गुजरात के रहने वाले दो इंजिनियर्स देवांश आचार्य और श्रेय दलवाड़ी जब खेतों में अपने ड्रोन के साथ पहुंचते है, तो अक्सर किसान उनकों बड़े ही आश्चर्य के साथ देखते है। इन दोनों इंजिनियर्स का दावा है कि उनके इस प्रयोग से खेती किसानी को आकर्षक बनाने के साथ ही लाभदायाक भी बनाया जा सकता हैं और लगातार खेती किसानी से दूर हो रहे युवाओं को पुन: इस ओर लाया जा सकता। उनका मानना है कि टेक्नॉलजी का उपयोग करके खेती किसानी को बढ़ावा देने के साथ ही फसलों की गुणवत्ता एवं उत्पादन को भी बढ़ाया जा सकता है। ड्रोन का इस्तेमाल करके यह पता लगाया जा सकता हैं कि फसल को खाद या पानी की कब और कितनी जरूरत है, जिससे किसानों का काम काफी आसानी से हो जाता है।
चारुसत स्थित चरोतर यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस ऐंड टेक्नॉलजी से बीई करने वाले देवांश और श्रेय ने ऐसे ड्रोन तैयार किए हैं, जोकि खेत में कीटनाशक छिड़काव, पानी की आवश्यकता नापने, पौधों की वृद्धि नापने जैसे काम करने में सक्षम हैं। यह ड्रोन पहले से सेट रास्ते पर उड़ सकता है। इन दोनों ने ड्रोन में नियर इन्फ्रारेड सेंसर्स और मल्टि-स्पेक्ट्रल कैमरा का इस्तेमाल किया है, जिससे हाई क्वालिटी पिक्चर्स और डेटा कलेक्ट किया जा सकता है।
इस पूरी प्रक्रिया में एक बार खेत चयनित करने के बाद ड्रोन को सात स्कैनिंग के लिए प्रोग्राम किया जाता है। ये सात पैरामीटर्स हैं- कॉन्टूर मैप, ऑर्थोमोजैक, ऊंचाई, डिजिटल टेरेन, 3D मॉडेल, जियोमीट्रिक मैप और वेजेटेशन। कैमरे की मदद से यह ड्रौन हाई क्वालिटी पिक्चर्स लेता है, जिससे फसल के स्वास्थ्य और खाद-पानी की जरूरत को मापा जा सकता है।’
इन दोनों छात्रों के मुताबिक यह ड्रोन 97 पर्सेंट ऐक्युरेसी के साथ जड़ से लेकर पत्तियों तक की बीमारियों के बारे में पता लगा सकता है। पहले से काम कर रहे ड्रोन इतनी ऐक्युरेसी के साथ यह काम नहीं कर पाते हैं।’
