संतोष कुमार सिंह
गोली नंबर 10.. डॉक्टर के दुकान पर आपने भी डब्बों पर नंबर की चिट लगा देखा होगा..गोली नंबर 1..2..3…4 आदि लेकिन यह क्या ये तो गोली नंबर 10 है। लेकिन यह गोली किसी बीमारी को भगाती नहीं बल्कि बढ़ाती है। अभी बचपन से किशोरावस्था के दहलीज पर ठीक से पांव भी न बढ़ा पाने वाली बच्चियों को देहव्यापार में ढ़केलती है। उनके अंदर कामेच्छा बढ़ाती है। उनके अंदर शारीरिक बदलाव लाती है ताकि वे कुछेक वर्षों में ही शारीरिक रूप से इतना तैयार हो जाये कि वह देह व्यापार के दलदल में आसानी से उतारा जा सके। यह कोई मनोहर कहानी नहीं बल्कि आपबीति है..सच्ची घटना है, मन की पीड़ा है..उस समाज का दर्द है जो अपने को सभ्य कहता है। महिला सुरक्षा के दावे करता है, बेटी पढ़ाओ…बेटी बेटी बचाओ के नारे देता है। लेकिन जब बेटियां स्कूल और खिचड़ी तो देता ही है लेकिन साथ ही देता है गोली नंबर 10 की खुराक ताकि वो काम क्रिया के लिए तैयार की जा सके।
दिल्ली के सुल्तानपुरी से लेकर हरियाणा व राज्स्थान के अलवर तक जुड़े इस अपराध के तार के को परत दर परत पर्दे पर उकेरा है गांव वाला क्रिएशन की टीम ने कि कैसे देह व्यापार के दलदल में उतारने के लिए पूरा तंत्र काम करता है। और बालिकाओं के मनोमस्तिस्क पर इनका क्या प्रभाव पड़ता है जो चंद सिक्के खनकाते और गोली नंबर 10 की खुराक देकर उनके जीवन को बद से बदतर बनाते रहे हैं।
वैसे तो क्राईम पेट्रोल की ज्यादातर एपिसोड हालांकि समाज में फैले अपराध पर ही होती है लेकिन गोली नंबर 10 के जरिए बालिकाओं के शोषण की सच्ची घटना को और इस सामाजिक बुराई पर सोनी चैनल के क्राईम पेट्रोल के लिए एपिसोड बनाकर ‘गांव वाला क्रिएशन‘ की टीम की तरफ से निश्चित ही इस दिशा में सराहनीय प्रयास किया गया है। आप भी अवश्य देखें साथ ही नजर रखें अपने इर्द गिर्द कि कोई मासूम बेटियों को ‘गोली नंबर 10′ की खुराक तो नहीं दे रहा।

