चंदौली जिले के युवा पूछ रहे हैं सवाल…कब तक बनेगा ग्राम पंचायत में खेल का मैदान

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  • चंदौली के हर ग्राम पंचायत में बनाया जाना है खेल का मैदान

  • लेकिन अभी तक 734 ग्राम पंचायतों में सिर्फ 76 खेल मैदान

  • सिर्फ 200 खेल मैदान के लिए जमीन चिन्हित

  • ग्राम पंचायत में खेल मैदान बनाने की योजना कैसे होगी सफल, कई जगह नहीं है खाली जमीन

  • जमीन की है अनपउब्लधता तो क्या आसमान में बनेगा खेल का मैदान

चंदौली: पढ़ोगे लिखोगे…बनोगे नवाब। खेलोगे कूदोगे होगे खराब। लेकिन समय के साथ समाज की सोच बदली और छोटे—बड़े गांव के लड़कों ने खेल कूद में भी नाम कमाया और परिवार का नाम रोशन किया और पैसे भी कमाये। तभी तो केंद्र से लेकर राज्य की सरकारें भी खेलो इंडिया और फिट इंडिया जैसे कार्यक्रमों को चलाकर ग्रामीण प्रतिभाओं को बड़े फलक पर उभरने का मौका दे रही हैं। ग्राम पंचायतों में बुनियादी सुविधाओं का विकास हो रहा है।खेल का मैदान तैयार किये जा रहे हैं। स्टेडियम बनाये जा रहे हैं और हमारे ग्रामीण युवा खेल को पेशा बनायें इस दिशा में पहल की जा रही है। लेकिन गांव में बड़ी समस्या इन बुनियादी ​सुविधाओं के विकास के लिए जमीन को लेकर है। ग्राम पंचायतों में जमीन की अनुपलब्धता सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है यही कारण है कि संस्थागत ढ़ाचे का विकास नहीं हो पा रहा है और हमारी प्रतिभायें जमीन के अभाव में दम तोड़ रही हैं।

 

 

कुछ ऐसा ही आलम दिखाई दे रहा है चंदौली जिले में। सरकार की तरफ से पहल की गई ​है कि चंदौली जिले के सभी ग्राम पंचायतों में खेल का मैदान निर्माण किया जायेगा। लेकिन यह योजना जमीन उपलब्ध न होने के कारण जमीन पर नहीं उतर पा रही है। इसके पीछे तमाम तरह के कारण गिनाए जा रहे हैं लेकिन बुनियादी सवाल तो यही है कि जब जमीन ही उपलब्ध नहीं रहेगा तो कैसे बनेगा खेल का मैदान और कैसे भरेंगी हमारी ग्रामीण प्रतिभायें आसमानी उड़ान।

खेल का मैदान….क्या है समस्या

दरअसल चंदौली जिले के सभी ग्राम पंचायतों में खेल का मैदान निर्माण की योजना जमीन उपलब्ध न होने के कारण जमीन पर नहीं उतर पा रही है। इसके पीछे तमाम तरह के कारण गिनाए जा रहे हैं। कहीं पर जमीन उपलब्ध नहीं है तो कहीं पर उपलब्ध जमीन में खेल मैदान बनाए जाने की संभावना न के बराबर है। ऐसे में सरकार की इस योजना को लागू करने में ग्राम प्रधान और अधिकारी दोनों परेशान है।
आंकड़े भी इस बात की तस्दीक करते दिखाई देते हैं कि सरकार की योजना परवान नहीं चढ़ पा रही है। जिले के 734 ग्राम पंचायतों में सिर्फ 76 खेल का मैदान बन पाए है। इसके साथ ही 200 खेल मैदान के लिए जमीन की पहचान हो पाई है। जहां पर जमीन को समतल करके खेलकूद लायक बनाने की तैयारी की जा रही है।

क्या कहते हैं अधिकारी

खेल का मैदान निर्माण की बाबत जब चंदौली जिले के मनरेगा उपायुक्त से सवाल होता है तो वे सपाट लहजे में कहते हैं ​कि जमीन न मिलने के कारण मैदान का निर्माण नहीं हो पा रहा है। आपको ज्ञात है कि गांव में खेल सुविधा के लिए सभी ग्राम पंचायतों में खेल मैदान के निर्माण के लिए पिछले साल संकल्प लिया गया है। जिसके तहत अभी तक सिर्फ 76 खेल मैदान ही बन पाए हैं। तैयार खेल मैदान को अभी तक युवा कल्याण विभाग को सुपुर्द भी नहीं किया गया है।
यानी खेल के मैदान के निर्माण का मामला नौ दिन चले ढ़ाई कोस वाला होता जा रहा है। यानी रफ्तार काफी धीमी है।

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इस बाबत मनरेगा उपायुक्त आर के चतुर्वेदी कहते हैं कि जिले के सभी ग्राम पंचायतों में खेल मैदान बनाने का काम किया जा रहा है। अभी तक जमीन मिलने पर 76 खेल मैदान का निर्माण हो पाया है। इसमें सदर विकास खंड में 17, चकिया में 14, नियामताबाद में 10, शहाबगंज में आठ, सकलडीहा, बरहनी में सात सात, चहनिया, धानापुर में चार चार खेल मैदान बनकर तैयार है। जल्द ही तैयार खेल मैदान युवा कल्याण विभाग को सुपुर्द किया जाएगा। हमारा प्रयास है कि युवाओं को खेल की सुविधाएं प्राप्त हों।

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