बुन्देलखंड में घर-घर में हैं देवराज, आप बनें आशीष सागर

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चंदन कुमार

“हिम्मते मर्दा, मददे खुदा”। लेकिन किसान देवराज के हिम्मत के आगे तो कोई भी घुटना टेक दे। शर्मशार होने की बजाय व्यवस्था अपना पीठ थपथपाने में लगी हुई है की उन्होंने 40 साल से एक पैर के सहारे हल चलाकर खेती करने वाले किसान को आर्टिफिशियल पैर लगवा दिया और पांच लाख रुपए की आर्थिक सहायता भी देने का ऐलान किया है।

जी हाँ यह रोज खुदकुशी करने वाले किसानो की खबरों से भी न चोकने वाले प्रशासन के लिए पीठ थपथपाने का सुनहरा मौका हो सकता है, लेकिन सवाल तो यह है की इस देश की रीढ़ मने वाले देवराज जैसे किसानो की इस अवस्था के लिए दोषी कोन है। आखिर देवराज को इतने दिनों तक इंतजार क्यों करना पडा?

क्या है मामला

बांदा जिले के बेबरू गांव के देवराज सिंह यादव पिछले 40 साल से एक पैर की जगह लाठी बांध हल चला कर अपनी रोजी रोटी चला रहे थे लेकिन अब उनके जिंदगी में भी खुशियां लौट आई है। सोशल मीडिया पर फोटो वायरल होने के बाद खुद सीएम अखिलेश यादव मदद के लिए आगे आए. अब उनको कृत्रिम पैर मिल गया है. वहीं 5 लाख की सहायता राशि भी दी गयी है।

asish sagare6cfयूँ गुजर रही थी जिदगी

चार बीघे कृषि भूमि का मालिक किसान देवराज यादव (64) का दाहिना पैर करीब 40 साल पहले डॉक्टरों ने जांघ से काट दिया था। परिवार में दो वक्त की रोटी का संकट आया तो हिम्मत नहीं हारी और कटे पैर में बांस की लाठी बांधकर वह अन्य किसानों की भांति खेत में हल जोत रहा है। बकौल देवराज, “करीब 40 साल पहले खेत में हल चलाते समय बैल के लात मारने से लगी चोट से दाहिने पैर में स़डन पैदा हो गई थी। कानपुर के डॉक्टरों ने जांघ के पास से उसका पैर काट कर अलग कर दिया।” वह बताता है, “एक दिन खेत की मे़ड पर बैठकर खेती करने के बारे में सोच ही रहा था कि अचानक लाठी बांधकर हल चलाने का प्रयास किया। कई बार गिरने, चोट खाने के बाद अब अन्य किसानों की भांति अपने खेत में हल चलाकर परिवार के लिए दो वक्त की रोटी का इंतजाम कर लेता हूं। उसके पास सरकारी कर्ज नहीं है, पर गांव के साहूकारों का 25 हजार रूपये पांच रूपये प्रति सैक़डा ब्याज की दर वाला कर्ज है…फिर भी भरोसा है कि हिम्मत न हारने वाले की ऊपर वाला भी मदद करता है, आत्महत्या करना बुजदिलों का काम है।” उसकी पत्नी रानी बताती है कि उसके पति अब एक पैर व लाठी के सहारे रोजमर्रा के सारे काम कर लेते हैं। चार बीघे की फसल से उनके परिवार का आराम से बसर हो जाता है। सरकारी मदद के नाम पर उसके पति को सिर्फ 500 रूपये प्रति माह पेंशन मिल रही है।

हर महीने 1200 रुपए देते हैं ब्‍याज

प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी भले ही यह दावा करें की जनधन योजना और मुद्रा बैंक से किसानो की रह आसान होगी, लेकिन देवराज जैसे हिम्मती किसानो के सामने किसान कल्याण की सारी योजनायें कागजी खाना पूर्ति और आधी अधूरी प्रतीत होती हैं ? देवराज ने बताया कि तीन साल पहले उन्‍होंने बुंदेलखंड के एक साहूकार से 25 हजार रुपए कर्ज लिया था। तीन साल बीत जाने के बाद भी साहूकार प्रति महीने 1200 रुपए ब्याज के रूप में वसूलता है। वहीं, यूपी सरकार की ओर से उन्‍हें सिर्फ 300 रुपए प्रति महीने पेंशन के रूप में मिलती है।

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