संतोष कुमार सिंह
नयी दिल्ली:बेटी बचाओ,बेटी पढ़ाओ का नारा सिर्फ नारा न हो यह जीवन का सलीका बन जाये तभी प्रधानमंत्री के नारे को जमीन पर उतारा जा सकता है। इस दिशा में सरकारी, गैर सरकारी स्तर पर कई तरह के प्रयास चल रहे है। अपने इसी प्रयास को आगे बढ़ाते हुए समाज सेवी संस्था दीप वेलफेयर आर्गेनाजेशन व पंचायत खबर ने साथ मिलकर बेटी बचाव बेटी पढाओ विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया। कांस्टीच्यूशनल क्लब में आयोजित इस परिचर्चा की मुख्य अतिथी महिला आयोग की सदस्य सुषमा साहू दीप के बेटियो के बेहतर भविष्य को गढ़ने के लिए किये जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि जरूरत घर में मानसिकता बदलने की है जबतक घर में मां बाप लडके लडकी के साथ भेदभाव खत्म नहीं करते है तबतक व्यापक स्तर पर बदलाव नहीं आयेगा। कार्यकम में बड़ी संख्या में शामिल किशोरियों से सीधा संवाद करते हुए सुषमा साहू ने कहा कि उन्हें आत्मविश्वास के साथ अपने सम्मान के लिये खडा होना चाहिए। शिक्षा के महत्व पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि जैसे—जैसे शिक्षा बढ़ेगी बदलाव आएगा। इसलिए इस दिशा में शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है । हमें यह सुनिश्चित करना होगा हर लड़की शिक्षित हो। शिक्षा से उनमें आत्मनिर्भरता आएगी और वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होंगे।
दिल्ली विशवविद्वालय की असोएिएट प्रोफेसर डाॅ विजय लक्ष्मी नंदा ने लडकियों के लिंगानुपात पर अपने शोध के दौरान प्राप्त किये गये अनुभवों को साझा किया। नंदा ने कहा कि लडकियों को उनसे जुड़े तमाम सवालों पर खुलकर अपनी बात रखने की जरूरत है चाहे वह यौन संबंधित बाते हों या संपति के अधिकार की सभी बातों उन्हें राय रखनी चाहिए । हमें हाउ टू से नो की आदत डालनी होगी। यह कहने का विश्वास अपने अंदर भरना होगा। समाज में दो साल के बच्चियों के साथ कुछ भी गलत घटित हो जा रहा है, और हम इस इंतजार में है कि सेक्स से जुड़े सवालों या उनके शारीरिक बदलाव पर चर्चा उनके व्यस्क हो जाने पर हो। ऐसा नहीं होना चाहिए। ऐसा नहीं है कि इन सब समस्याओं को लेकर कानून का अभाव है। कानून बने हुए हैं,कानून में यदि कमियां है तो उसे सुधारा भी जा रहा है। मुख्य बात जागरूकता की है। यदि लड़कियां जागरूक होंगी तभी सजगता आएगी। ऐसा अक्सर होता है लड़कियों से जुड़े मसले पर पुरूष बात करते हैं, इसमें बुराई नहीं है लेकिन यदि खुद लड़कियां अपने से जुड़ी समस्या को रखें तो बात दूर तक जाएगी। उन्होंने कहा कि अब वक्त आ गया है कि हम भारत माता की जय बोलने के साथ भारत की हर बालिका की जय बोलें।
सामाजिक कार्यकर्ता और कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रोफेसर विक्रम दत्त ने कहा कि लड़कियों को से ‘नो’ कहना तो आना चाहिए, लेकिन इससे भी ज्यादा उन्हें यह समझना होगा ये उनका शरीर उनकी मिल्कियत है, और मिल्कियत पर उनका हक होना चाहिए। इसलिए ‘नो’ के कहने के साथ ‘यस’ कहना भी उनका हक है। उन्होने कहा कि पहले बाजार में केवल कंडोम उपलब्ध था,लेकिन अब बाजार महिला निरोध भी उपलब्ध करा रहा है। यह सकारात्मक है। आज समाज ,सरकार और सिविल सोसाइटी सभी को एक साथ मिलकर कार्य करने की जरूरत है। हम बालिकाओं के प्रति संवेदनशील नहीे हुए तो आने वाले दस सालों में लिंगानुपात इतना बढ़ जाएगा कि कई पुरूष ऐसे होंगे जिन्हें शादी के लिये लडकियां नसीब नहीे होनेवाली है। सामाजिक कार्यकर्ता एम एम विद्वार्थी ने अपने संबोधन में कहा किे आज समाज में परिवर्तन आ रहा हैं लोग पहले जहां लडकियों को गोद लेना चाहते थे आज बहुत सारे लोग पहले से रजीस्ट्रेशन करा रहे जो सराहनीय कदम है।
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ट अधिवक्ता प्रबोध कुमार ने एनडीटी एक्ट में सुधार करने कि जरूरत है दंड के प्रावधान को और कठोर बनाने की आवश्कता है। डी डी न्यूज के एंकर अशोक श्रीवास्तव ने कहा कि प्रधानमंत्री ने इस कार्यक्रम की शुरूआत की। जब शुरूआत की तो लोगों ने इस दिशा में कार्यक्रम करने शुरू किए। प्रधानमंत्री ने स्वच्छता अभियान की शुरूआत की उसके बाद लोगों ने झाडू उठा लिया। श्रीवास्तव ने कहा कि प्रधानमंत्री रास्ता दिखाते हैं, हमारा काम है कि हम उस रास्ते पर चलें तभी सही मायने में बदलाव आ सकता है। उन्होने कहा कि मेरा प्रस्ताव है कि आज सरकार को बेटी बचाव को लेकर मुहिम चलाने की आवश्कता है और सरकार को निर्धारित करने की जरूरत है कि मीडिया इसमें आगे बढकर अपना भूमिका निभाये ।
इस परिचर्चा का संचालन करते हुए दीप के सचिव अजय प्रकाश पांडे ने सेमिनार में देश के अलग अलग हिस्सों से आये प्रतिनिधियों को पिछले पांच सालों से संस्था द्वारा देश के विभिन्न हिस्सों में चलाये जा रहे गतिविधियों की जानकारी दी । कार्यक्रम में दीप वेलफेयर द्वारा संचालित विभिन्न सेंटर के लडकियां बड़ी संख्या में उपस्थित थीं। पंचायत खबर के संपादक और कार्यक्रम के संयोजक संतोष कुमार सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन किया।


