खेत का कचरा है, खेत का सोना

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मनीष अग्रहरि

हमारे देश में सदियो से रवायत रही है कि अज्ञानता के कारण किसान भाई खेत के फसल अवशेषों को कचरा समझकर या तो खेत में ही जला देते है या फिर उन्हे पशुओं को खिलाने के काम में लेते है। ज्यादातर देखने में आता है कि खास तौर पर पुवाल वगैरह तो खेत में ही जला दिया जाता है जिससे सिर्फ खेत को नुकसान ही नुकसान होता है, फसल अवशेषो को जलाने से खेत के लाभदायी सूक्ष्मजीव मर जाते है इससे खेत को दोहरा नुकसान होता है। क्यो कि इससे जहाँ एक ओर लाभदायी सूक्ष्म जीव मर जाते है, वही दूसरी ओर खेत की मिट्टी इन अवशेषो में पाये जाने वाले महत्वपूर्ण पोषक तत्वो से वंचित रह जाती है। अतः जरूरत है कचरा समझे जाने वाले फसल अवशेषो को खेत में कंचन समझ कर मिला देने की।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल लगा चुका है अवशेषों के जलाने पर रोकः फसल अवशेषो को जलाने पर न केवल वायु प्रदूषण के माध्यम से पर्यावरण प्रदूषण बढ़ रहा है बल्कि ग्लोबल वार्मिंग भी बढ़ता चला जा रहा है। हाल ही में चार नवंबर, 2015 को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने उत्तर भारत के राज्यो दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और राजस्थान के खेतो में फसल अवशेषो को जलाने पर सख्त फैसला लेते हुए किसानो पर 15 हजार रूपये तक जुर्माना लगाने का फैसला किया है।

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क्या है एनजीटी का आदेश आदेशः 4 नवंबर को एनजीटी ने कहा कि जिन राज्यों में पुआल जलाए जाने संबंधी रोक की अधिसूचना जारी नही की गई है वह उसे तत्काल लागू करवाये। एनजीटी ने पर्यावरण शुल्क के तौर पर (जुर्माना) सभी प्रकार के छोटे, मंझोले, और बड़े किसानो से 15 हजार रूपये तक वसूल करने का फरमान सभी राज्यो को दिया है। इसके साथ ही एनजीटी ने सभी राज्यों को फसल अवशेषो के निस्तारण के लिए किसानो को मशीन मुहैया कराने का आदेश भी दे रखा है।

कैसे हो रहा है दुरूपयोगः खास तौर से गेहूँ, गन्ने की हरी पत्तियां, साग-सब्जियों के हरे पत्ते व डंठल पशुओ को खिलाये जाते है, जब कि धान का पुवाल, गन्ने की सूखी पत्तियां, सनई आदि को खेत में ही जला दिया जाता है। यह समस्या उन खेतो में अधिक होती है जहाँ, गेहॅू की कटाई हारवेस्टर द्वारा होती है क्योकि इसमें कटाई के बाद फसल अवशेष खड़े रह जाते है। जिसे लोग जलाना ज्यादा ठीक समझते है। यदि फसलों के अवशेषों को जला कर नष्ट न करके खेत में ही जुताई के समय मिला दिया जाये तो यह जीवांश खाद में बदल जायेगा।

कैसे होगा उपयोगः वर्तमान में हमारे देश में इस कार्य को बेहतर तरीके से करने के लिए रोटावेटर सरीखे मशीन आसानी से उपयोग में लाए जा सकते है, यह एक बार में ही जुताई के साथ फसल अवशेषो को कतर कर मिट्टी में मिला देता है। जिन क्षेत्रो में नमी की कमी हो वहाँ पर फसल अवशेषों का सही प्रबंधन करने के लिए जरूरी है कि अवशेषो को खेत में जलाने के बजाय उनसे कम्पोस्ट तैयार कर खेत में प्रयोग करना चाहिए। उन क्षेत्रों में जहाँ चारे की कमी नही होती वहाँ मक्का की करवी व धान के पुवाल को खेत में ढ़ेर बनाकर खुला छोड़ने के बजाय गड्ढ़ो में कम्पोस्ट बनाकर उपयोग करना मुनासिब है।

आलू तथा मूगफली जैसी फसलों की खुदाई्र के बाद बचे अवशेषो को भूमि में जुताई के साथ मिला देना चाहिए। मूंगग व उरद की फसल में फलियां तोड़कर खेत में मिला देना चाहिए। इसी प्रकार से केले की फसल के बचे अवशेषो से कम्पोस्ट तैयार कर लेना चाहिए।

कचरे में ही भरा है कंचनः किसान भाई फसल अवशेषो को प्रायः कचरा समझ कर जला देते है मगर वही कचरा यदि खेतो में मिला दिया जाये तो किसी कंचन से कम नही है। खेतो को कई पोषक तत्व तो मिलते ही है साथ ही मिट्टी के जीवाश कार्बन की मात्रा में भी वृद्वि हो जाती है। मृदा में जलधारण की क्षमता, एवं सूक्ष्म जीवो की मात्रा में भी वृद्वि हो जाती है। इन सबसे इतर मिट्टी में अन्य और कई भौतिक, जैविक एवं रसायनिक सुधार होता है।

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कुछ और ध्यान देने वाली प्रमुख बातेः फसल की कटाई के बाद खेत में बचे अवशेषो, घास-फूस, पत्तियां व ठूठ आदि को सड़ाने के लिए किसान भाइयो को फसल को काटने के बाद 20-25 कि0 ग्रा0 नत्रजन प्रति हेक्टेअर की दर से छिड़काव कर रोटावेटर अथवा कल्टीवेटर से जुताई करके मिट्टी में मिला देना चाहिए। इससे पड़े हुए अवशेष खेत में विघटित होने लगेगे तथा लगभग एक माह में अपने आप विघटित होकर आगामी बोई जाने वाली फसल को पोषक तत्व प्रदान करेगें क्यो कि कटाइ्र्र के बाद दी गई नत्रजन अवशेषो के सड़ने की क्रिया को तेज कर देती है। यदि फसल अवशेष खेत में ही पड़े रहे तो फसल बोने पर जब नई फसल के पौधे छोटे रहते है तो वह पीले पड़ जाते है, क्यो कि उस समय अवशेषो के सड़ाव में जीवाणु भूमि की नत्रजन का प्रयोग कर लेते है तथा शुरूआत में फसल पीली पड़ जाती है। अतः फसल अवशेषो का प्रबंध नत्रजन छिड़क कर जरूर करना चाहिए इससे हम अपनी जमीन में जीवांश पदार्थ की मात्रा में तेजी से वृद्वि कर जमीन को खेती योग्य सुरक्षित रख सकते है।

                    

                              

 

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