दनादन गोल, आगे मार, पीछे उछाल,दनादन गोल

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संतोष कुमार सिंह
नयी दिल्लीः पढ़ोगे, लिखोगे बनोगे नवाब, खेलोगे, कूदोगे होगे खराब। बुधन के पिता से बुधन को मिली सीख उनके दिलो दिमाग में घर कर गयी है। गरीब का बच्चा खेलेगा कि कमायेगा….। ये खेल कूद अमीरों के चोचले हैं….साहब जी। हम जैसा मजदूर बच्चों को खेलने के बजाय यदि किसी दुकान पर भेजेगा तो दो पैसा आDYL Photo by Prakhar Pandey_8962येगा।

लेकिन आज बुधन बदले नजर आ रहे हैं। पंकज को दनादन गोल दागते…….गिव मी पास…हिट बॉल….की आवाज लगाते… सुनते ही आंखें नम हो जाती है। भरे गले से कहते हैं,  भरोसा हो गया मेरा बच्चा भी कुछ कर सकता है, कुछ पा सकता है, कुछ बन सकता है। बुधन के इस भरोसे के पीछे भरोसा छुपा है दिल्ली यूथ लिग के चेयरमैन पॉल सटेनबेल्ट का। जिनके प्रयास से दिल्ली में दिल्ली यूथ लीग का आयोजन दूसरी बार किया गया है। दिल्ली यूथ लीग के पहले सीजन में 28 टीम ने भागीदारी की थी, लेकिन दूसरे सीजन में 70 टीम भाग ले रही है। 1500 बच्चे अलग-अलग पृष्टभूमि, अलग नागरिकता, अलग बोलचाल लेकिन जज्बा एक फुटबॉल खेलना है। कोई मलिन बस्ती से आया है तो कोई शहर के सरकारी स्कूलों से, तो कोई नामचीन निजी स्कूल से। यूथ लीग में भागीदारी करने वाले सैकड़ों बच्चे इंटरनेशनल स्कूल से आयें हैं। अलग-अलग जर्सी, अलग-अलग रंग, अलग-अलग बूट लेकिन एक ही मकसद फूटबॉल। अलग-अलग आयू सीमा लेकिन बस जेहन में बसा है तो फूटबॉल। ‘खेल नहीं सिखाता, आपस में बैर रखना की तर्ज पर सब बच्चों के मन में बस एक ही जज्बा…..दना दन गोल.।
बातचीत में पॉल सटेनबेल्ट कहते हैं कि ‘‘ दिल्ली फूटबॉल लीग के शुरूआत के पीछे उद्देश्य था कि भारत में फूटबॉल के खेल को जमीनी स्तर तक पहुंचाया जाए। हमारा विश्वास है कि खेल खुद में ही बहुत बड़ा शिक्षक है। इसलिए हमारा उद्देश्य है कि सभी बच्चों को समान अवसर मिले, चाहे वे किसी भी आर्थिक पृष्टभूमि के हों। खेल सिर्फ खेल नहीं सीखने का बेहतर जरीया भी है।
पॉल आगे कहते हैं कि इसके पहले वियतनाम, यूरोप आदि में इसी तर्ज पर लीग का आयोजन किया जाता रहा है जो काफी सफल रहा है। अभी हम दिल्ली में बच्चों को फूटबॉल से जोड़ रहे हैं, लेकिन हमारी कोशिश होगी कि देश के अन्य शहरों में भी ऐसे फूटबॉल लीग बने ताकि बच्चों का रूझान फूटबॉल की ओर बढ़े और हर बच्चा फूटबॉल खेले। इसके आयोजन में नीदरलैंड दूतावास का काफी सहयोग है। साथ स्पोर्टस अथोरिटी आफ इंडिया भी हमारे प्रयासों की सराहना करता है। आगे हमारी कोशिश है कि नवंबर में लड़कियों के लिए अलग फूटबॉल लीग शुरू की जाए।

DSC07787अप्रैल तक चलेगा यह लीग
दिल्ली-गुड़गांव बोर्डर पर स्थित पुष्पांजली फाॅम्र्स में यह लीग अगले वर्ष अप्रैल तक चलेगा। प्रत्येक रविवार को बच्चे इस फार्म हाउस में स्थित मैदान में एकत्रित होंगें और फूटबॉल के गुर सीखेंगे।
दिल्ली यूथ लीग के उद्घाटन सत्र में आये नीदरलैंड के राजदूत अल्फांसे स्टोलिंगा ने कहा कि ‘यूरोप में शुरू की गयी ज्यादातर  लीग और अधिकांश बड़े खिलाड़ी इसी तरह के माहौल से उपर उठकर कैरियर के इस मुकाम तक पहुंचे हैं। आज जिन बच्चों को आप यहां देख रहे हैं, हो सकता है कि इनमें से कई आगे चलकर राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलें।
दिल्ली यूथ लीग में कुटुंब फांउडेशन की चार टीमें शिरकत कर रही है। कुटुंब फाउंडेशन जो कि दिल्ली के मलिन बस्तियों में काम करती है, विभिन्न बस्तियों में रहने वाले बच्चों को फूटबॉल के जरिए न सिर्फ उनका बचपना वापस दिलाने का काम कर रही है बल्कि उन्हें खेल की आदत डालकर नशे एवं ड्रग्स के चपेट में आने से भी बचाव कर रही है। कुटुंब फांडडेशन अंडर 8 के कोच औरंगजेब बताते हैं कि हम बच्चों को फूटबॉल के जरिए जीवन जीने का कौशल से जोड़ते हैं। हमारे लिये फूटबॉल ही मेक इंडिया है। जब हम रेड लाईट एरिया के बच्चों के मां-बाप को पहले यह कहने जाते थे कि आप बच्चों को फूटबॉल खेलने के लिए भेजिए तो वे साफ मना कर देते थे, लेकिन उन्हीं में से कुछ मां-बाप तैयार हुए और कहा कि ले जाओ इसी बहाने कुछ सीख लेगा। और आज यह बच्चे दिल्ली यूथ लीग के सदस्य हैं जो ईलाके के अन्य बच्चों के लिए भी प्रेरणा बने हुए हैं।

Delhi Youth League, Photo- Prakhar Pandey
Delhi Youth League, Photo- Prakhar Pandey

 

 

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