बदलते मौसम में मिल्क फीवर का बढ़ेगा प्रकोप, पशुपालक रहें सचेत

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पंचायत खबर टोली

मऊ : गांव—गंवई में किसान भाई खेती के साथ पशुपालन भी करते है। जिस तरह से बदलते मौसम का असर खेती किसानी पर होता है,उसी तरह हमारे पशु भी मौसमी बदलाव से प्रभावित होते हैं। ऐसे में मौसम में बदलाव का व्यापक असर पशुपालन पर पड़ने की संभावना होती है।। वातावरण में बदलाव से मिल्क फीवर रोग में तेजी आएगी। इसके साथ मौसमी संक्रमण रोग लंगड़ी, खुरपका, मुंहपका आदि का प्रसार भी तेजी से होगा। इस दौरान वाहृय परजीवियों का अटैक भी पशु पर होगा। ऐसे में तत्काल टीकाकरण कराने की सलाह दी जाती है।

सचेत रहें पशुपालक..कराएं टीकाकरण

विशेषज्ञों ने पशुपालकों को बदलते मौसम में सचेत रहने की सलाह दिया है। लापरवाही की दशा में पशुधन को हानि होने के बारे में पशुपालकों को सचेत भी किया है। कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ पशु वैज्ञानिक डा.वीके सिंह बताते हैं कि  मौसम का बदलता रूप पशुओं के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। खानपान और रखरखाव में लापरवाही से पशु संक्रामक रोग की चपेट में आ सकता है। पूरक आहार के साथ बदलते तापमान में मिल्क फीवर का असर तेजी से फैलेगा। इस दौरान पशु को नियमित रूप से 50-60 एमएल कैल्शियम माह में 20 दिन अवश्य दें। मौसमी बदलाव के दौरान जल प्रबंधन को लेकर भी सतर्क रहना होगा।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ

संक्रमण के साथ मौसम जनित रोग के प्रसार की भी प्रबल संभावना है। ठंड के बाद गर्मी के बढ़ते प्रभाव के बीच पशुपालकों को सचेत होने की जरुरत है। लापरवाही पशुधन के लिए घातक हो सकती है। डॉ. सिंह ने सचेत करते हुए कहा कि इस समय अफरा रोग होने के साथ लंगड़ी, गलाघोटू, खुरपका और मुंहपका रोग भी पशु को प्रभावित करता है। स्थानीय पशु स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क कर तत्काल टीकाकरण कराना चाहिए। दुधारू पशु को चारे में बरसीम की मात्रा अधिक देना चाहिए। हरा चारा दूध उत्पादन को प्रभावित करता है। बरसीम की समाप्ति के बाद जायद में उर्द, मूंग और लोबिया का प्रयोग करने से गर्मी में भी दूध उत्पादन प्रभावित नहीं होता है।

जूं और किलनी का करें सफाया

डा.वीके सिंह ने पशुपालकों को सचेत इस मौसम में वाहृय परजीवियों का असर तेजी से होगा। जूं और किलनी का प्रकोप भी तेजी से बढ़ेगा। इसके निदान के लिए बुटाक्स या क्लीनट्राप दो एमएल एक लीटर पानी में घोलने के बाद शरीर पर लगाएं। उसके 5-6 घंटा बाद पशु को नहला देें। डा.सिंह ने सचेत किया कि दवा का घोल बनाकर पशु बाड़े अवश्य छिड़काव कराएं। इससे वाहृय परजीवियों के अंडे भी समाप्त हो जाएंगे। ऐसा नहीं होने पर कुछ ही दिनों में यह फिर प्रभावी हो जाएंगे।

 

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