पूजा
Maa Kalratri Aarti: आज नवरात्रि का सातवां दिन मां कालरात्रि को समर्पित है। मां कालरात्रि, शक्ति का वह स्वरूप है। जो नकारात्मक शक्तियों का नाश करती है। और अपने भक्तों को भय मुक्त कर आशीर्वाद देती है। इन्हें काली, महाकाली और कालिका के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन मां कालरात्रि की पूजा होती है। माना जाता है कि मां कालरात्रि दुर्गा मां के नौ रूपों में सबसे ज्यादा गुस्से वाली है। शास्त्रों में मां कालरात्रि को शुभंकरी, महायोगेश्वरी और महायोगिनी भी कहा जाता है। इसके अलावा मां कालरात्रि की विधिवत रूप से पूजा अर्चना और व्रत करने वाले भक्तों को मां सभी बुरी शक्तियां और काल से बचाती है। देवी कालरात्रि का स्वरूप अत्यंत उग्र और भयावह है, लेकिन वे भक्तों के सभी प्रकार के भय को नष्ट करने वाली है। साथ ही इनकी साधना करने से साधक के जीवन में आने वाली हर बाधा दूर होती है। और उसे आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।
मां कालरात्रि का भोग
माता कालरात्रि को गुड़ और गुड़ से बनी चीजें पसंद है, इसका कारण यह है। कि माता कालरात्रि का स्वभाव बहुत ही क्रोधी है। क्रोध की उष्मा को शीतलता में बदलने के लिए मीठे आहार की आवश्यकता होती है। इस कारण से माता कालरात्रि को मालपुए का भोग भी लगाया जाता है। कहा जाता है, कि इससे माता कालरात्रि प्रसन्न होती है, और मां कि कृपा बरसाती है।
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माता कालरात्रि पूजा की विधि
आज नवरात्रि के सातवें दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप, मां कालरात्रि की पूजा की जाएगी। पहले एक चौकी सजाएं, फिर माता कालरात्रि की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें। फिर पूजा की तैयारी करें। उसके बाद तस्वीर पर काले रंग की चुन्नी चढ़ाएं। इसके बाद माता को रोली, अक्षत, दीप और धूप दिखाएं। माता कालरात्रि को रात रानी का फूल बहुत पसंद है, इसलिए उन्हें यह फूल जरूर चढ़ाएं। पूजा के अंत में माता कालरात्रि का पाठ करें। दुर्गा सप्तशती या दुर्गा चालीसा का पाठ भी कर सकते हैं।
मां कालरात्रि की आरती
कालरात्रि जय जय महाकाली।
काल के मुंह से बचाने वाली॥
दुष्ट संघारक नाम तुम्हारा।
महाचंडी तेरा अवतारा॥
पृथ्वी और आकाश पे सारा।
महाकाली है तेरा पसारा॥
खड्ग खप्पर रखने वाली।
दुष्टों का लहू चखने वाली॥
कलकत्ता स्थान तुम्हारा।
सब जगह देखूं तेरा नजारा॥
सभी देवता सब नर-नारी।
गावें स्तुति सभी तुम्हारी॥
रक्तदन्ता और अन्नपूर्णा।
कृपा करे तो कोई भी दुःख ना॥
ना कोई चिंता रहे ना बीमारी।
ना कोई गम ना संकट भारी॥
उस पर कभी कष्ट ना आवे।
महाकाली मां जिसे बचावे॥
तू भी भक्त प्रेम से कह।
कालरात्रि मां तेरी जय॥
मां कालरात्रि का मंत्र
करालवन्दना घोरां मुक्तकेशी चतुर्भुजाम्।
कालरात्रिम् करालिंका दिव्याम् विद्युतमाला विभूषिताम्॥
दिव्यम् लौहवज्र खड्ग वामोघोर्ध्व कराम्बुजाम्।
अभयम् वरदाम् चैव दक्षिणोध्वाघः पार्णिकाम् मम्॥
महामेघ प्रभाम् श्यामाम् तक्षा चैव गर्दभारूढ़ा।
घोरदंश कारालास्यां पीनोन्नत पयोधराम्॥
सुख पप्रसन्न वदना स्मेरान्न सरोरूहाम्।
एवम् सचियन्तयेत् कालरात्रिम् सर्वकाम् समृध्दिदाम्॥


