सियासती पेंच में फसा महिला हेल्पलाइन, बंद करना चाहती है केजरीवाल सरकार

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अपराजिता संतोष

नई दिल्ली : सियासत की अपनी भाषा होती है। अपने दाव पेंच होते हैं। चुनाव के दिनों में पोस्टर लगा कर दिल्ली में बढ़ते बलात्कार के लिए तात्कालिन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित पर निशाना साधने वाले अरविंद केजरीवाल सरकार में आने के बाद उनके द्वारा शुरू किये गये महिला हेल्पलाईन को समाप्त करने पर लगे हुए हैं। 181 हेल्पलाइन की प्रमुख खदीजा फारूकी ने दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार पर हेल्पलाइन को बंद करने के आरोप लगाये हैं। प्रमुख खदीजा फारूकी ने मंगलवार को अपने इस्तीफे की भी पेशकश की। हेल्पलाइन संख्या 181 के सलाहकार के मुताबिक काफी संख्या में आने वाले फोन को लोगों एवं आधारभूत ढांचे की कमी के कारण ठीक से संचालित कर पाना मुश्किल है। हेल्पलाइन में तीन फोन लाइन हैं जिसके लिए 16 महिला कर्मचारियों की टीम है। फारूकी ने कहा, ‘‘हमारे पास सिर्फ तीन फोन लाइनें, करीब 30 प्रतिशत फोन काल्स नहीं ले पाते। हमारे पास कुछ ही लोग हैं और हमें और लोगों की जरूरत है।’’ उन्होंने बताया कि हेल्पलाइन की कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है। इसका सर्वर लगभग ठप्प हो चुका है कर्मचारियों को कई म​हीनों से वेतन नही मिला है। रात्रि डयूटी के बाद यदि कोई कर्मचारी दिन में अवकाश करता है तो उसकी छुटटी लगायी जाती है।

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उन्होंने बताया कि वेतन, वर्कलोड एवं डयूटी आवर की समस्याओं के चलते ​हेल्पलाइन में काम करने वाले 21 में से तीन कर्मचारी इस्तीफा दे चुके हैं। लगभग सालभर से समय पर सैलरी नहीं मिल रही। बीते हफ्ते दो महीने की जगह एक महीने की सैलरी मिली। महिला हेल्पलाइन 181 की प्रभारी खदीजा फारूकी ने बताया कि सरकार समझती है कि मैं किसी पॉलिटिकल पार्टी से जुड़ी हूं इसलिए वह परेशान कर रही है, लेकिन मैं महिला के मुद्दे पर काम करने वाली समाजसेवी हूं। सवाल सिर्फ मेरी समस्याओं का नहीं। पूरे विभाग की सैलरी का है। सरकार के मंत्रियों एवं अधिकारियों से इस बात की शिकायत की जा चुकी है, लेकिन उनकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नही मिली। गत एक साल से लगातार हम अपनी शिकायतें कर रहे हैं लेकिन हमारी समस्याओं की कहीं सुनवायी नही हुई ।

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महिलाओं के लिए काफी प्रभावी

इस हेल्पलाइन के जरिए बीते तीन सालों में करीब 74 हजार FIR दर्ज करवाई गई। दूसरे राज्यों के 350 मामलों को सुलझाया गया। दुबई तक से लड़की को छुड़ाया गया। लेकिन सरकार ने फोन लाइनें कम कर दीं, लिहाजा रोजाना आने वाली तकरीबन 3000 कॉल्स सिमट कर 1000 तक पहुंच गईं। इस पूरे मसले पर महिला और बाल विकास मंत्री संदीप कुमार का कहना है कि 181 को बेहतर करने की कोशिश चल रही है और इसको महिला आयोग को सौंप रहे हैं। सैलरी की समस्या की बात मेरी जानकारी में नहीं..अगर ऐसा है तो बकाया पैसा हम दे देंगे।

हालाकि ऐसा नहीं है कि अधिकारी इससे अवगत नहीं हैं। दिल्ली सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘हम महिला हेल्पलाइन नंबर 181 को बहाल करने की प्रक्रिया में हैं क्योंकि हमारे संज्ञान में लाया गया है कि संसाधनों की कमी के कारण सभी फोन काल्स पर ठीक से ध्यान नहीं दे पाते।’’(स्टोरी इनपुट: एनडीटीवी)

 

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