प्रयागराज: बारिश की अनियमितता ने गेहूं की उत्पादकता पर प्रभाव ही नही डाला है बल्कि, इससे भूसे की गुणवत्ता भी प्रभावित हुई है। गेहूं की फसल बारिश में भीगने से और कई दिन पानी में पड़े रहने से अच्छी गुणवत्ता भूसा किसानों को नहीं मिल रहा है। किसानों का कहना है कि भूसा का रंग पीला होने की बजाय उन्हें काले रंग का भी भूसा कहीं कहीं उन्हें मिल जा रहा है। ऐसे में उनके मन में इस के उपयोग को लेकर संशय बना हुआ है।
जिला कृषि अधिकारी सुभाष मौर्य ने किसानों को बताया कि लगभग सभी जगह भूसे की गुणवत्ता अच्छी ही देखने को मिल रही है कहीं-कहीं फसलें बारिश के पानी में डूबी होने के कारण काले रंग या हल्का पीले रंग कि भूसे की प्राप्ति हो रही है। हालांकि पीले भूसे से जानवरों के स्वास्थ्य पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ने वाला है। जानवर बड़े ही शौक से खाएंगे और उनके हेल्थ पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। वहीं हल्के काले भूसे से भी कोई प्रभाव नहीं पड़ने वाला है।
थ्रेसर के उपयोग में कुछ सावधानी
कृषि अधिकारी मौर्य ने बताया कि आजकल लगभग सभी किसान थ्रेसर से भूसे की मड़ाई कराते हैं। ऐसे में कुछ नियम को ध्यान में न रखने से भी अच्छा भूसा की प्राप्ति नहीं होती है। ऐसे में जरूरी यह हो जाता है कि जहां से भूसे को मड़ाई करें उसमें नियम का पूरा ध्यान रखें।
मड़ाई करते समय अधिक मात्रा में फसल को मशीन में डालने पर भी अच्छे किस्म के भूसे नहीं मिलते हैं यानी मड़ाई प्रक्रिया के दौरान एक निश्चित मात्रा के गेहूं डंठल के बंडल थ्रेसर में डाले जाने चाहिए और थ्रेसर की गति भी नियम मापदंड के अनुरूप होनी चाहिए।
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