झारखंड की बेटियों के लिए महफूज नहीं दिल्ली- एनसीआर

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संतोष कुमार सिंह

प्रधानमंत्री बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ का संकल्प हरियाणा में दिलवाते रहे और खट्टर साहब पंचायत चुनाव में हाथ पर मुहर लगवा कर लोगों को बेटी बचाने का संकल्प दिलवाये लेकिन हरियाणा और दिल्ली एनसीआर में झारखंड के बेटियों की अस्मत की कोई कीमत नहीं।  भले ही झारखंड में अच्छे दिन का सपना दिखाया जा रहा हो लेकिन आज एक नाबालिग बेटी गुरगांव में फिर से प्रताड़ना का शिकार हुई। उसे गुरगांव के एक घर से बंद आलमीड़ा से निकाल कर अस्पताल भेजा गया ताकि स्वास्थय जांच हो सके। उसके चेहरे और शरीर पर कटे हुए का कई निशान है। वह झारखंड के गुमला की रहने वाली है। मात्र 14 साल की लड़की ने बताया कि उसके नियोक्ता रोज उसकी पिटाई करते था, और बहुत कम खाने को देता था। शक्तिवाहिनी के ऋृषिकांत के अनुसार,’उसे बुरी तरह पीटा गया है, और उसके सारी शरीर पर जख्म के निशान हैं। इतना ही नहीं उसे एक दिन में मात्र दो रोटी दी जाती थी और आधी रात तक काम कराया जाता था। नियोक्ता के दो बच्चों के देखभाल के लिए उसे रात में भी कई बार उठना पड़ता था।’

jharkhand_nनाबालिग लड़की द्वारा दी गयी जानकारी के अनुसार उसके चाचा उसे दिल्ली लेकर आये। वह वर्तमान नियोक्ता के यहां पिछले 6 माह से काम कर रही है। जब इस बात की जानकारी पड़ोसियों को मिली तो उन्होंने चाईल्ड लाईन को  शिकायत कर लड़की के साथ मारपीट की जानकारी  दी। चाईल्ड लाईन ने पुलिस को शिकायत की और संयुक्त रूप से रेड मारा गया। चाईल्ड वेलफेयर कमिटी की प्रमुख शकुन्तला धुल के अनुसार,’व्यवसायी परिवार ने पुलिस से बचने के लिए उसे स्टोर में  छिपा दिया था। जिसे पुलिस ने दोबारा रेड कर ढूढ निकाला’।

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