स्वच्छता सर्वेक्षण के आठवें संस्करण के लिए आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने स्वच्छ भारत मिशन शहरी 2.0 के तहत स्वच्छ सर्वेक्षण (एसएस)-2023 के लिए टूल किट जारी कर दिया है।
इस बार प्रतियोगिता 7500 के बजाय 9500 अंकों पर होगा। प्रतियोगिता का थीम ‘वेस्ट टू वेल्थ’ रखा गया है। सर्वेक्षण में थ्री आर- रिड्यूस, रिसाइकल एंड रीयूज के सिद्धांत को प्राथमिकता दी जाएगी, यानी कचरा कम करें, रिसायकल करें और पुन: उपयोग करें। स्वच्छ सर्वेक्षण-2023 के माध्यम से शहरों के भीतर वार्डों की रैंकिंग को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
शहरों के मेयरों को रैंकिंग में भाग लेने और सबसे स्वच्छ वार्डों को सम्मानित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके अलावा ‘खुले में शौच’ (येलो स्पॉट) और ‘खुले में थूकने’ (रेड स्पॉट) के पैरामीटर्स पर भी शहरों का मूल्यांकन किया जाएगा।
जिस शहर में जितना रेड स्पॉट व येलो स्पॉट मिलेंगे, उसके अंक कम होते जाएंगे। इस वर्ष आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय आवासीय और वाणिज्यिक क्षेत्रों की पिछली गलियों की सफाई को शामिल किया गया है। इस बार शहरों का मूल्याकंन 3 के बजाय 4 चरणों में किया जाएगा।
8% अंक कचरा उठाव और उसके निस्तारण पर मिलेंगे, 26 फीसदी सिटीजन फीडबैक पर
स्वच्छता सर्वेक्षण-2023 के तहत 9500 अंक निर्धारित किए गए हैं। जिसमें 48 प्रतिशत अंक यानी 4525 अंक अकेले सर्विस लेवल प्रोग्रेस यानी कचरा उठाव और उसके निस्तारण पर मिलेगा। 2022 में इसके लिए 3000 अंक निर्धारित थे। वहीं, 26 प्रतिशत यानी 2500 अंक सर्टिफिकेशन के होंगे और 26 प्रतिशत यानी 2475 अंक सिटीजन फीडबैक के होंगे। 2022 में सर्टिफिकेशन व सिटीजंस फीडबैक पर 2250-2250 अंक निर्धारित थे।
2016 में स्वच्छता सर्वेक्षण शुरू किया था। जिससे प्रतियोगी शहरों में स्वच्छता को बढ़ावा मिला है। 2016 में पहले वर्ष महज 73 शहरों में स्वच्छता सर्वेक्षण की यात्रा शुरू हुई थी। 2017 में यह प्रतियोगिता 434 शहरों, 2018 में 4,203 शहरों, 2019 में 4,237 शहरों, 2020 में 4,242 शहरों, 2021 में 4,320 शहरों और 2022 में 62 छावनी बोर्ड सहित 4,355 शहरों के बीच हुई।
