मनीष अग्रहरि
वर्षो पहले संविधान निर्माता भीमराव अम्बेडकर ने कहा था कि राज सत्ता हर ताले की मास्टर चाभी है। मगर लगता है कि यू पी के सत्ताधारी नेताओ ने अब ग्रामीण सत्ता के विकेदरीकरण को मूर्त देने वाले पंचायत चुनाव में यह चाभी लगाना चाहते है। कारण यह है कि इन नेताआ के परिजन भारी संख्या में चुनावी मैदान में है। प्रदेश के विभिन्न हिस्सो से अब तक हुए दो चरणो के मतदान में सत्ताधारी नेताओ की दबंगई की खबरे आ रही है। हर तरफ आखेट मचा हुआ है, प्रशासन नतमस्तक है। देखिये कुछ उदाहरण।
केस 1: प्रदेश के कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर के परिजन चुनाव लड़ रहे है मंत्री के घर के पास ही बने मेरठ जनपद के रार्धना गाँव के मतदान केन्द्र पूरी तरह से मंत्री के गुर्गो के प्रभाव में रहा । खबर के मुताबिक एक सिपाही बैलेट बाक्स के पास खड़ा होकर देख रहा था कि कौन किसे वोट दे रहा है। महिला मतदाताओं का भी दल था जो महिला मतदाताओं को लेकर पहुचती थी और अपने पक्ष में मतदान कराती थी। यह देख कर बसपा और भाजपा समर्थित उम्मीदवार वहाँ से बाहर हो गये।
केस 2: एटा के अलीगंज से सपा विधायक के भतीजे व प्रत्याशी पुष्पेंद्र यादव ने दूसरे चरण के चुनाव के दौरान बूथ कैप्चरिंग से रोकने पर सर्किल आफिसर (सीओ) जलेसर के साथ खूब गाली गलौज की। सीओ को देख लेने की धमकी दी। मसले पर पुलिस मुह खोलने को तैयार नही थी। जब कि नेता जी और सीओ के बीच गाली गलौच का वीडियो वायरल हो चुका है।
केस 3 : फैजाबाद के रोनाही थाने में एक मंत्री पुत्र के खिलाफ जान से मारने की धमकी देने के कारण मुकदमा दर्ज किया गया। आरोप था कि मंत्री के बेटो ने बूथो को अपने कब्जे में ले लिया था विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी गयी।
केस 4: लखीमपुर खीरी में एक विधायक के भाई चुनाव लड़ रहे है संगी साथियो के चुनाव में बाधाये आ रही थी इस लिए 50-60 दबंगो के साथ मिलकर जिले के धीरा थाने के एसआई धर्मेन्द्र कुमार को मतदान केंद्र पर थप्पड़ो से पीट दिया गया। विधायक, उनके भाई व समर्थको के खिलाफ एस आई धर्मेन्द्र कुमार ने थाने में एफआईआर दर्ज करा चुके है ।
केस 5: बलरामपुर जनपद के एक मंत्री की पत्नी बेटे एवं बहू मैदान मे है। बूथ कैप्चरिंग के लिए जनपद के उतरौला पुलिस ने बढ़ चढ़ कर साथ दिया। पुलिस और मंत्री के परिजनो के गुर्गो का चोली दामन का साथ रहा । विरोध में चुनाव लड़ रहे डाॅ अनुराग यादव ने थाने में शिकायत की मगर उल्टा अनुराग यादव के खिलाफ ही मुकदमा पंजीकृत हो गया।
केस 6: प्रतापगढ़ जनपद के एक मंत्री के बेटे और बहू चुनावी मैदान में है। ग्राम डघवट के अनिल कुमार ओझा ने नामांकन करने का प्रयास किया तो उसका पर्चा ही फाड़ दिया गया। मामले की शिकायत डीएम और राज्य निर्वाचन आयोग से किया गया मगर नतीजा सिफर रहा।
केस 7:मुजफ्फरनगर के सीकरी गांव में चुनावी रंजिश को लेकर शुक्रवार सुबह बवाल हो गया। ग्राम प्रधान पक्ष ने विरोधी पक्ष के लोगों को घेर लिया और 50 से अधिक राउंड फायरिंग की। इस दौरान तसलीम नामक युवक की सीने में गोली मारकर हत्या कर दी गई।
इस तरह से यह कुछ उदाहरण थे जो प्रदेश में चल रहे पंचायत चुनावों की साफगोई की पोल खोल रहे थे। इन उदाहरणो से स्पष्ट है कि प्रदेश में हो रहे पंचायत चुनाव पूरी तरह से सत्ताधारी दल के साये मे हो रहा है। मुखालफत करने वाले तरह तरह के हथकंडो से कुचल दिये जा रहे है। लोकतंत्र की पुरानी कहावत जनता का, जनता के लिए, जनता के द्वारा सत्ता का सत्ता के लिए और सत्ता के द्वारा में तब्दील हो रही है। लोकतंत्र का गला घोट दिया जा रहा है। एैसे में गाँधी जी का ग्राम स्वराज कैसे स्थापित होगा।
सपा के कुछ मंत्री जिनके परिजन है मैदान में: महबूब अली, पारसनाथ यादव, राजकिशोर सिंह, दुर्गा प्रसाद यादव, शाहिद मंजूर, अवधेश प्रसाद, मनोज पांडेय, कैलाश यादव, अरबिंद कुमार सिंह गोप, राममूर्ति वर्मा, डाॅ एस पी0 सिंह यादव, नरेन्द्र सिंह यादव प्रमुख रूप से है।

