प्रशांत महासागर के द्वीप देश फ़िजी के उप प्रधानमंत्री सह वितमंत्री प्रोफेसर बिमान प्रसाद पिछले दिनो भारत की यात्रा पर थे| पाँच दिनो की इस आधिकारिक यात्रा की समाप्ती पर नई दिल्ली मे प्रोफेसर प्रसाद से स्वतंत्र पत्रकार अमिताभ भूषण ने भारत फ़िजी संबंध पर विस्तार से बातचीत की |
सवाल – भारत और फ़िजी संबंध को आप मौजूदा वक़्त मे किस रूप मे देखते है ?
उत्तर- भारत के साथ फ़िजी का संबंध 143 साल पुराना है,भारत से हमारा रिश्ता जितना पुराना है उतना ही गहरा भी है। भारत देश फ़िजी और फिजीजनों के लिए नेशन और इमोशन दोनों है| भारत से फ़िजी का रिश्ता भावना ,भावुकता, भाषा के साथ साथ संस्कार ,संस्कृति ,परंपरा से एकात्म करनेवाले पुरखों का है | फ़िजी की मौजूदा सरकार के नज़रिये से कहूँ तो भारत फ़िजी के लिए भरोसेमंद ,मददगार ऐतिहासिक मित्र देश है, वैसा मित्र देश जिसके मूल्यबोध की सार्वभौमिकता को दुनिया के तमाम देश स्वीकार करते है,जिसकी आस्था लोकतंत्र ,मानवाधिकार, प्रेस की स्वतन्त्रता मे है| मै आपको भरोसे के साथ कह रहा हूँ प्रधानमंत्री सिरविनी राबुका की सरकार के दौर मे फ़िजी और भारत का संबंध पहले से बहुत अधिक प्रभावी और परिणाम आधारित होगा |
सवाल – फ़िजी की प्रगति और पहचान मे भारतवंशी गिरमिटियों को कहाँ पाते है आप?
उत्तर – फ़िजी की पहचान और प्रगति की हर तस्वीर मे गिरमिटियों की गाथा शामिल है | फ़िजी के इतिहास विरासत और सियासत मे गिरमिटियों का योगदान अतुल्य और अमिट है | 1879 से 1916 के बीच जिन्हे धोके और प्रलोभन से शर्तबंद मजदूर बनाकर भारत से फ़िजी लाया गया था उन मेहनतकश पुरखों के साहस ,संघर्ष और समर्पण,परिश्रम को फिजी जन भला कैसे भूल सकते है | जिन्हे जबरिया कुली की पहचान दी गयी थी जिनके आवासीय पते का नाम कुलीलाईन्स था, उन्ही गिरमिटियों और उनकी पीढ़ियों ने फ़िजी को कुलीन बनाने मे आदिवासियों के साथ मिलकर अपनी प्रभावी भूमिका निभाई थी कुलीलाईन्स मे रहकर फ़िजी के लिए सिविल लाईन्स का सपना देखना और उसे समय के साथ सच करने वाले भारतवंशी फिजियन के योगदान को फ़िजी का हर नागरिक स्वीकार करता है |
सवाल –अक्सर ये देखा गया है की भारतवंशी जब किसी देश मे शीर्ष पर पहुँचते है तो भारत मे खुशी की लहर दौड़ती है पर जिस भारतवंशी की सफलता पर पूरा भारत झूम रहा होता है ,उनही के हाथों भारत के हितों की अनदेखी होती है क्योकि उनका पूरा कार्यकाल वो जिस देश के है वो बस उसी के है ये साबित करने मे उनका पूरा कार्यकाल बीत जाता है | आप खुद के इंडोफिजीयन पहचान पर क्या कहना चाहेंगे ?
