान में रूई डालकर तो नही चल सकता ?
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हम ने भी चलते-फिरते सुन लिये थे । अब आप गुगल सर्च करे तो इससे भी बेकार गाने हैं हम यहाँ नही लिख सकते चुँकि लिखना असहज लग रहा है । भोजपुरी संगीत का तो पूछे ही मत ये पुरा का पुरा विज्ञान पर आधारित है । जैसे :- कोई १४-१५ बर्ष का लड़का १०-१२ भोजपुरी संगीत सुन ले तो वह मनुष्य प्रजन्न विज्ञान (यौन) को सरलापुर्वक समझ सकता है । अब इससे बड़ी वैज्ञानिकता भला और क्या हो सकती है ? इतना ही नही इन गानों को सुनने/देखने के बाद हमारे चरित्रवान युवाओं को कामुक पुस्तक (कामसुत्रादि) व चलचित्र (एडुल्ट) देखने की भी आवश्यकता नही होती है चुँकि भोजपुरी गीत पोर्न ओडिओ से कम नही होते और उसका वीडियो लगभग ८०फीसदी तक पोर्न की श्रेणी में ही होते हैं । भोजपुरी फिल्म की बाद करें तो कुछ अच्छे परिवारिक फिल्म के अलावा बाकी फिल्मो कि कामयाबी उनके गानों पर टिकी है । अर्थात् जितना ज्यादा नंगे गाने फिल्म की उतनी ही कमायी । आज भोजपुरी फिल्म देश के कई हिस्सों में देखे जा रहें हैं । इसलिये नही की उत्तर भारतीय पूरे भारत में है । गुजरात में गुजराती और महाराष्ट्र मे मराठी भी भोजपुरी फिल्म देखते मिल जायेंगें । ऐसा इसलिये है कि जिस प्रकार अत्यधिक ऐक्शन के लिये ही दक्षिण भारत के फिल्म मशहुर है उसी प्रकार अत्याधिक नग्नता के लिये भोजपुरी फिल्म मशहूर है । इसका एक कारण ये भी है इन फिल्मों को देखने में प्रशाषण डर नही रहता योन फिल्मो की तरह । सिनेमा घर में आसानी से देखे जा सकते हैं । भोजपुरी फिल्म देश में ही नही अपितु मौरीशुष जैसे देश में भी देखे जाते हैं । ये हमारे भोजपुरी उत्तर भारतीय के लिये गर्व का विषय हो सकता है । भले ही कारण नंगापन हो मगर भोजपुरी संगीत की गूंज हर जगह सुनाई देती है वैसे ही जैसे पोर्न स्टार सनी लीओनी भी अपने धंधे में प्रसिध्द है और भारत में आकर आज सुपर स्टार है । कहीं वह किसी कार्यक्रम में आ जाये तो लाखो चरित्रवान युवा ही नही बच्चे , बुजुर्ग का भी का मजमा उमड़ पड़ेगा उसे देखने के लिये । ऐसा कदापि नही है कि नगन्ता केवल भोजपुरी में ही है ।

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 नगन्ता तो हॉलीवूड के फिल्म में सबसे ज्यादा होती है । लेकिन फिर भी भोजपुरी और हॉलीबुड वाली नगन्ता में अन्तर है । चूकी हॉलीबुड कि संस्कृती , सभ्यता को देखें तो उनका नंगापन जो है वह नंगापन है ही नही । भोजपुरी गानों की नग़न्ता इसलिये भी हॉलीबुड पर भारी है चुँकि विशेषज्ञों का मानना है की अर्ध्द नगन्ता ज्यादा खतनाक होती है बहशीपन भड़काने में पुर्ण नगन्ता से । एवम् भोजपुरी गानों में कामुक भावनाऐं कोच-कोच कर भरी रहती है । जो हमारे युवाओं के चेतना पर सीधा हमला करती हैं । गुड्डू रंगीला, छैला बिहारी, खेसारी लाल, पवन सिंह, अरविंद अकेला उर्फ कलुआ और ऐसे तमाम गायक रूपयो के लिये बिहारी संस्कृती को बेच दिया है । 2008-09 से ही, जब कलुआ की उम्र 12 या 14 साल की रही होगी, तभी से भोजपुरी के अश्लील गाना गाना शुरू कर दिया था । उसी समय ‘भतार बाड़ऽ नाम के, नइखऽ कउनो काम के’, ‘चोलिया के हूक राजा जी’ जैसे गीत गाए थे । हमारी संस्कृती के ये दशा देख निशिचत भोजपुरी हृदय दर्द से कराहते रहता है। हम कितने लाचार हैं कुछ गायक/गायिका पैसों के लिये ऐसे गाने गाते हैं, फिल्माते हैं। हम सब चुप-चाप देख रहें हैं कुछ नही कर पा रहें हैं , दर्द की दूसरी वजह ये भी है कि हमारी संस्कृति को कोई भ्रष्ट कर रहा है और हम ही जाने-अंजाने में उसका साथ दे रहें हैं । आज मंदिर , विवाह , जश्न , जुलुस में ये गाने शौक से बजते देख आत्मगलानी होती है । होली पर पवित्र रिस्ते ससुर , देवर पर फिल्माये अश्लील गानों की होर लग जाती है । ऐसे में समाज किस ओर जा रहा है ये हर जिम्मेदार नागरीक को सोचना होगा । रोज नये अश्लील से अश्लील गायक/गायिका कुकुर्मूते की तरह पैदा हो रहें है । आंखिरकार कौन सुनता है अश्लील गाना ? क्या वह इस समाज का नही ? कौन बनातें हैं ऐसे गानें ? क्यों सरकार रोक नही लगाती ? एक ओर हमारा संगीत , संस्कृती और सभ्यता का बलात्कार हो रहा है वहीं दूसरी ओर सब मूक बने तमाशा देख रहें । हम सब को मिलकर बचाना होगा भोजपुरी को, अपनी संगीत , संस्कृती और सभ्यता को । कहीं देर न हो जाये… देखो इन लोगो ने भोजपुरी की कैसी छवी बना दी है , और हम चुप हैं ? अब बहोत हो गया हमें ही कुछ करना होगा । भाषा आन्दोलन को बल दे और भोजपूरी को क्लासिक बनाये।

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