रूरबन मिशन 28 फरवरी, 2016 को केरल से शुरू होगा ग्रामीण आबादी के लिए सुविधाएं सुनिश्चित करना केंद्र सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है क्योंकि भारत की 69 प्रतिशत आबादी गांवों में रहती है।
केंद्र सरकार गांव के विकास के लिए मॉडल विलेज, रूरबन मिशन आदि कई स्तरों पर प्रयास कर रही है। सरकार का मानना है कि जैसे—जैसे गांव का विकास होता जायेगा,वैसे—वैसे पलायन कम होगा, और शहरों पर दबाव कम होगा। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री चौधरी वीरेंद्र सिंह ने ग्रामीण आबादी के लिए सुविधाएं सुनिश्चित करना केंद्र सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है क्योंकि भारत की 69 प्रतिशत आबादी गांवों में रहती है।
ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की जिंदगी में गुणात्मक सुधार लाने के लिए पूरा ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। रूरबन मिशन के तहत 30 से 40 लाख की समन्वित आबादी वाले 15-20 गांव के कलस्टर विकसित किए जाएंगे। ग्रामीण इलाकों को आर्थिक, सामाजिक और भौतिक तौर पर विकसित करने के लिए रूरबन मिशन 28 फरवरी 2016 को शुरू किया जाएगा। यह मिशन केरल से शुरू होगा। पहले साल 100 ररबन विकास कलस्टर विकसित किए जाएंगे। इस मिशन के तहत तीन साल में 300 ऐसे विकास कलस्टर तैयार विकसित किए जाएंगे। इस स्कीम के तहत कलस्टर में समाहित अन्य स्कीमों के जरिये फंडिंग की जाएगी। कलस्टर में उच्चस्तरीय विकास के लिए 14 तत्व सुझाए गए हैं। इनमें से आर्थिक गतिविधियों से जुड़े कौशल विकास कार्यक्रम शामिल हैं। राज्य सरकारें ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से कार्यक्रम को लागू करने के लिए बनाए गए फ्रेमवर्क के तहत कलस्टरों की पहचान करेंगी। कलस्टर चयन के लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय वैज्ञानिक प्रक्रिया अपनाएगा।
उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक विकास के लिए आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इससे जीविका के लिए गांवों से पलायन रुकेगा और परिवार का तानाबाना नहीं टूटेगा। हर पंचायत के लिए वार्षिक योजना बनेगी और ग्राम पंचायतों को वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार दिए जाएंगे। पेयजल का हवाला देते हुए कहा कि मौजूदा समय में भारत पीने के पानी के लिए 85 फीसदी भूजल पर निर्भर है। यह सिर्फ 15 फीसदी सतह के पानी पर निर्भर है। सरकार इस स्थिति को बदलना चाहती है।
ये सुविधाएँ होंगी
इन कलस्टरों में जो नागरिक सुविधाएं बहाल की जायेंगी, उनमें कौशल विकास प्रशिक्षण और उसका आर्थिक गतिविधियों से जुड़ाव, एग्रो प्रोसेसिंग-एग्री सर्विसेज-भंडारण व वेयर हाउस की स्थापना, कंप्यूटर की साक्षरता, स्वच्छता, हर घर में पाइप जलापूर्ति, ठोस व तरल कचरा का निष्पादन, गांव के फूटपाथ व नालियों का निर्माण, स्ट्रीट लाइट, सभी उपकरणों से सुसज्जित मोबाइल हेल्थ यूनिट, स्कूलों का अपग्रेडेशन व उच्चतर शिक्षा की व्यवस्था, गांवों के बीच सड़कों की संपर्कता, इलेक्ट्रानिक नागरिक सेवा की बहाली और सभी घरों में एलपीजी गैस की आपूर्ति करना शामिल हैं.
बिहार को भी मिलेगा फायदा
स्मार्ट सिटी के तर्ज पर राज्य की चुनिंदा पंचायतों को भी स्मार्ट बनाया जायेगा. राज्य सरकार ने ऐसे छह रूरबन कलस्टरों की सूची भारत सरकार को भेज दी है. 25-50 हजार के बीच की आबादीवाले पंचायतों के कलस्टरों को इसमें शामिल किया गया है. इनमें पश्चिम चंपारण जिला का बेतिया, पटना जिला का संपतचक, गया जिला का मानपुर, रोहतास जिला का कोचस, सहरसा जिला का सोनबरसा और समस्तीपुर जिला का शिवाजीनगर रूरबन कलस्टर शामिल हैं. इन सभी का विकास स्मार्ट ग्राम कलस्टर के रूप में किया जायेगा. भारत सरकार ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी रूरबन मिशन के तहत चयन का मापदंड केंद्र सरकार ने तैयार कर भेजा था. देश में तीन साल के अंदर ऐसे 300 कलस्टरों का चयन रूरबन मिशन के तहत किया जाना है.
सात निश्चय में केंद्र करे पर्याप्त मदद
बिहार के ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार का कहना है कि कि भारत सरकार ने रूरबन मिशन के लिए मानक तैयार कर राज्यों के पास भेज दिया था. इसमें बिहार के तीन ही शहर आ रहे थे. इस संबंध में उन्होंने केंद्रीय मंत्री से बात की और तीन अतिरिक्त कलस्टरों की सूची केंद्र को भेज दी है. उन्होंने बताया कि छह शहरों के चयन से गांवों विकास संभव नहीं है. इससे एकरूपता भी नहीं आनेवाली है. बिहार सरकार ने भी सात निश्चय किया है उससे गांवों का विकास संभव है. इस योजना में केंद्र सरकार को पर्याप्त धनराशि दे जिससे कि गांवों का विकास हो सके.

