वीरता की वो तारीख जब सीआरपीएफ ने रचा इतिहास, पाकिस्तानी ब्रिगेड को दिया करारा जवाब

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                              “9 अप्रैल – वीरता की वो तारीख जब सीआरपीएफ ने रचा इतिहास”

CRPF Shaurya Diwas:  देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल सीआरपीएफ की वीरगाथा भारत के गर्व और आत्मबल का प्रतीक है। साल 1965 में रण ऑफ कच्छ, गुजरात में स्थित जब पाकिस्तान की 51वीं ब्रिगेड ने ‘टाक’ और ‘सरदार पोस्ट’ पर अचानक हमला कर दिया। जिस कारण दुनिया हैरान थी लेकिन भारतीय सीमा पर तैनात सीआरपीएफ की महज 150 जवानों की टुकड़ी ने पाकिस्तानी सेना की 51 वीं ब्रिगेड के 35 सौ सैनिकों को पीछे हटने के लिए मजबूर कर दिया। इस दौरान पाकिस्तान ने 14 घंटे में तीन बार हमले का प्रयास किया, लेकिन सीआरपीएफ के बहादुर जवानों ने उनके इरादे पूरे नहीं होने दिए।

 

 

सीआरपीएफ की दूसरी बटालियन की दो कंपनियों ने असंभव को संभव कर दिखाया। उन्होंने पाकिस्तानी सेना को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। साथ ही इस संघर्ष में सीआरपीएफ के जवानों ने 34 पाकिस्तानी सैनिकों मार गिराया। जिनमें 2 अफसर भी शामिल थे और 4 लोगों को जीवित पकड़ा गया।

इस वीरता के दौरान सीआरपीएफ के 7 जवानों ने अपनी जान की आहुति दी.. और भारत के इतिहास में अमर हो गए।

 

 

हालांकि, 1965 में जब पाकिस्तान ने यह हमला किया तो उस वक्त बीएसएफ की स्थापना नहीं हुई थी। इसके अलावा अप्रैल 1965 में पाकिस्तानी सेना ने भारतीय सीमा की एक सैनिक चौकी पर हमला करने की योजना पहले से ही तैयार की थी। इस दौरान पाकिस्तानी सेना का इरादा भारतीय भू-भाग पर कब्जा करना था। इसके लिए उन्होंने ऑपरेशन डेजर्ट हॉक शुरू किया था। जो 9 अप्रैल, 1965 की सुबह 3 बजे पाकिस्तान की 51 ब्रिगेड ने अपने 3500 सैनिकों के साथ रण ऑफ कच्छ की ‘टाक’ और ‘सरदार पोस्ट’ पर हमला कर दिया। फिर भी सीआरपीएफ और गुजरात पुलिस ने मिलकर ऐसा साहस दिखाया, जिसे आज भी याद किया जाता है।

 

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यह युद्ध दुनिया के इतिहास में अपनी तरह का अनोखा उदाहरण है, जहाँ एक पुलिस बल की छोटी सी टुकड़ी ने दुश्मन की विशाल सैन्य ब्रिगेड को घुटने टेकने पर मजबूर किया। इसी अद्वितीय शौर्य को सम्मान देने के लिए हर वर्ष 9 अप्रैल को “शौर्य दिवस” मनाया जाता है। यह दिन सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि उस अदम्य हिम्मत, बलिदान और समर्पण का प्रतीक है। जो हर भारतीय के दिल में जोश भर देता है।

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