उत्तर – देखिये मेरी पहचान इंडोफिजीयन कि है और मुझे अपनी इस पहचान पर गर्व की अनुभूति होती है |मई फ़िजी कि सरकार का उप प्रधानमंत्री हूँ ,मेरे देश कि उन्नती मेरी प्राथमिकता मेरा धर्म है और इसकी सीख मुझे उन पुरखों के परवरिश और संस्कार से मिली है जिनकी जड़े भारत से जुड़ी थी |मै ये बात पूरे आत्मविश्वास से कह रहा हूँ कि भारत के हितों कि अनदेखी मै सपने मे भी नहीं सोच सकता| रही बात इंडोफिजीयन पहचान कि तो ये केवल पहचान की नहीं है इसमे मेरे पूर्वजों की थाती शामिल है |मेरी दादी गोंडा की थी ,शुरू मे मुझे बताया गया था ,भारत मे गोंडा नाम से दो स्थान है एक उत्तर भारत के राज्य उत्तर प्रदेश मे है वहीं दूसरा गोंडा नाम का स्थान दक्षिण भारत के आंध्र प्रदेश मे है ,मेरे लिए मेरी दादी के जन्मस्थान वाले गोंडा का चयन थोड़ा मुश्किल था ,एक दिन मुझे मेरे एक मित्र ने कहा की आपके घर सर यानि मस्तक के लिए कौन सा शब्द बोलते है ? मेरे घर मे माथा ,मुंडी और मूरी शब्द का चलन था, मित्र ने कहा फिर तो साफ है आपकी दादी यूपी वाले गोंडा की ही थी | मेरे परदादा का संबंध देहारादून से था | परदादा और दादी कि जन्मभूमि पर प्रोफेसर बिमान का अधिकार किसी भी भारतीय से कही भी कम नहीं है ,इसलिए कह रहा हूँ फिजियन के लिए ,गिरमिटियों के लिए भारत पितरो कि भावभूमि है|
सवाल – फ़िजी मे भारतवंशी फिजियन की सुरक्षा को लेकर आप क्या सोचते है ? साथ ही क्या आप भरोसे से कह सकते है की फ़िजी मे अतीत की पुनरावृति नहीं होगी ?
उत्तर –ये बात बिलकुल सही है की फ़िजी मे इंडो फिजियन समुदाय को अतीत मे नस्लीय उत्पीड़न सहना पड़ा था,पर यकीन जानिए अब वो दौर नहीं लौटेगा,फ़िजी की मौजूदा सरकार एक सक्षम और समावेशी सोच की सरकार है,हमारी सरकार की प्राथमिकता मे नागरिक सुरक्षा सर्वोपरि है| समन्वय और सहअस्तित्व फ़िजीयन परंपरा के मूल मे है|हमारी सरकार लोकतन्त्र और मानवाधिकारों की पक्षधर सरकार है|
सवाल –पिछले दिनो फ़िजी मे चुनाव परिणाम के बाद इंडो फिजियन के घरों पर हमले की बात कही गयी थी,क्या इसे अतीत का दुहराव नहीं माना जाना चाहिए ?
उत्तर – देखिये ये बात बिलकुल झूठी है,भारतवंशी फिजियन को निशाना बनाए जाने की बात, हार से हताश हुये पूर्व प्रधानमंत्री वोरेक बैनीमरामा और उनके साझेदार ऐयाज़ सैय्यद खैयूम के प्रोपगैंडा का हिस्सा था | फ़िजी की पुरानी सरकार ने इंडोफिजीयन नागरिको को उस वक़्त के विपक्ष और आज के सत्ता पक्ष से हमेशा फर्जी अफवाहों के जरिये डरा कर रखने की कोशिश की,मै आभारी हूँ फ़िजी के सभी नागरिक समूहों का ,खास तौर पर इंडोफिजीयन सुमदाय का जिसने ढोंगियों को सत्ता से बेदखल पर हमारे तीन दलों के गठबंधन सरकार पर अपना विश्वास जताया है | बैनीमरामा और खैयूम के भीतर का लोकतन्त्र ठीक वैसा ही है जैसा भारत के पड़ोसी मुल्क मे सेना के तानाशाहों के दौर मे रहा है |
सवाल – गिरमिट के इतिहास और संस्कृति पर फ़िजी मे अब तक हुये काम को लेकर आप क्या सोचते है ?
