सांप्रदायिक सौहार्द के प्रतीक हजरत गुलाब शाह बाबा

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नौगांव कभी बुंदेलखंड की राजधानी हुआ करता था। सौ से ज्यादा चौराहों वाले बुंदेलखंड की सभी रियासतों के ‘हाउस‘ यहां हुआ करते थे। आज उसी नौगांव की ऐसी कहानी बता रहा हूं जो मुल्क में धर्म के नाम पर वितंडा खड़ा करने वालों की आंखें खोल देगा। यहां हर साल अक्टूबर में बाबा गुलाब शाह की मजार पर उर्स होता है। हर जाति, धर्म के लोग यहां आते हैं। दिलचस्प बात यह है कि एक इस्लामी सूफी की मजार पर ‘बिस्मिल्लाह‘ यानी 786 और ओम नमः शिवाय साथ-साथ लिखा है। मजार की दीवारों पर हर धर्म के चित्र, उपदेश अंकित हैं।

हजरत बाबा गुलाब शाह रहमत उल्लाह अलैह का संबंध हजरत बाबा ताजुउद्दीन ओलिया सरकार नागपुर से है, वे इनके गुरु थे। बाबा गुलाब शाह नौगांव निवासी थे। उनका जन्म लगभग 1858 में हुआ था। उनका निधन 1966 में हुआ। मजार में भगवान कृष्ण की मूर्ति बाबा ने अपने सामने बनवाई। बाबा गुलाब शाह कृष्ण उपासक थे, लेकिन वे सभी धर्मों का सम्मान करते थे। इनकी दरगाह में सभी धर्मों के लोगों का आना होता है। यहां धर्म पेटी लगाने, चंदा करने और कमेटी बनाने से बाबा ने मना किया था। इस आदेश का पालन यहां आज भी हो रहा है। सालाना उर्स 8 अक्टूबर से 14 अक्टूबर के बीच होता है। जन्म उत्सव 8 जनवरी को मनाया जाता है। प्रत्येक गुरूवार व शुक्रवार को यहां मेले जैसा आयोजन होता है।
नौगांव में अंग्रेजों की सैनिक छावनी रही है। अंग्रेजों ने यहां पर २८ बंगलों का निर्माण कराया था। हर बंगला के साथ करीब 5-5 एकड़ जमीन छोड़ी गई थी। आजादी के बाद इन बंगलों को सेना के आधिपत्य में दे दिया गया। बाद में नौगांव से आर्मी का सेंटर चला गया तो रक्षा मंत्रालय ने बंगलों को प्रशासन को सुपुर्द कर दिया था। जब दोबारा नौगांव में आर्मी का सेंटर आया तो फिर रक्षा मंत्रालय ने सभी बंगलों को अपने अधिकार में ले लिया। जिन बंगलों में लोग रहते हैं, उन्हें छोड़कर बंगलों की पूरी खाली जमीन रक्षा मंत्रालय के अधीन है। इस पर बोर्ड लगाकर रक्षा मंत्रालय ने जमीन को सुरक्षित भी कर रखा है। लेकिन कुछ लोग घोषित सरकारी जमीन को निजी बनाकर उस पर कब्जा करने के लिए प्रयासरत है।

