नई दिल्ली। देश के तीन हिली स्टेट के सेब बागवानों ने आज दिल्ली में जोरदार प्रदर्शन किया। जंतर-मंतर में धरना देते हुए हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर और उत्तराखंड के बागवानों ने केंद्र की किसान विरोधी के खिलाफ प्रदर्शन किया और 10 सूत्रीय मांगपत्र केंद्र को सौंपा। एपल फेडरेशन ऑफ इंडिया के संयोजक सोहन ठाकुर ने कहा कि तीन-चार साल में ही इनपुट कॉस्ट दोगुना होने से सेब की खेती मुश्किल हो गई है। ऐसे वक्त में सरकार कृषि इनपुट पर सब्सिडी खत्म कर रही है। इससे खाद, बीज और दवाइयां किसानों और बागवानों की पहुंच से दूर हो रही हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा सेब की पैकेजिंग सामग्री पर GST बढ़ाने से कार्टन के रेट आसमान छू रहे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से सभी कृषि इनपुट को GST फ्री करने की मांग की।
कॉर्पोरेट घराने के फायदे की नीतिया बना रही सरकार: सिंघा
ठियोग के पूर्व विधायक एवं बागवान राकेश सिंघा ने धरने को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र की नवउदारवादी नीतियों की वजह से आज कृषि-बागवानी घाटे का सौदा साबित हो रही है। बड़े-बड़े कॉर्पोरेट घराने को फायदा देने के लिए नीतियां बनाई जा रही है। उन्होंने किसानों-बागवानों को शोषण से बचाने के लिए लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट, APMC एक्ट और पसेंजर एंड गुड्स एक्ट को सख्ती से लागू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार के इशारे पर अडाणी-अंबानी को लूट की छूट दी जा रही है।
प्रधानमंत्री अपना वादा निभाए: डॉ. तनवर
हिमाचल किसान सभा के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. कुलदीप तनवर ने कहा कि बागवान सालों से सेब पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। प्रधानमंत्री बनने से पहले नरेंद्र मोदी ने प्रदेश के बागवानों से 2 बार सेब पर आयात शुल्क बढ़ाने का वादा किया था, लेकिन आज तक इसे पूरा नहीं किया गया। इससे पहाड़ी राज्यों के सेब बागवान मुश्किल में हैं। दुनिया के 44 मुल्कों से थोक में सेब आयात होने की वजह से हिमाचल और जम्मू कश्मीर के सेब बागवानों को उचित दाम नहीं मिल पा रहे हैं। इससे सेब की खेती अब घाटे का सौदा साबित होने लगी है। इस दौरान सेब बागवानों ने जमीन बेदखली के आदेश वापस लेने, उचित किराए का निर्धारण, यूनिवर्सल कार्टन अनिवार्य करने, जांच की गई सेब की किस्मे ही आयात करने जैसी मांगें केंद्र के समक्ष उठाई।
बागवानों को संगठित होकर लड़नी होगी लड़ाई
शिमला MC के पूर्व मेयर एवं बागवान संजय चौहान ने कहा कि आज आक्रमणकारी ताकतों से निपटने के लिए बागवानों को संगठित होना होगा। इसके लिए सभी सेब उत्पादक राज्यों को एकजुट होकर लड़ाई लड़नी होगी।

