नीलम
आमतौर पर संसद या विधान सभा चुनावों में ज्यादातर प्रत्याशी सिर्फ इसलिए खड़ा होते हैं ताकि उनकी पहचान बन सके। इनमें से ज्यादातर लोगों की जमानत भी जब्त हो जाती है। कई प्रत्याशी तो जमानत की राशि भी उधारी लेकर ही जुटाते हैं,और जमानत जब्त हो जाने पर इस कर्ज को चुकाने के लिए जद्दोजहद करते रहते हैं। लेकिन बिहार के आगामी पंचायत चुनाव में प्रत्याशियों के लिए एक राहत वाली खबर है। बढ़ती मंहगाई का जमानत राशि पर कोई प्रभाव नहीं हुआ है। जी हां,बिहार राज्य निर्वाचन आयोग ने निर्णय लिया है कि पंचायती राज व्यवस्था के तहत सभी छह स्तर के पदों के लिए चुनाव लड़ने वालों से जमानत राशि वही ली जायेगी, जो 2011 के पंचायत चुनाव में तय थी। आयोग ने पंचायत चुनाव में जमानत राशि को न बढ़ाने का फैसला है। गौरतलब है कि आयोग ने चुनाव में उम्मीदवारों के खर्च की अधिकतम सीमा में लगभग तीन गुणा वृद्धि का प्रस्ताव भेजा है, लेकिन जमानत राशि में कोई बदलाव नहीं होगा। अन्य चुनावों की तरह इस चुनाव में भी कोई उम्मीदवार किसी पद के लिए एक से ज्यादा सेट में नामांकन-पत्र दाखिल कर सकेगा, लेकिन जमानत की राशि एक ही बार जमा करेगा।
पद कोटि जमानत की राशि
मुखिया, सरपंच सामान्य 1000 रु
मुखिया, सरपंच महिला, एसी, एसटी, पिछड़ा 500 रु
जिप सदस्य सामान्य 2000 रु
जिप सदस्य महिला, एसी, एसटी, पिछड़ा 1000 रु
वार्ड सदस्य, सामान्य 250 रु
वार्ड सदस्य महिला, एसी, एसटी, पिछड़ा 125 रु