उत्तर – मै मानता हूँ गिरमिटयों का इतिहास फ़िजी के इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है ,पर पूर्वर्ती सरकार की नीति और निर्णय की वजह से फ़िजी के भीतर गिरमिट के विषय पर अब तक नाम मात्र का काम हुआ है | देश के पाठ्यक्रम मे आदिवासी समुदाय के इतिहास को जिस रूप मे स्थान मिला है मुझे लगता है ठीक ऐसे ही गिरमिट के इतिहास को विस्तार से पाठ्यक्रम मे शामिल करने की जरूरत है | हमारी सरकार मे गिरमिट की कहानी,गिरमिटियों की संस्कृति और परंपरा फ़िजी के इतिहास और पाठयक्रम मे उस रूप मे दर्ज होगी ,जिस रूप मे वर्षों पहले दर्ज हो जाना चाहिए था |
सवाल – भारत मे गिरमिट विषय पर अब तक हुये पहल और प्रयास पर आपकी राय क्या है ?
उत्तर – कायदे से कहूँ तो भारत के जन जन को गिरमिट का इतिहास अब तक पता होना चाहिए था | पर यहाँ भी अबतक भारत की एक बड़ी आबादी इतिहास के उस हिस्से से अनभिज्ञ है जिसमे दुनिया के सबसे बड़े पलायन का नाम गिरमिट दर्ज है | गिरमिट मतलब इतिहास का वो हिस्सा जो भारत की कोख से पैदा हुआ था ,जिसमे अंतहिन पीड़ा,संघर्ष और प्रतिकूलता के बाद भी सफलता के सोपान पर पहुँचने की कहानी है,यथार्थ की वो कहानी जिसमे कुली के कुलीन होने का सफर है ,जहां मजदूर के मजबूत होने की यात्रा है, जो गिरमिटि से गवर्नमेंट होने की गौरव गाथा है, इतिहास के इस पन्ने का अबतक संरक्षण,संवर्धन शेष है | पर मुझे खुशी इस बात की है भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल मे न केवल गिरमिट इतिहास पर चर्चा का चलन बढ़ा है , बल्कि गिरमिट देशों के साथ भारत का नैसर्गिक संबंध भी पहले से ज्यादा मजबूत और प्रभावी नज़र आ रहा है | भारत के भीतर डायस्पोरा पर शोध और बोध के बढ़ते चलन से मै उत्साहित और आशान्वित हूँ |
सवाल – फ़िजी के गिरमिट स्मरण दिवस पर आपका नज़रिया क्या है ?
उत्तर – 14 मई को फ़िजीजन गिरमिट स्मरण दिवस मानते है|साल 1879 के मई की 14 तारीख ही वो दिन था जब पहली बार गिरमिटिया पुरखों का पहला दल भारत से फ़िजी पहुंचा था|तब उस समूह में लगभग 500 गिरमिटिया थे और साल 1916 के आखिरी खेप तक 60 हज़ार 553 भारतवंशी गिरमिटिया की पहचान के साथ फ़िजी पहुँच चुके थे |गिरमिटिया पूर्वजो के पुण्य स्मरण का ये दिन फ़िजी के लिए बहुत महत्व का है |मुझे यह जानकार बहुत खुशी हुई की पिछले साल राजधानी दिल्ली मे भी गिरमिट स्मरण दिवस मनाया गया, मै इस आयोजन के लिए नई दिल्ली स्थित अपने दूतावास और यहाँ के हाई कमिश्नर कमलेश शशि प्रकाश के साथ साथ गिरमिटिया फाउंडेशन के प्रमुख दिलीप गिरि को बधाई देता हूँ | गिरमिट की बात और और अपने सपूतों का स्मरण भारत मे होते रहना चाहिए |
सवाल – फ़िजी मे हो रहे 12 वें विश्व हिन्दी सम्मेलन को किस रूप मे देखते है आप ?
