पूजा
Maa Kalratri Aarti: नवरात्रि के नौ दिनों में देवी दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की उपासना की जाती है। अष्टमी तिथि पर मां महागौरी की पूजा का विधान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार देवी महागौरी भगवान शिव की अर्धांगिनी है। और उनके साथ ही विराजमान रहती हैं। ऐसे में आइए जानते है, कि इस शुभ दिन पर मां महागौरी की पूजा कैसे की जाती है। आरती और मंत्रों का जाप किया जाए, उन्हें क्या भोग अर्पित किया जाता है।
मां महागौरी को भोग
अष्टमी के दिन मां महागौरी को नारियल से बनी मिठाइयों का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा काले चने और सूजी का हलवा भी उन्हें बहुत अत्यंत प्रिय है। मां महागौरी को नारियल और दूध से बनी मिठाइयों का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से माता प्रसन्न होती है, और जीवन में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती है।
मां महागौरी की पूजा विधि
अष्टमी के दिन महिलाएं अपने सुहाग के लिए देवी मां को चुनरी भेंट करती हैं। साथ ही देवी गौरी की पूजा का विधान भी पूर्ववत है। अर्थात जिस प्रकार सप्तमी तिथि तक आपने मां की पूजा की है उसी प्रकार अष्टमी के दिन भी प्रत्येक दिन की तरह देवी की पंचोपचार सहित पूजा करते है।
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1. स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके लिए सफेद रंग शुभ माना जाता है।
2. मां महागौरी की प्रतिमा या चित्र को गंगाजल से शुद्ध करें।
3. मां को सफेद पुष्प, कुमकुम, अक्षत, धूप और दीप अर्पित करें।
4. पंचमेवा, नारियल और दूध से बनी मिठाइयों का भोग लगाएं।
5. मां महागौरी के मंत्रों का जाप करें और दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।
6. हवन कर, कन्या पूजन करें और जरूरतमंदों को भोजन कराएं।
7. अंत में मां की आरती करें और परिवार के साथ प्रसाद ग्रहण करें।
मां महागौरी की आरती
जय महागौरी जगत की माया ।
जय उमा भवानी जय महामाया ॥
हरिद्वार कनखल के पासा ।
महागौरी तेरा वहा निवास ॥
चंदेर्काली और ममता अम्बे
जय शक्ति जय जय मां जगदम्बे ॥
भीमा देवी विमला माता
कोशकी देवी जग विखियाता ॥
हिमाचल के घर गोरी रूप तेरा
महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा ॥
सती ‘सत’ हवं कुंड मै था जलाया
उसी धुएं ने रूप काली बनाया ॥
बना धर्म सिंह जो सवारी मै आया
तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया ॥
तभी मां ने महागौरी नाम पाया
शरण आने वाले का संकट मिटाया ॥
शनिवार को तेरी पूजा जो करता
माँ बिगड़ा हुआ काम उसका सुधरता ॥
‘चमन’ बोलो तो सोच तुम क्या रहे हो
महागौरी माँ तेरी हरदम ही जय हो ॥
मां महागौरी का मंत्र
श्वेते वृषे समरूढा श्वेताम्बराधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा।।
देवी सर्वभूतेषु मां गौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।


