एक गाॅंव ऐसा भी जहाॅं लक्ष्मी नहीं, मवेशियो की होती है पूजा

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शिवराम गिरि
प्रतापगढ़: दीपावली में रंग बिरंगे दीपों से सजा घर। खुशहाली की कामना। बम,पठाखे,लक्ष्मी—गणेश, मिठाईयां—उपहार। इन सब के बिना तो दीपावली की कल्पना ही नहीं की जा सकती। लोग घरों को सजाते हैं और धन, धान्य सुख समृ़द्धी की प्रतीक देवी लक्ष्मी जी की पूजा तो दीपावली पर्व पर पूरे देश में की जाती है। लेकिन आपने सुना है कि एक ऐसा भी गांव है जहां लक्ष्मी गणेश की जगह पर मवेशियों की पूजा किया जाता है।

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जी हां,यह गांव है उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में जहाॅं दीपावली के दिन पशुधन को लक्ष्मी मान कर मवेशियो की पूजा की जाती है। प्रतापगढ़ जिले में कुंडा तहसील में आने वाले सहाबपुर, लाखीपुर गाॅंव के लोग सुबह से ही अपने पशुओं को सजाने में लगे हुए हैं। उन्हें नहलाया गया है, और शाम होते ही उनकी पूजा की जायेगी। वैसे भी ग्रामीण जनजीवन में आज भी कृषि और पशुपालन मुख्य रोजगार की तरह है। शायद यही लिए मवेशियों को पशुधन की संज्ञा दी गई है। बड़ी बात यह है कि इस परंपरा के जरिए न सिर्फ पशुओं को पूजने की बात महत्वपूर्ण है बल्कि यह गाॅंव महिला सशक्तिकरण का भी एक बड़ा नजीर है क्यो इस गाॅंव में मवेशियो को लक्ष्मी मानकर की जाने वाली पूजा सबसे पहले घर के महिलाओं द्वारा ही की जाती है।
सहाबपुर, लाखीपुर गाॅंव में प्रचलित इस पूजा परंपरा और विधान के विषय में ग्रामीण अखिलेश यादव, मुलायम यादव, अनुराग यादव सहित अन्य ग्रामीणो ने पंचायत खबर को बताया कि यह परंपरा न सिर्फ उनके गांव में बल्कि तहसील क्षेत्र के कुछ अन्य गांवों में भी प्रचलित है।
क्या है पूजन विधि
इस गांव में  दीपावली पर गणेश-लक्ष्मी की पूजा के बजाय यहाॅ लक्ष्मी के रूप में गाय, भैंसों के खूटें पूजे जाते है। इसके बाद गाय भैंसो के सींग रंगकर प्रसाद वितरित किया जाता हैै।यह पूजा घर के बाहर बेल की डाल गाड़कर होती है।
इन गाॅंवो में विशेषतः यादव बाहुल्य बस्तियों में दीप जलाए जाते है और बच्चे पटाखे भी फोड़ते है लेकिन इनका पूजा का तरीका बिल्कुल अलहदा हैै। सबसे पहले तो इस बिरादरी की महिलाएं ही पूजा करती है। इसके लिए गाॅंव में किसी एक जगह बेदी बनाई जाती है। यहाॅं बेल की डाल गाड़ दी जाती हैै। इसके बाद यही पर एक गाय या भैंस लाई जाती है। उसकी पूजा लक्ष्मी के रूप मेें की जाती है।

pashupppppमहिलाएं करती हैं मवेशियों की पूजा
गांव की सभी महिलाएं अपने-अपने घर के खूॅटे यानी जिसमें मवेशियो को बाॅंधा जाता हैै उसकी पूजा करती है। घर में जितने भी मवेशी होते है उनकी सींगे रंगी जाती है और उन्हे भी प्रसाद खिलाया जाता है। इसके बाद यह प्रसाद बच्चो समेत परिवार के अन्य सदस्यो में हर्षोल्लास पूर्वक वितरित कर दिया जाता है।
मान्यता है कि गाय भैंस खासतौर पर दुधारू मवेशी लक्ष्मी के रूप होते है। इनके माध्यम से ही लक्ष्मी घर के अंदर आती है। मान्यता यह भी है कि घर की खिड़की और नाबदान भी खुला होना चाहिए। फिलहाल वर्षो से चली आ रही पूजा करने की यह रवायत आज भी उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जनपद में कायम है और पशुधन की पूजा व महिला सशक्तिकरण का अपने आप में अनूठा मिशाल है।

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