नयी दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने मंगलवार को कहा कि तकनीक के इस युग में कार्यस्थल की प्रकृति तेजी से बदल रही है और नई प्रौद्योगिकियां ‘अभिजात वर्ग’ तक सीमित नहीं हैं, ऐसे में कौशल विकास जनसांख्यिकी की वास्तविक क्षमता को हासिल करने की कुंजी साबित होगा। प्रधान ने औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में अध्ययनरत छात्रों के लिए रोजगार कौशल पाठ्यक्रम के डिजिटल संस्करण के विमोचन के अवसर पर यह बात कही।
मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, प्रधान ने भारत के भविष्य को आकार देने और 21वीं सदी के कार्यबल को तैयार करने में कौशल की परिवर्तनकारी शक्ति का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब भारत आजादी के 100 साल पूरे कर रहा होगा, तब वह सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘प्रौद्योगिकी के इस युग में कार्यस्थल की प्रकृति तेजी से बदल रही है और नई प्रौद्योगिकियां अब ‘अभिजात वर्ग’ तक सीमित नहीं रह गई हैं, ऐसे में कौशल विकास हमारी जनसांख्यिकी की वास्तविक क्षमता को सामने लाने में मददगार होगी।
