संतोष कुमार सिंह
नयी दिल्ली: देश में स्वच्छता अभियान जोरों पर है। सफाई हो न हो लेकिन चर्चा खूब हो रही है। मनमतिया की माई कल भी बहरा जाती थी , आज भी अपने कुनबे के साथ बहरा ही जाती है। स्कूटर लेकर खुले में शौच करते जाते ताउ पर बच्चे विज्ञापन के जरिए सवाल कर रहे है। बैनर लगाए जा रहे हैं। पोस्टर बांटे जा रहे हैं। सेलिब्रिटी प्रचार कर रहे हैं। सरकार के स्तर पर काम होने की बात हो रही है। एनजीओ के स्तर पर संवाद हो रहा है। हालांकि गांव से लेकर शहरों तक चल रहे इस अभियान से लोग जुड़ने लगे हैं। कुछ जागरूकता बढ़ी है। कभी किसी गांव से तो कभी पंचायत से तो कभी जिले से तो कभी राज्य के खुले में शौच मुक्त होने की खबर आ रही है। लेकिन शौचालय निर्माण के साथ उसके रखरखाव की चुनौती बड़ी है। इसके साथ ही गांव की घनी आबादी और शहरी मलिन बस्तियों में लोगों को खुले में शौच करने से मुक्त करने के लिए सामुदाियक व सार्वजनिक शौचालय के निर्माण की चुनौती भी है। कई जगहों पर जमीन की समस्या भी है,लोगों के पास मकान बनाने की जगह नहीं,लेकिन शौचालय बनवाना है। सरकार स्वच्छता का बैरो मीटर लेकर बैठी है। कोई पास हो रहा है कोई फेल। एक बड़ी समस्या कचड़ा और तरल प्रबंधन को लेकर है। कचरे से कंचन तराशने की परिकल्पना है। सोच है कि इसके जरिए युवाओं को रोजगार मिलेगा और उर्जा एवं अन्य उत्पाद प्राप्त होगा। लेकिन इस दिशा में काफी काम किया जाना बाकी है।
सिक्किम और केरल को पूरी तरह से खुले में शौच मुक्त राज्य घोषित किया जा चुका है। लद्दाख ओडीएफ घोषित होने से मात्र 2400 घर दूर है। लगभग 6 राज्य ओडीएफ घोषित होने की दिशा में तेजी से आगे बढ़े हैं। अगर जिलों की बात करें देश के कुल 40 जिले पूरी तरह से न सिर्फ घर—घर शौचालय बनवा चुके हैं बल्कि इनका इस्तेमाल भी हो रहा है। ऐसी उम्मीद की जा रही है कि वर्ष 2017 तक ऐसे जिलों की संख्या 100 होगी। यदि गांव के लिहाज से देखें तो देश के 85 हजार गांव खुले में शौच मुक्त हो गये। सरकार ने भले ही यह लक्ष्य निर्धारित किया है कि 2019 तक देश के सभी घरों में शौचालय का निर्माण हो जाएगा लेकिन बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे 40 फीसदी जनसंख्या वाले राज्य में काम की रफतार धीमी है इसलिए लक्ष्य दुरूह लग रहा है, लेकिन प्रयास जारी है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में जल प्लावन भी सबके घर शौचालय की राह में बड़ी चुनौती है। सरकार के अलग—अलग मंत्रालय व विभाग, सरकारी, गैर सरकारी एजेंसिया इस कार्य में लगी हुई हैं ताकि देश को खुले में शौच मुक्त बनाया जा सके। ना तो पैसे की कमी है, और न ही संसाधनों की।
नहीं है पैसे की कमी
स्वच्छता अभियान के लिए पैसे की कमी नहीं है। दो फीसदी उपकर लगे होने के साथ इस कार्यक्रम में केंद्र सरकार अपने बजट से 62 करोड़ रूपये की सहायता दी है। इसके अलावा राज्य सरकारें,पंचायती राज्य संस्थायें,नगर निकाय,गैर सरकारी संगठन भी इस कार्यक्रम से जुड़कर सहयोग दे रहे हैं।
अभी हाल ही में जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय ने पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय को 315 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की है। यह धनराशि गंगा कार्य योजना के कार्यान्वयन के लिये वर्तमान वित्त वर्ष के दौरान स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत जारी की गयी है। इस धनराशि को गंगा के किनारे शौचालयों का निर्माण करने पर खर्च किया जायेगा। याद रहे, पिछले वित्त वर्ष के दौरान भी जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय ने पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय को 263 करोड़ रुपये जारी किये थे। अब तक इस योजना के तहत 14,500 शौचालयों का निर्माण किया जा चुका है।
केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं स्वच्छता मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने आम लोगों के बीच स्वच्छता की जरूरतों को पूरे दमखम से पहुंचाने के लिए मेगास्टार अमिताभ बच्चन और दिग्गज क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर का साथ लिया है। स्वच्छ भारत मिशन के प्रचार अभियान में शौचालयों का उपयोग करने और सफाई को व्यवहार में तब्दील जैसे नारों के साथ जल्दी ही मेगास्टार अमिताभ बच्चन और दिग्गज क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर दिखाई देंगे।
स्वच्छ भारत के वीडियो में दोनों दिग्गज दिखाई देंगे। स्वच्छता अभियान का वीडियो लांच करते हुए केंद्रीय स्वच्छता व पेयजल मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने दोनों को ब्रांड अंबेसडर बताया। तोमर ने सोमवार को पंडित दीनदयाल जन्मशती वर्ष में स्वच्छता सप्ताह की शुरुआत की। उन्होंने सप्ताह भर चलने वाले कार्यक्रमों का ब्यौरा दिया। तोमर ने बताया कि 30 सितंबर को विज्ञान भवन में स्वच्छता पर एक बड़ा आयोजन किया गया है। इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। तोमर ने कहा कि तेंदुलकर तो अभी थोड़े दिन पहले ही एक कार्यक्रम में उपस्थित रहे। अमिताभ बच्चन हमेशा तैयार रहते हैं। वीडियो में बच्चन लोगों से भारत को साफ सुथरा बनाने के लिए स्वच्छता मिशन में शिरकत करने की अपील करते दिख रहे हैं। बच्चन ने शौचालय बनाने और उपयोग के बारे में अपील करते हुए कह रहे हैं ‘अब तो नहीं कब?’ स्वच्छता मिशन से जुड़ने को कहते हैं। सचिन तेंदुलकर कहते हैं ‘आप मेरे साथ खड़े हैं, तो मेरे साथ स्वच्छता मिशन का हिस्सा बनें। हम ऐसा भारत बना सकते हैं जिसमें हर जगह शौचालय होगा।’ सरकार का यह विज्ञापन जल्दी ही टीवी के साथ आन लाइन मंचों पर दिखाया जाएगा। इसे हिंदी के साथ अन्य भारतीय भाषाओं में भी दिखाया जाएगा। स्वच्छ भारत की शुरुआत दो अक्तूबर 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी। तोमर ने कहा यही इस मिशन की सफलता है। देश का बड़ा हिस्सा जल्दी ही खुले में शौच मुक्त हो जाएगा।

