आलोक रंजन, युवा पत्रकार
जिला परिषद और पंचायत समीति का चुनाव भले ही ख़तम हो गया लेकिन प्रधानी तो है। प्रधानी मने रुतबा, पैसा, फंड तो ए मौके को कैसे जाने दें यही कारन है की उत्तर प्रदेश में इन दिनों पंचायत चुनाव में गवई राजनीति चरम पर है। कई ऐसे प्रत्याशी है जो पिछले दिनों बीडीसी या जिला परिषद का चुनाव हार गये तो अब प्रधानी में भाग्य आजमाने की सोच रहे है । समर्थको के साथ बैठकी का दौर जारी है। पासा फेके जा रहे हैं, बिसात बिछाई जा रही है कल तक गारी से निचे पों न रखने वाले बाबु भी अब जमीं पर हैं गाँव की चौहद्दी नाप रहें हैं। गावों के लोग भी कहाँ चुकने वाले हैं, मतदाता अपना महत्व समझ रहे हैं। गाँव के चौपाल पर तेरही-बरही में बिन बुलाये मेहमान बनकर पहुच रहे दावेदारो के बारे में चटखारे लिये जा रहे है। लोग कहने से नही चूक रहे….‘का हो एतना दिन त नाही देखईला…आज चुनाव लडत हय त हितैषी बन गईल……‘।
खास बात यह है कि किसी के घर होनी-अनहोनी पर पूरा खर्च तक उठाने की दावेदारों के बीच होड़ मची हैं। यह स्थिति किसी एक गाँव की नही लगभग सभी की है। गाँव में प्रधानी के दावेदार वही खड़े हो रहे जिसके पास धनबल है। इनमे युवाओ व पढ़े लिखे लोगों की संख्या बहुतायत हैं। सभी अपने-अपने तरीके से चुनाव प्रचार में लगे हैं। अधिवक्ता से लेकर ठेकेदार तक, कार्यकर्ता से लेकर राजनीतिक दलों से जुड़े नेता तक। वैसे भी गाँव के विकास की भूमिका ग्रामप्रधान ही तय करता हैं। सम्मानजनक पद होने के साथ यह गाँव के विकास के लिए आने वाले लाखों के बजट नइ प्रधानी के चुनाव को काफी रोचक बना दिया है।
बीडीसी पद पर हारे विकासखंडो के कई ऐसे प्रत्याशी अपना निवास, जाति प्रमाणपत्र बनवाने के लिए तहसील के चक्कर काट रहे है। बीडीसी का चुनाव हार गये मगर अब प्रधानी में दाव आजमाने की तयारी कर रहे है। विकास के दावे किये जा रहे हैं । नाली-गली-खरंजा से लेकर पक्के सड़क के वादे । बस एक ही दावा मौका दें …गाँव को बदल कर रख देंगें सेवोपुरी के ग्जेपुत गाव के बबलू कहते है कि गाँव का विकास तभी सम्भव है जब प्रधान पद का दावेदार सरकारी योजनाओ के बारे में जनता हो। अफसरों के बीच पकड़ हो और अपने गाँव की समस्याओं, विकाश योजनाओं का ब्लू प्रिंट जिसके पास हो। गाँव के विकास का एजेंडा पहले से तय करले । वही सिहोरवा गाँव के मणि सिंह कहते है कि मतदाता उन लोगों को अपना प्रधान चुने जो गाँव का शैक्षणिक माहौल को प्राथमिकता दे और बुनियादी सुविधाओ का विकास करे। रोजी रोजगार और गाँव के युवाओं के पलायन पर रोक की योजना देने वाले को पंचायत सर्कार में मौका दें। लेकिन मतदाताओं को यह भी पता है अबकी ए हैं तो शायद अगले चुनाव में ही आयें, इसलिए सवाल दाग कर उनके दावे को परखने की पुरजोर कोशिश जारी है।

