अक्षत सरोत्री
गोवाहाटी: हिमाचल के बाद अगर कहीं चाय के बागान हैं तो वो असम में हैं। असम के चाय के बगानों से चौंकाने वाली खबर सामने आई है। यहां के लिये नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि असम के चाय श्रमिकों का वेतन कम है।
रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि चाय श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी तय करने में राज्य सरकार का हस्तक्षेप भी अपर्याप्त है। इन सभी वजहों के चलते श्रमिकों के जीवन स्तर में पर्याप्त सुधार नहीं हो पा रहा है।
कैग ने रिपोर्ट तैयार करने के लिए 590 चाय श्रमिकों से बात की। रिपोर्ट के अनुसार, आदिवासी विकास विभाग ने श्रमिकों की समस्याओं को दूर करने की कोशिश की, लेकिन बिना किसी आधारभूत सामाजिक-आर्थिक डाटा और अव्यवस्थित तरीके से प्रयास करने की वजह से वह नाकाफी साबित हो रहा है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि चाय बागानों में काम करने वाले श्रमिकों की मजदूरी कम है। साथ ही असम सरकार ने न्यूनतम मजदूरी कानून, 1948 के तहत चाय श्रमिकों की कम मजदूरी की समस्या को दूर करने का प्रयास नहीं किया है।
कैग ने 2015-16 से लेकर 2020-21 की अवधि की रिपोर्ट को ‘चाय श्रमिकों के कल्याण के लिए योजनाओं का क्रियान्वयन’ शीर्षक से रिपोर्ट तैयार की है।
