अवैध बूचड़खानों पर कार्रवाई के बाद तमसा में प्रदूषण घटा.. खिलखिलाई जलधार

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पंचायत खबर टोली
[icon name=”certificate” class=”” unprefixed_class=””]मस्जिदियाघाट से ढेकुलियाघाट के बीच प्रवाह से बदबू हुआ कम
[icon name=”certificate” class=”” unprefixed_class=””]अतिक्रमण से मुक्त तटबंध व घाटों को मनोरम करने की मांग
, मऊ :
प्रदेश में योगी सरकार के उदय के साथ ही पौराणिक नदी तमसा के अच्छे दिन आते नजर आने लगे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा अवैध बूचड़खानों पर सख्ती से रोक का साफ असर नदी की जलधार में दिखाई देने लगा है। नदी तटबंध पर स्थापित पशुवध स्थलों पर जिला प्रशासन द्वारा कठोरता से कार्रवाई किए जाने के बाद अवशेष का नदी में गिरना बंद हो गया है। इस कार्रवाई को अभी माह भर भी नहीं हुए हैं और मस्जिदियाघाट से ढेकुलियाघाट तक हमेशा जमा रहने वाले काले बदबूदार पानी का रंग बदलने लगा है। जलधार से दुर्गंध का आना भी बहुत कम हो गया है। पशुवध रुकते ही नदी जल में प्रदूषण घटने लगा है। स्लाटरिंग नहीं किए जाने की प्रतिबद्धता जताते हुए बुद्धिजीवियों ने अतिक्रमण से तटबंध की मुक्ति के साथ इसे मनोरम बनाए जाने बल दिया है।

क्या है प्रदूषण का कारण व कैसे करें निवारण
नगर में भदेसरा से भीटी तक गिरने वाले नौ नालों से दर्जनों मुहल्ले के घरों से निकले पानी के साथ प्लास्टिक व अन्य कचरा नदी में गिरता रहता है। भदेसरा से बमघाट तक पीने को छोड़कर दैनिक जीवन में पानी का प्रयोग किया जाता है। बमघाट से मस्जिदियाघाट तक पूर्व में अवैध रूप संचालित स्लाटर हाउस केे कारण यहां से निरंतर गिरते पशुवध के अवशेष से पानी का रंग ही काला व बदबूदार हो जाता है। आगे श्मसानघाट व उत्तरी तट पर स्थित गायघाट तक नदी का जल जहरीला हो जाता है। धोबीघाट के बाद मडैयाघाट व भीट पुल के नीचे बने घाट पर रोजमर्रा के प्रयोग में पानी का उपयोग किया जाता है। पूर्ववर्ती सपा सरकार में तट पर लगभग आधा दर्जन स्लाटर हाउस अवैध रूप से संचालित होते थे। जानने के बाद भी प्रशासन द्वारा इन्हें बंद नहीं कराया जा रहा था। सत्ता परिवर्तन के बाद योगी सरकार द्वारा लिए गए पहले फैसले के बाद हरकत में आए प्रशासन ने तत्पर कार्रवाई करते हुए सभी को बंद कराया। इस कार्रवाई को अभी माह भर भी नहीं हुए कि स्लाटर हाउस से आगे श्मशान व गायघाट पर नदी के जल का रंग हरा कत्थई होने लगा है।

निर्मल हो धार, मनोरम बने घाट
प्रसिद्ध चिकित्सक डा.संजय सिंह, डा.एसएन राय, साहित्यकार दयाशंकर तिवारी, गीतकार राघवेंद्र प्रताप सिंह, डा.अरविंद श्रीवास्तव आदि बताते हैं कि जलप्रवाह के प्रदूषित होने से रोकने के सभी उपाय किए जाने की आवश्यकता है। इस दौरान नदी व तटबंध पर अतिक्रमण से निजात के लिए प्रशासन को अभियान चलाना चाहिए। घाटों को मनोरम बनाए जाने की कवायद भी आवश्यक है। पूर्व में दैनिक जागरण फिर जिला प्रशासन द्वारा नदी पर चलाए गए अभियान से गंदगी के साथ जलप्रवाह के सभी अवरोध समाप्त कर दिए गए। सभी नालों पर गोल घेरादार चेंबर की स्थापना किए नगरपालिका द्वारा किया जाना चाहिए।

धानी होगी तमसा की चुनर

विभाग द्वारा मानसून सीजन में तमसा के तट पर दो हजार पर्यावरणीय मित्र बिरवों को राेपित किया जाएगा। नदी तट के साथ ही प्रमुख घाटों पर हरित पट्टी के रूप में इसका पैचवार विकास किया जाएगा। इसकी सुरक्षा के बाबत पूर्व की तरह नगरपालिका के सहयोग से जाली लगाकर पौधों की सुरक्षा का भी ध्यान रखा जाएगा। तमसा तट को धानी बनाने की दिशा विभाग प्रतिबद्ध है।

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