छत्तीसगढ़ के ठंडे क्षेत्रों में स्ट्राबेरी की खेती लोकप्रिय हो रही है। अपने लजीज स्वाद और औषधीय गुण के कारण यह बड़े स्वाद के खाया जाता है। राज्य के जशपुर, अंबिकापुर, बलरामपुर क्षेत्र में कई किसान हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र की विशेष प्रजाति की स्ट्राबेरी की खेती कर रहे हैं। स्ट्राबेरी की मांग के कारण इसकी स्थानीय स्तर पर ही खपत हो रही है। जशपुर जिले में 25 किसानों ने छह एकड़ में विंटर डान प्रजाति की स्ट्राबेरी की खेती की है। स्ट्राबेरी की खेती धान के मुकाबले कई गुना फायदे का सौदा है। जहां धान की खेती के लिए मिट्टी का उपजाऊपन के साथ साथ ज्यादा पानी और तापमान की जरूरत होती है। वहीं स्ट्राबेरी सामान्य भूमि और सामान्य सिंचाई में भी बोई जा सकती है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि धान से एक एकड़ में करीब 50 हजार की आमदनी होती है, वहीं स्ट्राबेरी की खेती में तीन से चार लाख की आमदनी हो सकती है। कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की पहल का असर अब खेती किसानी में दिखने लगा है। इनपुट सब्सिडी का उपयोग किसान अन्य फसलों के लिए कर रहे हैं। किसान अब परंपरागत धान की खेती की जगह बागवानी फसलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। जशपुर के किसान धनेश्वर राम बताया कि उन्होंने 25 डिसमील खेत में स्ट्राबेरी के 2000 पौधे का रोपण किया। तीन माह में ही अच्छे फल आ गए हैं। मार्केट में इसकी उन्हें 400 रुपये प्रति किलो की कीमत मिल रही है। इससे करीब एक किसान को एक से डेढ़ लाख रुपये की आमदनी संभावित है।
सौंदर्य प्रसाधन और दवाईयों में उपयोग
स्ट्राबेरी का उपयोग आइस्क्रीम, जेम जेली, स्क्वैश में होता है। इसके अलावा इसका उपयोग पेस्ट्री, टोस्ट सहित बैकरी के विभिन्न उत्पादनों में किया जाता है। स्ट्राबेरी में एंटी आक्सीडेंट होने के कारण इसका उपयोग सौंदर्य प्रसाधनों लिपिस्टिक फेसक्रीम के अलावा बच्चोें की दवा में फ्लेवर के लिए किया जाता है।