अंग्रेजी राज्य से पूर्व बुंदेलखंड में अनेक जागीरें और छोटे-छोटे राज्य थे। बुंदेलखंड कमिश्नरी का गठन सन 1820 में हुआ। सन 1835 में जालौन, हमीरपुर, बांदा जिलों को उत्तर प्रदेश और सागर जिले को मध्यप्रदेश में मिला दिया गया जिसकी देखरेख आगरा से होती थी। सन 1839 में सागर और दामोह जिले को मिलाकर एक कमिश्नरी बना दी गई जिसकी देखरेख झाँसी से होती थी। कुछ दिनों बाद कमिश्नरी का कार्यालय झाँसी से नौगाँव आ गया।
इतिहासकार दिनेश सेन बताते हैं कि नौगांव नगर की स्थापना 1842 में मिस्टर डब्ल्यू एस सिलीमेन ने एक बिग्रेड सेना के सैनिकों के ठहरने के लिए की थी। देशी रियासतों के बीच में होने के कारण अंग्रेजी अफसरों ने इस जगह को छावनी बनाने के लिए चुना। इन रियासतों को कंट्रोल करने एवं लगान वसूलने के लिए छावनी की स्थापना की गई थी। जिसके लिए ब्रिटिश हुकूमत ने छतरपुर के तत्कालीन महाराज प्रताप सिंह से 19 हजार वार्षिक किराए पर नौगांव में कुछ जमीन ली थी। सन 1842 में अंग्रेजी हुकूमत के अधिकारी सिलीमेन ने जैतपुर बेलाताल की रियासत पर आक्रमण कर दिया जिसमें महाराज परीक्षत पराजित हो गए तथा अंग्रेजों की हुकूमत बेलाताल तक हो गई। इसतरह आक्रमणों के जरिए अंग्रेजी हुकूमत 36 रियासतों तक फैल गई। इस जमीन पर अंग्रेजी अफसर डब्ल्यू एस सिलीमेन ने सन 1842 से सन 1861 तक सेना की एक टुकड़ी को तम्बू तानकर रखा। इसके बाद अंग्रेजी अफसरों ने नौगांव छावनी का पहला भवन बनवाया। इसी भवन में सरकार का पोलिटिकल एजेंट रहता था। पॉलिटिकल एजेंट से मिलने एवं लगान चुकाने के लिए लोग आते थे।

आज नौगांव अपनी दुर्दशा एवं उपेक्षा पर आंसू बहा रहा है। आजादी के पहले इसका स्वर्णिम समय चल रहा था, आजादी के बाद भी कुछ समय अच्छा रहा। इसे विंध्य प्रदेश की राजधानी बनाया गया, मुख्यमंत्री कामता प्रसाद सक्सेना का कार्यालय यहीं था। मध्य प्रदेश के गठन के बाद यहां से कई आफिस छतरपुर, सागर, सतना और भोपाल चले गए। राजधानी से घटकर नौगांव महज तहसील बन कर रह गया।

विंध्य प्रदेश के गठन के बाद 15 अगस्त 1947 से 11 अप्रैल 1948 तक नौगांव प्रदेश की राजधानी रहा। जिस भवन में आज आदर्श प्राइमरी स्कूल है, उसमें विधानसभा का सचिवालय हुआ करता था। इसी तरह सिंचाई विभाग का मुख्यालय और चीफ कंजरवेटर फॉरेस्ट के भवनों में आज सिविल अस्पताल संचालित हो रहा है। टीबी अस्पताल में सर्जन आफिस संचालित होता था। एडीजे कोर्ट परिसर में हाईकोर्ट और सेसन कोर्ट का संचालन होता था। वर्तमान के सेल्स टैक्स कार्यालय में आरटीओ मुख्यालय, कैनाल कोठी में डीआईजी निवास एवं कार्यालय, वर्तमान बस स्टैंड में सेकेट्री आवास सहित सभी कार्यालय नौगांव में संचालित होते थे। नगर का पहला भवन जिसमें कमिश्नरी कार्यालय था, उसका निर्माण 1861 में अंग्रेज अफसर मिस्टर डब्ल्यू एस सिलीमेन ने कराया था। इसके अलावा आर्मी कॉलेज रोड पर सेंट पीटर रोमन कैथोलिक चर्च का निर्माण 1869 में, सिटी चर्च 1905, सर्किट हाऊस का निर्माण 1905, नौगांव क्लब, भड़ार पुल, बड़ा पुल, टीबी अस्पताल भवन सहित अनेक इमारतें अंग्रेजी हुकूमत के समय बनी थी, जिसका उपयोग आज नगरवासी कर रहे हैं। नौगांव वर्तमान मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित है।

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