प्रगतिशील किसान (progressive farmer) विजय पांडे की अद्भुत पहल…अब बिहार में भी होने लगी है रूद्राक्ष की खेती

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भावना त्रिपाठी

किसान अब परंपरागत खेती से हटकर कुछ अलग करने की राह पर बढ़ रहे है। बिहार के प्रगतिशील किसान (progressive farmer) विजय कुमार पांडेय भी लीक से अलग हटकर चलने वाले  हैं। और उनकी इसी सोच ने एक ऐसा कमाल कर दिखाया है कि आसपास के किसान भाई हतप्रभ हैं और विजय की सफलता से खुश भी। जी हां रूद्राक्ष जिसे अमूमन हिमालय की वादियों में ही पाया जा सकता है, या देखा जा सकता है उस रूद्राक्ष की खेती बिहार में बैठे किसान विजय कुमार कर रहे हैं और अपने खेतों में उगा रहे हैं। इस लिहाज से देखें तो यह एक कमाल है जो ​इस किसान ने कर दिखाया है।


एक पेड़ से निकलता है एक क्विंटल रूद्राक्ष
इस पूरी यात्रा के विषय में बिहार के बेतिया जिले के रहने वाले प्रगतिशील किसान (progressive farmer) विजय कुमार बताते हैं कि एक पेड़ से एक क्विंटल तक रुद्राक्ष निकलता है। बड़ी बात तो यह है कि विजय न सिर्फ खुद रूद्राक्ष उगा रहे हैं बल्कि बाकी किसान भी इस तरह की खेती के लिए प्रेरित हों इसके लिए वो किसानों को रूद्राक्ष का बीज और सलाह मुफ्त में दे देते है।
अपने आगे की योजना की चर्चा करते हुए प्रगतिशील किसान (progressive farmer) ने बताया कि उन्होंने अगले साल में पांच सौ से लेकर एक हजार तक रुद्राक्ष के पेड़ तैयार करने का लक्ष्य रखा है। विजय द्वारा उगाये जा रहे रूद्राक्ष की विविधता की बात करें तो वे एकमुखी से लेकर पंचमुखी रुद्राक्ष तक के पौधे की बागवानी लगाई है।

पहले प्रयोग में हासिल की सफलता
प्रगतिशील किसान (progressive farmer) विजय की सफलता इस लिए भी महत्व रखती है कि जिस इलाके में विजय रूद्राक्ष उगा रहे हैं उसे लखनऊ के वैज्ञानिकों ने रूद्राक्ष की खेती के लिए उपयुक्त नहीं बताया था। बावजूद इसके उन्होंने प्रयोग के तौर पर इसे लगाया और उनका यह प्रयोग सफल हो गया। जाहिर है रूद्राक्ष उगाने के लिए जिस तरह की मिट्टी चाहिए ओर जिस तरह की जलवायु चाहिए वैसी मिट्टी और जलवायु उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों में ही पाई जाती है और यह पौधा हिमालय क्षेत्र में ही होता हैं।


जागरूक किसान है विजय
बेतिया के रहने वाले प्रगतिशील किसान (progressive farmer) विजय कुमार पांडे ने सात साल पहले लखनऊ के केंद्रीय औषधीय अनुसंधान केंद्र से पंचमुखी रुद्राक्ष का पौधा लाया था साथ ही केंद्रीय वन पर्यावरण अनुसंधान केंद्र देहरादून से एकमुखी रुद्राक्ष का पौधा अपने गांव ले आये थे। आज विजय की बाग में पंचमुखी रुद्राक्ष के दो पेड़ तैयार हो गए हैं। हालाकि एकमुखी रुद्राक्ष दो सालों के बाद फलना शुरू होंगे। विजय की माने तो चार –पांच सालों में पंचमुखी रुद्राक्ष फलना शुरू हो गए हैं।
तय किया है बड़ा लक्ष्य
जाहिर है धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व के कारण रूद्राक्ष की मांग उसकी उपलब्धता से कहीं ज्यादा होती है इसीलिए प्रगतिशील किसान (progressive farmer) विजय बड़े स्तर पर रूद्राक्ष उगाने की तैयारी में हैं। बड़ी बात ये है कि विजय ये समझते हैं कि इलाके के अन्य किसान भी यदि उनके साथ इस मुहिम का हिस्सा बनेगे तभी उनका यह प्रयोग आगे बढ़ पायेगा। इसको ध्यान में रखते हुए विजय खुद तो रूद्राक्ष की खेती कर ही रहे हैं साथ ही वे अब तक सैकड़ों लोगों को मुफ्त में रुद्राक्ष बांट चुके है। इतना ही नहीं वे कई रुद्राक्ष के पेड़ तैयार करके मंदिरों में दे चुके हैं।

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