उत्तर – विश्व हिन्दी सम्मेलन को लेकर फ़िजी उत्साहित है ,गौरवान्वित है,फ़िजी मे हिन्दी का चलन और हिन्दी प्रेम का अतीत बहुत सुंदर रहा है साथ ही ये भी सच है की फ़िजी की पुरानी सरकार के वक़्त मे हिन्दी और हिन्दी के साथ साथ फ़िजी की स्थानीय आदिवासी भाषा इतोकेइ उपेक्षा हुई है ,हमारी सरकार ने हिन्दी और इतोकेइ को फ़िजी मे संसद की भाषा का दर्जा दिया है | हिन्दी एक वैश्विक भाषा है इसका चलन और ज्ञान फिजी के उन्नयन मे सहायक होगी ये मेरा विश्वास मेरी धारणा है|
सवाल – आपकी सरकार ने हाल ही मे चीन के साथ फ़िजी के पुराने सुरक्षा समझौते को रद्द किया है, ये समझौता किस प्रकार का था ? और इसे रद्द करने की वजह क्या थी ?
उत्तर – चीन के नागरिक सुरक्षा मंत्रालय के साथ साल 2011 मे फ़िजी की तत्कालीन सरकार ने फ़िजी पुलिस फोर्स का एक सुरक्षा करार कराया था ,इस समझौते के तहत फ़िजी के पुलिस अधिकारी प्रशिक्षण के लिए जब चीन मे होते थे चीन के अधिकारी तीन से छह माह के लिए फ़िजी एटेचमेंट प्रोग्राम के तहत फ़िजी मे पदस्थापित किए जाते थे |साल 2021 मे एक चीनी अधिकारी को फ़िजी पुलिस का लायजन ऑफिसर नियुक्त कर दिया गया ,ये मामला देश की संप्रभुता के लिए गंभीर था | हमारी सरकार का साफ मानना है की जिस देश के मूल्यबोध फ़िजी के मूल्यबोध से मिलते हो एचएम उनके साथ साझेदारी के लिए उत्सुक है | मानवीय अधिकार ,कानून का शासन और सुशासन फ़िजी के मूल्यबोध है ,हमारी सरकार इससे बाहर का कोई फैसला नहीं करेगी |
सवाल- महासागर के प्रशांत क्षेत्र मे चीन की बढ़ती आक्रमकता पर आपका नज़रिया क्या है ?
उत्तर – देखिये चीन एक शक्ति सम्पन्न देश है उसकी अपनी रणनीति और विदेश नीति है ,जहां तक प्रशांत क्षेत्र का सवाल है तो इस क्षेत्र मे फ़िजी समेत दर्जन भर से ज्यादा स्वतंत्र और लोकतान्त्रिक देशो का अस्तित्व है ,इस क्षेत्र की प्रगति ,उन्नति ,शांति सुरक्षा के सवाल पर भारत ,अमेरिका ,औस्ट्रेलिया ,और जापान जैसे शक्ति सम्पन्न देश की भी पैनी निगाह और उनकी स्वतंत्र रणनीति भी सक्रिय है | शांत,समृद्ध,और चिरस्थाई ,समावेशी विकास के लिए समूचे प्रशांत के सभी देश स्वाभाविक और उदार, मित्र देशों के स्वागत के लिए हमेशा तैयार है |
सवाल -आपने भारत ,यूएस ,औस्ट्रेलिया और जापान का ज़िक्र किया है आप क्वार्ड को कैसे देखते है ?
उत्तर – हिन्द-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा और प्रगति के लिए खास तौर पर आर्थिक विकास मे क्वाड की भूमिका बहुत महत्वकारी है |भारत ,अमेरिका ,औस्ट्रेलिया और जापान के इस चार सदस्यीय समूह से प्रशांत के देशों बहुत उम्मीद है ,चारो देश लोकतांत्रिक पृष्टभूमि के है ,निर्बाध समुद्री व्यापार और सुरक्षा के साझा हितो का समर्थन करने वाले इस समूह की भूमिका आनेवाले वक़्त और भी प्रभावी और व्यापक होगी,ऐसी मेरी मान्यता है |
सवाल – फ़िजी की नई सरकार मे शामिल होने के बाद यह आपकी पहली आधिकारिक भारत यात्रा है ,इस यात्रा का हासिल क्या रहा ?
