संपादक की कलम से

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संपादक की कलम से,

Santosh Kumar

अभी हाल ही में कई राज्यों में पंचायत चुनाव कराए गए हैं। हर बार की भांति इस बार भी हमारे गांव—गवई, छोटे कस्बों के मतदाताओं ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बढ—चढकर भागीदारी की। इस भागीदारी से लोकतंत्र मजबूत होता है, और अपेक्षा भी बढती है। ऐसे में चुनी हुई गांव की सरकार,पंचायत की सरकार से गांव और गांव में रह रहे देश के दो तिहाई लोग इस उम्मीद से देख रहे हैं कि यह सरकार उनके जनजीवन में कितना बदलाव लाती है। पानी,शौचालय, स्वास्थय, कृषि, पलायन के रूप में जो समस्यायें उनके सामने मुंह बाये खड़ी हैं और सत्ता के विकेंद्रीकरण के जरिए उनका समाधान चाहती हैं,वास्तविक स्वराज मांगती हैं, उनको हल करने में पंचायत की सरकार क्या रूख अख्तियार करती है। इन्ही सब सवालों के इर्द—गिर्द गांव की तस्वीर बदलने वाली प्रत्येक योजना, उनका कार्यान्यवयन, निष्पादन में उभरती कमिंयों और शासन द्वारा किये जा रहे प्रयासों पर पैनी नजर होगी। ताकि पंचायत स्तर की सरकारें जब हमारे पास जनादेश के लिए आयेंगी तो हम यह पूछ सकें कि आपने हमारे सवालों को कितना तरजीह दिया, उसके समाधान की दिशा में क्या प्रयास किये जिससे हमारा जीवन स्तर उंचा उठा और भारतीय लोकतंत्र जो कि गांवो में बसता है, वह किस हद तक अपना हक मांग सका। वे हमारी अपेक्षाओं पर कितने खड़े उतरे। हमारा मानना है कि हर दिल में एक गांव बसता है। इसलिए गांव व पंचायत वहां के जनजीवन से जुडी हर बात, हर तस्वीर, हर खबर पर होगी हमारी नजर। हम अपेक्षा करते हैं कि गांव—गंवई से जुड़ने के panchayatkhabar.com के इस सफर में आप भी सहर्ष सहभागी बनेंगे।

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