Chhath Puja: हर साल दिवाली के 6 दिन बाद छठ का महापर्व मनाया जाता है। इस महापर्व की शुरुआत कार्तिक शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को होती है। छठ की पूजा काफी कठिन होती है। इसमें महिलाएं पूरे 36 घंटे का निर्जला उपवास रखती हैं। छठ के महापर्व की धूम सबसे ज्यादा बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड में होती है। अब तो विदेशों में भी छठ महापर्व में धूम दिखाई देती है। इस व्रत में छठी मैया के साथ-साथ भगवान सूर्य की भी पूजा होती है। इस व्रत में कई कठिन नियमों का पालन करना होता है। इसलिए जो महिलाएं पहली बार छठ पूजा उठाना चाह रही हैं तो व्रत के नियमों का खास ध्यान रखें। कई ऐसे नियम हैं जिनके बारे में उन सभी महिलाओं को पता होना चाहिए जो पहली बार छठ पूजा करने का सोच रहीं हैं।
छठ पूजा के महत्वपूर्ण नियम
छठ पूजा की प्रक्रिया में पवित्रता बहुत महत्वपूर्ण है। इसके लिए स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें। इसके साथ-साथ अपने घर और कपड़ों को भी साफ रखें ताकि पवित्रता बनी रहे। पूजा के लिए आवश्यक सामग्री जैसे फल, मिठाइयां, दीप, फूल, दूध, आदि पहले से ही एकत्रित करें। ध्यान रखें कि सभी सामग्री नई और शुद्ध होनी चाहिए। छठ पूजा के लिए सभी सामानों को नया ही खरीदें। जो भी महिला छठ का व्रत रखती है उसे जमीन पर ही सोना पड़ता है। ऐसे में यदि आप व्रत रख रहीं हैं तो इस बात का ध्यान अवश्य रखें। छठ पूजा में सबसे अहम होता है समय का ध्यान रखना। इसलिए पूजा का समय सही से देखें और उसे पालन करें। सही समय पर पूजा करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है।
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तामसिक भोजन का सेवन न करें
तामसिक भोजन में प्याज और लहसुन आता है। ऐसे में इसको अपने घर की रसोई से बाहर निकाल दें। छठ पूजा के दौरान बनने वाले पकवानों में भी प्याज और लहसुन का इस्तेमाल नहीं होता है। साथ ही छठ की पूजा में प्रसाद का काफी ज्यादा महत्व होता है। ऐसे में प्रसाद को चूल्हे पर ही तैयार करें। प्रसाद बनाने के लिए नया चूल्हा बनाएं और इसपर प्रसाद के अलावा कुछ भी न पकाएं।
