दीनबंधु सिंह
देश स्वच्छता अभियान चला रहा है। पीएम स्वच्छ भारत स्वस्थ भारत का नारा दे रहे है लेकिन देश को स्वस्थ रखने की जिम्मेदारी जिनके कंधों पर है उनकी ही गैरजिम्मेदार रवैया और लापरवाही शहर में गंदगी पैदा कर रही है और लोग बीमार पड़ रहे है। जी हां ये नज़ारा सीवान का है। आप देख सकते हैं डाॅक्टर दिनेश कुमार सिंह ने सड़क पर कितने हक़ से अपने हाॅस्पीटल के वेस्टेज को फेंक रखा है। ये सीवान के मशहूर शिशु रोग विशेषज्ञ हैं। यहां नवजात बच्चे भी आते हैं जिनमें इंफेक्शन का सबसे अधिक खतरा होता है। पर डाॅक्टर साहेब को इसकी क्या परवाह। सड़क तो जैसे अकेले इन्हीं के टैक्स से बनी है। बात सिर्फ एक दिन की हो तब भी इनका गुनाह कम नहीं लेकिन यह एक दिन का नहीं बल्कि रोज का आम नजारा है। हो भी क्यों न । लोग बीमार होंगे तभी तो इनकी मोटी कमाई होगी। ये प्राइवेट डॉक्टर धनबल के नशे में इतने चुर हैं कि इन्हें किसी से कोई भय नहीं। प्रशासन की ये सुनते नहीं, प्रसाशन इन्हें कुछ कहता नहीं।
यह सिर्फ एक क्लिनिक की बात नहीं, पूरा सीवान, छपड़ा, गोपालगंज में निजी अस्पतालों के बाहर इस तरह के दृश्य आसानी से देखे जा सकते हैं। सरकारी चिकित्सा व्यवस्था की बदतर स्थिति के कारण लोग इनके पास आने को मजबूर हैं। यही कारण है कि हर गली नुक्कड़ पर ऐसे निजी अस्पताल और क्लिनिक उग आए हैं जहां बुनियादी सुविधाओं के अभाव के बावजूद इन डॉक्टरों के यहां मरीजो की लगती लंबी कतारों ने इन्हें कानून के उल्लंघन की ट्रेनिग दी है। बेसुमार पैसा, और सिविक सेंस का अभाव की वजह से पूरा शहर मेडिको कचड़े में तब्दीली होता जा रहा है रहा है। जिसकी वजह से संक्रमन का खतरा बना हुआ है। अब आपहीं बताएँ ऐसे हेल्थ माफियाओं को कैसे समझाया जाय।


