चुनावी राज्यों की आगामी सरकारों को कर्ज के साथ मिलेगी सत्ता

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     अंकित पाण्डेय

देश के पांच राज्यों में चुनावों की घोषणा हो चुकी है। चुनाव नजदीक आते ही क्षेत्रीय और राष्ट्रीय पार्टियां सक्रिय हो जाती हैं। राजनीतिक दलों की ओर से मतदताओं से लुभावने वादे किए जाते हैं, वो बात अलग है कि उन वादों को पूरा करने के लिए कोई वैधानिक बाध्यता नही है। सबसे ज्यादा वादे किसानों को लुभाने के लिए किए जाते हैं जिसमें किसानों की कर्ज माफी या भत्ते, महिलाओं के लिए तमाम तरह की योजनाएं आदि के वादे किए जाते हैं। भले ही उस राज्य पर राजस्व घाटा पहले से ही हो।

वास्तविकता यह है कि जिस भी पार्टी की सरकार इन राज्यों में आएगी उसे भारी भरकम कर्ज के बोझ विरासत में मिलने वाली है। अगर सिर्फ मध्य मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना की बात करें तो 2019 से 2022 के दौरान इनकी सरकारों ने कुल 5,03,126 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है। आरबीआइ ने अपनी रिपोर्ट में मध्य प्रदेश, राजस्थान व छत्तीसगढ़ को लेकर कहा है कि इन पर बढ़ता कर्ज का लंबे समय तक बरकरार रहना चिंता का विषय है। हालांकि इन राज्यों की आगामी सरकारों के लिए अच्छी बात यह है कि कोरोना के बाद भारतीय इकॉनमी जिस गति से पटरी पर लौटी है, उसका असर इन राज्यों के राजस्व पर भी दिखने के आसार हैं। ऐसी स्थिति में नई सरकारों की तरफ से कुशल वित्तीय प्रबंधन दिखाया जाए तो कर्ज लौटाने की चुनौती से पार पाया जा सकता है। रिजर्व बैंक की और से राज्यों के बजट पर हर वर्ष एक रिपोर्ट जारी की जाती है। इसे राज्यों की वित्तीय स्थिति और सरकार के आर्थिक प्रबंधन की स्थिति जानने का सबसे सटीक रिपोर्ट माना जाता है। दैनिक जागरण ने आरबीआइ की पिछले चार

वर्षों की सालाना रिपोर्टों की पड़ताल करके कुछ तथ्यों की छानबीन की है। इससे जो तस्वीर सामने आती है, उसके मुताबिक चुनाव में जाने वाले चार प्रमुख राज्यों की मौजूदा सरकारों ने अपने कार्यकाल के पहले तीन वर्षों में जमकर कर्ज लिया है। मध्य प्रदेश ने 89,450 करोड़ रुपये, राजस्थान ने 147,600 करोड़ रुपये, छत्तीसगढ़ ने 28,643 करोड़ रुपये और तेलंगाना ने 2,37,405 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है। मार्च, 2023 तक मप्र पर कुल 3,78,617 करोड़ रुपये राजस्थान पर 5.37,055 करोड़ रुपये, तेलंगाना पर 3,66,607 करोड़ रुपये का कुल कर्ज है। छत्तीसगढ़ सरकार ने विधानसभा में बताया है कि जनवरी, 2023 तक उस पर कुल 82,125 करोड़ रुपये कर्ज है।

 

कर्ज की राशि में भारी वृद्धि की अहम वजह कोरोना महामारी

कर्ज की राशि में भारी वृद्धि की एक अहम वजह कोरोना महामारी का काल है। जिसकी वजह से सभी राज्यों के राजस्व के अपने स्त्रोत सूख गए थे। दिसंबर, 2023 में इन राज्यों में जिसकी भी सरकार बनेगी, उसे आने वाले पांच वर्षों के दौरान इस कर्ज के एक बड़े हिस्से की अदायगी करनी होगी। आरबीआइ के आकड़े बताते हैं कि वर्ष 2024-25 से वर्ष 2028-29 के दौरान मध्य प्रदेश पर बकाए कर्ज की 40 प्रतिशत राशि चुकानी होगी। राजस्थान की नई सरकार को 40 प्रतिशत, तेलगांना की नई सरकार को 29 प्रतिशत कर्ज की राशि चुकानी होगी। सबसे ज्याद छत्तीसगढ़ की आगामी सरकार को मौजूदा कर्ज की तकरीबन 70 प्रतिशत राशि चुकानी होगी, लेकिन जिस हिसाब से राजनीतिक दलों के बीच रेवड़ियां बांटने की घोषणा हो रही है, उसको देखते हुए लगता है कि राजस्व संग्रह का एक बड़ा हिस्सा चुनावी वादों को पूरा करने में ही चला जाएगा।

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