
चंदन कुमार
जैसे-जैसे झारखंड में पंचायत चुनाव की बेला नजदीक आ रही है, पंचायत प्रतिनिधियों को अधिकार सौपें जाने की कवायद भी जोर पकड़ रही है। इससे सत्ता के विकेंद्रीकरण का मार्ग प्रशस्त होगा। पिछले दिनों राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि झारखंड में सार्वजनिक वितरण प्रणाली की निगरानी और निरीक्षण का अधिकार पंचायती राज संस्थाओं के पास होगा। इसके साथ ही राज्य के जन वितरण प्रणाली की दुकानों में खाद्यान्न वितरण के लिए बायोमेट्रिक हैंड हेल्ड डिवाइस लगाया जाएगा. इसके लिए 23.92 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई. पब्लिक डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम की निगरानी और पर्यवेक्षण करने का अधिकार पंचायती राज संस्थाओं को देने का फैसला किया है। अब पंचायतें जन वितरण की दुकानों को कंट्रोल करेगी।
इस प्रक्रिया को और आगे ले जाते हुए अब किसानों से जुड़े मसलों मसलन बीज, खाद,फसलबीमा,किसान क्रेडिट कार्ड बनाने और देखरेख का अधिकार को भी पंचायतों को सौपने की तैयारी है। बीज,खाद बाटने, जरुरत के आकलन का अधिकार पंचायत के पास होगा। हालाकी इसका वितरण लैम्प्स/पैक्स के जरिये किया जाएगा। किसानों को कृषि लोन मिले इसका जिम्मा पंचायत और पंचायत समिति के पास होगी। हालांकि केसीसी देने का अधिकार बैकों के पास है, लेकिन यहां भी मोनिटरिंग का अधिकार पंचायत के पास रहेगा। फसल बीमा भले ही किसानों के खाते में जायेगा लेकिन फसल बीमा के लिए किसान को प्रोत्साहित करने का काम पंचायत करेगी, साथ ही किसको फसल बीमा मिले इसकी सूची पंचायत तैयार करेगी। जरूरत के अनुसार खाद्यान्न प्राप्त करने, भंडारण करने का अधिकार पंचायत समिति के पास होगा, लेकिन मॉनिटरिंग का अधिकार जिला परिषद को दिया गया है।
जनसेवक मुखिया के अधीन होगा
साथ ही साथ जनसेवक को पूरी तरह से मुखिया के अधीन कर दिया गया है। अब मुखिया जी से ही उनको छुट्टी लेनी परेगी, क्योंकि उनकी हाजिरी रजिस्टर अब मुखिया के पास होगा। उनके रिपोर्ट के बाद ही उन्हें प्रखंड विकास पदाधिकारी अर्थात वीडियो साहब वेतन देंगे। उनकी बहाली जिला परिषद द्वारा होगी, और तबादले का अधिकार प्रखंड प्रमुख और बीडीओ के पास होगा। प्रखंड प्रमुख के अनुशंसा के बाद बीडीओ उनका तबादला कर सकेंगे। इतना ही नहीं प्रखंड कृषि पदाधिकारी, प्रखंड पशुपालन अधिकारी, सहकारिता से जुड़े अधिकारी अब पंचायत समीति के तहत काम करेंगे और प्रखंड विकास पदाधिकारी अर्थात बीडीओ साहब वेतन देंगे। उनके छुट्टियों सीएल, ईएल का अधिकार पंचायत समीति के पास होगा।