बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए कई अभियान चलाए जा रहे हैं। पोषण और स्वास्थ्य के तार एक-दूसरे से जुड़े होने के कारण दोनों की स्थिति में सुधार हुआ है। इसमें पहल स्वरूप आंगनबाड़ी केंद्रों से लेकर स्कूलों तक में पौष्टिक आहार दिए जा रहे हैं। इसका सकारात्मक असर भी देखने को मिल रहा है। साप्ताहिक मेनू के अनुसार मिलनेवाला भोजन पौष्टिक तत्वों की जरूरतों को पूरा कर रहा है। इसे लेकर प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं। हालांकि, स्थानीय लोगों के विचार इसके विपरीत हैं। उनका कहना है कि बच्चों को सहीं तरीके से लाभ नहीं मिल रहा है। कई स्तरों पर अब भी खामियां हैं और उनमें सुधार की जरूरत है। बच्चों को ये मिलता पोषाहार
प्राइमरी विद्यालयों में पके भोजन में कम से कम 450 कैलोरी ऊर्जा, 12 ग्राम प्रोटीन उपलब्ध हो। कुपोषण में मध्याह्न भोजन योजना इस लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण कड़ी है। इसमें पहली से पांचवीं व छठी से आठवीं कक्षा के छात्रों के लिए अलग-अलग राशि है। पहली से पांचवीं कक्षा के लिए चार रुपये 13 पैसे और छठी से आठवीं कक्षा के लिए छह रुपये 18 पैसे निर्धारित हैं। इसी राशि से बच्चों को 20 से 30 ग्राम दाल, तेल पांच से 7.5 एमएल, 20 से 30 ग्राम हरी सब्जी, मौसमी फल देना है। जिला शिक्षा अधिकारी, ने कहा कि ‘स्कूलों में पका पकाया भोजन दिया जा रहा है। बच्चों को पौष्टिक आहार दिया जाता है। कैलोरीयुक्त भोजन की प्राथमिकता होती है। इसके अच्छे परिणाम आ रहे है। बच्चों में कुपोषण का स्तर कम हो रहा है।’ मध्य विद्यालय महम्मदपुर कन्या के सुधीर कुमार ने कहा कि बच्चों को कैलोरीयुक्त भोजन दिया जा रहा है। मेनू का शत प्रतिशत अनुपालन हो रहा है। इसके अच्छे परिणाम दिख रहे हैं। हालांकि, राशि में बढ़ोतरी नहीं होने से काफी परेशानी हो रही है।
