डिजिटल इंडिया की ओर बढ़ा झारखंड

कुमार कृष्णन

झारखंड के बने 15 साल हो गए। अब सवाल उठने लगे हैं कि बिहार से अलग होकर जिस मकसद को लेकर झारखंड का निर्माण हुआ था, क्या उसे हासिल करने में सफलता मिली है?

इसका जवाब लोग-बाग अपने-अपने तरीके से ढूंढ़ रहे हैं। लेकिन झारखंड की वर्तमान रघुवर सरकार ने राज्य के संदर्भ में जो फैसला लिया है, उसका असर दिखाई देने लगा है। झारखंड डिजिटल इंडिया कार्यक्रम की तरफ कदम बढ़ाता दिखाई दे रहा है। राज्य सरकार ने डिजिटल इंडिया की परिकल्पना को साकार करने के लिए इसे प्राथमिकता सूची में रखा है। साथ ही इस संदर्भ में कई अहम फैसले कर रही है। इस संदर्भ में नीति को लागू करने वालों की राय है कि गुड गवर्नेंस पर इसके दूरगामी प्रभाव दिखाई देंगे। उनका यह भी दावा है कि झारखंड अगले पांच साल में देश का और दस साल में दुनिया के सबसे विकसित राज्यों की श्रेणी में होगा। इसके तहत सूबे में ऑनलाइन सेवाओं की संख्या छह से बढ़ाकर 54 की गई है।

मौजूदा दौर सूचना तकनीक का है। राज्य की दो तिहाई जनता मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रही है। सरकार की ओर से दी जाने वाली सुविधाओं को आम जन तक पहुंचाने का एक सशक्त माध्यम मोबाइल हो सकता है। इसलिए राज्य सरकार ने इस वर्ष स्थापना दिवस का मूल ध्येय ‘मोबाइल गवर्नेंस’ ही रखा है। स्थापना दिवस पर विभिन्न विभागों की ओर से 15 मोबाइल एप्लीकेशन शुरू किए गए हैं। राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास का कहना है, ”जनता के लिए सर्वसुलभ सरकार को आकार देना इसका मकसद है। जनता के लिए प्रदान की जा रही सरकारी सेवाओं एवं कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अब राज्य की जनता कहीं भी प्राप्त करने में समर्थ होगी।” आगे उन्होंने यह भी कहा कि इससे एक तरफ प्रक्रियाएं आसान होंगी। जनता को सरकारी दफ्तरों के धक्के नहीं खाने होंगे। साथ ही प्रक्रिया सरल होगी और समय की बचत होगी। प्रशासन और शासन में व्याप्त भ्रष्टाचार पर तो अंकुश लगेगा ही।

स्मरण रहे कि पहले आम लोगों को जाति, आवासीय, आय और जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्र की सुविधा प्रज्ञा केन्द्रों के माध्यम से ऑन लाइन रांची में ही उपलब्ध थी। अब प्रमाण पत्र प्रक्रिया प्राप्त करने की सुविधा पूरे प्रदेश में लागू कर दी गई है। मुख्यमंत्री का दावा है कि 70 प्रतिशत भ्रष्टाचार को सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) आधारित सेवाओं के जरिए रोका जा सकता है। इससे बिचौलिया और दलाल की भूमिका स्वत: समाप्त हो जाएगी। बशर्ते आम-जनता इन सेवाओं का उपयोग करे और बिचौलियों की भूमिका समाप्त करने में सरकार का सहयोग करे।

A pedestrian uses a Samsung Electronics Co. mobile phone to send an SMS text message in Kigali, Rwanda, on Wednesday, Sept. 18, 2013. Coffee-producing Rwanda's economy has doubled in size in the nine years through 2010, according to the World Bank. Photographer: Will Boase/Bloomberg via Getty Images

बेशक झारखंड डिजिटल इंडिया के सपने को पूरा करने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। प्रदेश की रघुवर सरकार तरह-तरह की योजनाएं लागू कर रही है। उसका असर भी दिखाई देने लगा है, लेकिन यह काफी नहीं है। राज्य सरकार ने निगरानी ब्यूरो को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के रूप में गठित किया है। अब तक 50 से ज्यादा भ्रष्ट अधिकारी और कर्मचारी रिश्वत लेते पकड़े जा चुके हैं। ‘मोबाइल गवर्नेंस’ झारसेवा के माध्यम से जानी जाती है। पहले की तुलना में लोगों को कम समय में सरकारी सेवाओं का लाभ मिल रहा है। लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में यदि आम लोगों को सरकारी दफ्तर में धक्के खाने से निजात मिले तो यह महत्वपूर्ण बात है। बदली कार्य संस्कृति से आए परिवर्तन को विश्व बैंक के अलावा सीआईआई जैसे अग्रणी औद्योगिक संगठन और केंद्र सरकार के औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग (डीआईपीपी) ने भी मान्यता दी है। राज्य सरकार ने पेमेंट गेटवे के माध्यम से कई विभागों के लिए ऑनलाइन सेवा उपलब्ध कराई है। सरकार का मकसद है कि सभी तरह की सुविधाएं आम लोगों को सूचना प्रौद्योगिकी के माध्यम से उपलब्ध हों।

