प्रति पंचायत 41 लाख रूपये के बजटीय आवंटन से सवरेंगी बिहार की ग्राम पंचायतें

कमलेश कुमार सिंह
पटना: कोरोना महामारी के दौरान पंचायतों की महत्ती भूमिका से शायद ही किसी को इंकार होगा। प्र​वासियों के क्वारंटाईन से लेकर अनाज वितरण तक और अब मनरेगा व हर घर नल के जल योजना के अंतर्गत बाहर से गांव लौटे ग्रामीणों के जीविका के साधनों की व्यवस्था करने में पंचायतें अहम भूमिका निभा रही है। इस बीच सोशल मीडिया पर अखबारों के हवाले से गलत खबर भी चलाई ​गई कि प्रत्येक पंचायत को बिहार सरकार से क्वारंटाईन सेंटर चलाने के लिए 9 लाख रूपये दिए गये हैं। लेकिन अब पंचायतों के लिए अच्छी खबर आई है। बिहार की त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं को वित्तीय वर्ष 2020-21 में 15 वें वित्त आयोग के अनुदान के तहत 5018 करोड़ रुपए मिलने हैं। इनमें ग्राम पंचायतों को 70 प्रतिशत हिस्सा अर्थात करीब 3500 करोड़ मिलेंगे। इस लिहाज से देखें तो राज्य के प्रत्येक पंचायत को औसतन 41 लाख रुपए इस वित्तीय वर्ष में मिलेंगे। राज्य में कुल 8386 ग्राम पंचायत हैं।


क्या है व्यवस्था
बिहार सरकार ने 15वें वित्त आयोग के तहत मिलने वाली राशि का बंटवारा त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं को मिलने वाली राशि का हिस्सा तय कर दिया है। इसके तहत अब 70 प्रतिशत हिस्सा बिहार के मुखिया यानी ग्राम पंचायतों को जाएगा वहीं 30 प्रतिशत हिस्से का बंटवारा ग्राम पंचायत स्तर पर अन्य प्रतिनिधियों के बीच होगा। हालांकि पंचायतों को यह राशि उनकी आबादी और उनके क्षेत्र के आकार के हिसाब से तय होगी। इस तरह दो पंचायतों को मिलने वाली राशि में अंतर भी होगा। 70 प्रतिशत हिस्सा ग्राम पंचायत 20 प्रतिशत पंचायत समिति और 10 प्रतिशत जिला परिषद को मिलना है। पंचायती राज विभाग को यह राशि दो किस्तों में मिलेगी।
कब मिलेगी राशि
पंचायतीराज विभाग को केंद्र सरकार से पहली किस्त जल्द मिलने की उम्मीद है। वहीं इस मद की दूसरी किस्त की राशि अक्टूबर-नवंबर में मिलने की उम्मीद है। केन्द्र सरकार से राशि मिलने के बाद विभाग के स्तर से ही यह राशि सीधे पंचायतों के खाते में भेज दी चली जाएगी। पंचायतों में इस राशि का उपयोग विभिन्न विकास के कार्यों में होगा। साथ ही पेयजल में भी इसका उपयोग हो सकेगा।

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सीधे पंचायत के खाते में पहुंचेगा पैसा
विभागीय सूचना के मुताबिक केन्द्र से राशि प्राप्त होने पर उसे सीधे संबंधित पंचायतों के बैंक खातों में भेज दी जाएगी। पंचायतों की आबादी के अनुरूप राशि का बंटवारा होगा। अधिक आबादी वाले पंचायतों को अधिक राशि दी जाएगी। आबादी की गणना 2011 की जनगणना के आधार पर की जाएगी। वित्त आयोग ने यह भी साफ किया है कि इस राशि का उपयोग पंचायतों में विकास कार्य के साथ-साथ पेयजल आपूर्ति में भी की जा सकेगी।
पहले क्या था प्रावधान
गौरतलब है कि 14 वें वित्त आयोग के अनुदान में मिलने वाली पूरी रकम ग्राम-पंचायत को जाती थी लेकिन 15 वें वित्त आयोग की अनुशंसा से मिलने वाली राशि ग्राम-पंचायतों के साथ साथ पंचायत परिषद और जिला परिषद को भी दी जाएगी। 15 वें वित्त आयोग की अनुशंसा को इसी वित्तीय वर्ष से लागू किया जाना है। 15 वें वित्त आयोग में भले ही ग्राम पंचायत की 30 फीसदी राशि काट ली गई हो, लेकिन ग्रामीण इलाकों के विकास के लिए मनरेगा पर ग्राम पंचायतों पर पर्याप्त अधिकार मिला हुआ है, और इसके लिए बजटीय आवंटन की कमी नहीं होगी।

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