नासिक: जल संकट हमारे देश की एक प्रमुख समस्या बन गईं है। गर्मियों की शुरुआत होते ही देश के अलग-अलग हिस्सों से जल संकट की तस्वीरें सामने आना शुरु हो जाती है। महाराष्ट्र के कई हिस्से इन दिनों पानी की समस्या से जूझ रहे है। नासिक के कई गांव भयंकर जल संकट का सामना करने को मजबूर है। गर्मियों की शुरुआत होते ही देश के अलग-अलग हिस्सों से जल संकट की तस्वीरें सामने आना शुरु हो जाती है। पानी के इस संकट से महाराष्ट्र भी अछूता नहीं रहता है। मराठवाडा के साथ नासिक के अनेक गांव भी पानी की समस्या का सामना कर रहे है। पानी की कमी को पूरा करने लिए महिलाएं दूर-दराज के इलाकों से पानी लाने को मजबूर है। कई बार तो इन महिलाओं को कुएं के अंदर घुसकर पानी लाना पड़ता है। पानी के संकट पर बात करते हुए नासिक के वेलपाड़ा की सरपंच कहती है कि, “यहां सभी गांव में पानी की समस्या है मगर वेलपाड़ा गांव में समस्या अधिक है। यहां पानी खराब है। सभी महिलाओं को समस्या हो रही है, उन्हें दूर-दूर से पानी लाना पड़ता है। हम लोगों की प्रशासन से विनती है कि पानी की समस्या को खत्म किया जाएं।
अभी तक समस्या का नहीं हुआ कोई समाधान
पानी के संकट पर प्रशासन अपना वही पुराना राग अलाप रहा है। अब मामले पर श्रीकांत तारा पंडित भारतीय, विधायी परिषद ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि, “पानी की समस्या सच में बड़ी है और पुरानी है मगर शासन और प्रशासन मिलकर इस समस्या का समाधान ढूंढ रहे है। अगर जनसामान्यों के कुछ विषयों को लेकर कुछ गड़बड़ी दिखती है तो इसमें 100% शासन की तरफ से कारवाई की जाएगी। वहीं दूसरी तरफ मराठवाड़ा क्षेत्र के जालना और हिंगोली जिलों में 18 गांव और चार बस्तियां पानी की कमी से जूझ रहे हैं और इन स्थानों पर पानी की आपूर्ती के लिए टैंकर लगाए गए हैं। लोगों को पानी की समस्या से निजात दिलाने के लिए प्रशासन ने मराठवाड़ा के कुल 8 जिलों में छह में से 477 कुओं का अधिग्रहण किया हैं। औरंगाबाद और जालना में 85-85, हंगरोली में 177, नांदेड़ में 108, बीड में 54 और लातूर में 11 कुएं हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि क्षेत्र के उस्मानाबाद और परभणी जिलों में कुओं का अधिग्रहण नहीं किया गया।