झारखंड देश का पहला राज्य बन गया है, जहां आधार आधारित मिड-डे मील मॉनिटरिंग सिस्टम प्रभावी है। राज्य के दूर-दराज इलाकों के स्कूलों में भी बच्चों और शिक्षकों की उपस्थिति, उपलब्ध कराए गए भोजन की सामग्री, ड्रॉपआउट (स्कूल छोड़कर जाने वाले) की स्थिति इत्यादि की ऑनलाइन निगरानी संभव होगी। इस प्रणाली के माध्यम से बच्चों के स्कूल अनुपस्थित होने की स्थिति में उनके अभिभावकों के मोबाइल पर एसएमएस के जरिए जानकारी देने का भी प्रावधान किया गया है।

रघुवर सरकार ने ‘जनसंवाद’ का कार्यक्रम आरंभ किया है। यह लोगों की समस्याओं को हल करने में बड़ा कारगर साबित हो रहा है। जनसंवाद की पहल पर मांडर मरिया टोली की रहने वाली महिला सुशीला को अपनी मेहनत की कमाई हासिल हो पाई है। दरअसल, सुशीला ने अपने बेहतर भविष्य के लिए अपलाइन ग्रुप ऑफ कंपनीज में 10 हजार रुपए जमा कराए थे, ताकि कालावधि पूरा होने पर उसे अच्छी रकम प्राप्त हो सके।

दस साल की कालावधि पूरा होने पर सुशीला जब रकम वापस लेने गई, तब उसे रकम की जगह घोर निराशा मिली। कंपनी रकम लौटाने से आना-कानी कर रही थी। सुशीला ने इस संबंध में थाने में शिकायत दर्ज कराई। स्थानीय विधायक से भी मिली। कई जगह आवेदन दिया, परन्तु उसे निराशा ही हाथ लगी। आखिर में थक-हारकर जनसंवाद केन्द्र में शिकायत दर्ज कराई। वह मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव संजय कुमार से भी मिली और अपनी परेशानी से उन्हें अवगत कराया। मामले को संज्ञान में लेते हुए प्रधान सचिव ने सुशीला कुजूर का आवेदन योजना एवं वित्त विभाग के प्रधान सचिव अमित खरे को सौंपा। सुशीला के आवेदन पर त्वरित कार्रवाई हुई और उसे 40 हजार रुपए अपलाइन ग्रुप ऑफ कंपनी से प्राप्त हुए।

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जमशेदपुर की ममता देवी की कहानी भी इसी तरह की है। उनकी कोई सुनने वाला नहीं था। वह अपने पति के चिकित्सा खर्च के लिए जगह-जगह भटक रही थी। ममता के पति कॉमा में भर्ती थे। ऑपरेशन का खर्च बड़ा था। सरकारी प्रक्रिया का लाभ लेने के लिए कोई एक सूची बनाकर देने को तैयार नहीं था। न ही उसका आय प्रमाण बन पा रहा था। हारकर वह जनता दरवार में मुख्यमंत्री से मिली। मौके पर ही मुख्यमंत्री ने सिविल सर्जन से कहा, ”इस मामले पर गौर करें। इसे शिकायत लेकर दोबारा हमारे पास न आना पड़े। आखिर क्यों छोटी- छोटी बातों को लेकर लोग हमारे पास आएं।
राज्य के स्थापना दिवस यानी बीते 15 नवंबर को मुख्यमंत्री ने ‘मुख्यमंत्री विद्या लक्ष्मी योजना’ का भी शुभारंभ किया है, इसके तहत पांचवीं कक्षा पास सभी अनुसूचित जाति व जनजाति की बालिकाओं के नाम दो-दो हजार रुपए बैंकों या डाकघरों में फिक्स होंगे

इसका असर यह हुआ कि प्रशासन ने पहल की। डेढ़ लाख रुपए खर्चकर उस महिला के पति का ऑपरेशन कोलकाता से डॉक्टर बुलाकर कराया गया। धीरे-धीरे ममता का पति स्वस्थ्य हो रहा है। उसे उम्मीद है कि उसके पति फिर से स्वस्थ्य होकर पारिवारिक जिम्मेदारी संभालने में सक्षम हो सकेंगे।