उत्तर – फ़िजी की नव निर्वाचित सरकार के किसी मंत्री की यह पहली विदेश यात्रा रही है ,और इस यात्रा का अवसर सबसे पहले मुझे मिला है ,इससे भी सुखद बात यह है की बतौर उप प्रधानमंत्री मुझे अपनी पहली विदेश यात्रा मे भारत आने का अवसर मिला है |पाँच दिनो की अपनी इस यात्रा को मै शत प्रतिशत सफल मानता हूँ |इस यात्रा के पहले पड़ाव मे मै बैंगलुरु मे भारत के पहले ऊर्जा सप्ताह का हिस्सा रहा |डी कार्बनाईजेशन जैसे महत्वपूर्ण मसले पर मैंने अपने देश और प्रशांत क्षेत्र की चिंता से दुनिया के तमाम देश के प्रतिनिधियों को अवगत कराया| अक्षय और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र मे मैंने अपने देश के लिए भारत की सरकार से प्रौद्योगिकी के हस्तानांतरण की मांग की जिसका भारत की सरकार ने केवल स्वागत किया बल्कि सहर्ष तकनीक को साझा करने पर सहमति जताई है | इसके अलावे सस्ते लागत के ऊर्जा सम्पन्न आवास निर्माण के तकनीक को भी भारत की सरकार ने फ़िजी के साथ साझा करने की सहमति दी है| भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ साथ आवासन और शहरी मामलो के अलावा पेट्रोलियम और प्रकृतिक गैस के मंत्री हरदीप सिंह पूरी के साथ कई महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर हमारी सार्थक ,सफल सहमति बनी है | भारत के साथ सभी प्रकार के संबंधो को मजबूत करने की दिशा फ़िजी ने अपनी पहल की शुरुआत की है| आने वाले समय मे जल्द ही आपको मेरी यात्रा के कई सुखकारक परिणाम नज़र आएंगे |
सवाल –व्यापार के लिहाज से फ़िजी मे भारत के लिए आप कितनी और कैसी संभावना देखते है ?
उत्तर- फ़िजी, भारत और भारत के उद्योगपतियों के लिए एक आईडियल हब है,इस बात को सबसे पहले भारतीय प्रधानमंत्री के तौर नरेंद्र मोदी जी ने समझा और स्वीकार किया है | बात 2014 के नवंबर महीने की है जब प्रधानमंत्री मोदी फ़िजी की आधिकारिक यात्रा पर थे ,उसी दौरान उन्होने हिन्द- प्रशांत द्वीप सहयोग मंच(एफआईपीआईसी) की शुरुआत की थी | हिन्द प्रशांत क्षेत्र की खुशहाली के लिए बनाए गए इस फ़ौरम मे प्रशांत के सभी 14 द्वीप देश शामिल है |एफआईपीआईसी की तीसरी बैठक इसी साल पापुआ न्यू गिनी मे निर्धारित है | एफआईपीआईसी की स्थापना और फ़िजी मे प्रथम कौंफ्रेस पीएम मोदी की दूरदर्शी नीति का परिचायक है ,प्रशांत के छोटे और स्वतंत्र 14 देशो के बीच फ़िजी को खुद पीएम मोदी ने हब के रूप स्वीकार किया है |फ़िजी और प्रशांत के द्विपिए देशो के जनमन मे पीएम मोदी ने अपने नीतियों के जरिये एक भरोसे का रिश्ता बनाया है | बात चाहे फ़िजी मे आपदा बनकर आए समुद्री तूफान की हो या कोविड के आपदा काल की हो,पीएम मोदी की सरकार ने प्रशांत के द्वीप देश को हमेशा संभालने मे अपनी भूमिका निभाई है | प्रशांत के द्वीप देशो मे भारत भरोसे का नाम है ,यहाँ प्रकृति केन्द्रित व्यापार उद्योग की असीम संभावना है |मै खुले मन से यहाँ की सरकार और निजी उद्योगपतियों को फ़िजी मे निवेश के लिए आमंत्रित कर रहा हूँ |