बात सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है। मुख्यमंत्री की सीधी बात/जनसंवाद कार्यक्रम में विद्युत विभाग के अशोक उपाध्याय ने मेहरमा में ट्रांसफार्मर बदलकर विद्युत आपूर्ति बहाल करने संबंधी गलत जानकारी दी। उपायुक्त, गोड्डा द्वारा मौके की जांच कराने पर गलत प्रतिवेदन की पुष्टि हुई। इसके बाद अशोक उपाध्याय को तत्कालिक प्रभाव से निलंबित कर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई चलाने का आदेश दिया है।

कोंकर से संतोष कुमार सिंह कहते हैं कि उनका काम कल्याण विभाग में पिछले चार-पांच सालों से लंबित था। जनसंवाद केन्द्र में इसकी शिकायत की तो काम में तेजी आई है। वे इस व्यवस्था को लाभदायक मानते हैं।

मुख्यमंत्री के सचिव सुनील बर्णवाल बताते हैं कि सभी जिले के नोडल अधिकारियों से कहा गया है कि वे अपने यहां लंबित मामलों का निपटारा प्राथमिकता के साथ करें। जिस जिले में ज्यादा मामले लंबित होंगे, वहां के नोडल अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई तय है। यह भी कहा गया है कि झारखंड के किसी भी सरकारी स्कूल में मिड-डे मील एक दिन के लिए भी बंद नहीं होना चाहिए। यह बच्चों पर कृपा नहीं की जा रही है, बल्कि यह सरकार और उसके अधिकारियों का उत्तरदायित्व है।

लोगों की शिकायतें जनसंवाद के माध्यम से सरकार को मिल रही हैं। देवघर के धावाघाट गांव से यह शिकायत आई थी कि वहां की राशन डीलर रानी देवी द्वारा लोगों को नियमित रूप से राशन नहीं दिया जा रहा है। सितंबर माह का राशन नवंबर तक ग्रामीणों को नहीं मिला है। इस पर तत्काल डीएसओ से जवाब तलब करने का निर्देश दिया गया। ऐसी ढेरों शिकायतें हैं, जिसका तत्काल समाधान निकालने की कोशिश हो रही है।

वहीं औद्योगिक विकास के लिए सरकार ने सिंगल विंडो सिस्टम लागू किया है। इसके लिए उद्योग लगाने के लिए अब एक ही आवेदन पर सभी तरह के क्लीयरेंस देगी। अब इसके लिए उद्यमियों को अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं लगाने होंगे। एटवांटेज झारखंड पोर्टल का निर्माण भी किया गया है। इसके अंतर्गत खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए 880 करोड़ रुपए की योजना का एमओयू हस्ताक्षर किया गया है। साथ ही उद्यमियों के जरिए भूमि की निशानदेही की जा रही है। इसके अलावा भूमि आवंटन नीति लागू की गई है। निजी औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने के मकसद से झारखंड औद्योगिक पार्क नीति 2015 लागू की गई है। वहीं निर्यात को प्रोत्साहन देने के इरादे से झारखंड निर्यात नीति 2015 बनाई गई है।

राज्य के स्थापना दिवस यानी बीते 15 नवंबर को मुख्यमंत्री ने ‘मुख्यमंत्री विद्या लक्ष्मी योजना’ का भी शुभारंभ किया है, इसके तहत पांचवीं कक्षा पास सभी अनुसूचित जाति व जनजाति की बालिकाओं के नाम दो-दो हजार रुपए बैंकों या डाकघरों में फिक्स होंगे। इसके साथ स्वास्थ्य केन्द्रों में टेलीमेडिसिन की सेवा का शुभारंभ किया गया। ऐसी कई योजनाएं शुरू की गई हैं। बेशक इन योजनाओं का असर आने वाले दिनों में दिखेगा।

इसके बावजूद चुनौतियां कम नहीं हैं। सस्ते श्रम की मांग का सबसे बुरा नतीजा मानव व्यापार के रूप में लगातार सामने आ रहा है। झारखंड सरीखे राज्यों की स्थिति सबसे खराब है, जहां मानव तस्करी रोकने की तमाम कोशिशों के बावजूद यह सिलसिला थम नहीं रहा है। क्या डिजिटल झारखंड की तरफ मजबूती से कदम बढ़ाते हुए प्रदेश की सरकार इस दिशा में कोई मजबूत कार्यक्रम लागू करेगी? यदि वह ऐसी कोई योजना सफलतापूर्वक लागू करने में कामयाब होती है तो प्रदेश का मुकम्मल विकास निश्चित है।

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