राजनाथ सिंह का कांग्रेस पर हमला, संविधान किसी एक पार्टी की देन नहीं

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वर्षा वर्मा

Parliament Winter Session: 26 जनवरी 2025 को संविधान निर्माण के 75 साल पूरे होने जा रहे हैं। इस पर शुक्रवार को लोकसभा में विशेष चर्चा की शुरुआत रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की। राजनाथ सिंह ने संविधान निर्माताओं का नाम लिया, लेकिन पंडित नेहरू का जिक्र नहीं किया। इस पर विपक्ष ने शेम-शेम का नारा लगाया।

राजनाथ सिंह ने कहा कि ‘पिछले कुछ वर्षों में देश में एक ऐसा माहौल बनाने का प्रयास किया गया कि संविधान किसी एक पार्टी की देन है। संविधान निर्माण में कई लोगों की भूमिका को भुला दिया गया। हमारा संविधान स्वाधीनता संविधान के हवनकुंड से निकला हुआ अमृत है। ये हमारा स्वाभिमान है। उन्होंने ये भी कहा कि ‘पार्टी विशेष द्वारा संविधान निर्माण के काम को हाईजैक करने की कोशिश हमेशा देखी गई है। संविधान बनाने से जुड़ी यह सब बातें लोगों से छिपाई गई हैं। यह साफ कर दूं कि संविधान पार्टी की देन नहीं है। भारत का संविधान भारत के लोगों, विचारों, उनके मूल्यों के अनुरूप बनाया गया दस्तावेज है। वहीं, उन्होंने जम्मू-कश्मीर का नाम लिए बिना कहा कि देश में एक ऐसा राज्य भी था। जहां संसद के कानून और संविधान लागू नहीं होता था। हमने वहां पर सब लागू किया और उस राज्य को भारत का अभिन्न हिस्सा बनाया। अब वहां पर चुनाव भी हुआ और रिकॉर्ड मतदान हुआ। हिंसा की एक भी घटना नहीं हुई।

राजनाथ सिंह ने इस दौरान शाहबानो केस का जिक्र किया और कहा कि शाहबानो का फैसला सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मुस्लिम महिलाएं भी गुजारा भत्ता पाने की हकदार हैं। लेकिन तुष्टिकरण के रास्ते पर चलते हुए कांग्रेस सरकार ने इस जजमेंट को ही पलट दिया। जब कांग्रेस के लोग जो हमेशा तुष्टिकरण की राजनीति करते आए हैं और अब विपक्षी नेता जब मोहब्बत की दुकान की बात करते हैं तो हंसी आती है।

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राजनाथ सिंह ने कहा कि कांग्रेस के लोग भूल जाते हैं कि इंदिरा गांधी ने 50 बार चुनी हुई सरकार को गिराई। कांग्रेस को जब भी संविधान और सत्ता को चुनने का मौका मिला है। तो कांग्रेस ने हमेशा सत्ता को चुना है। उन्होंने कहा कि 6 दिसंबर 1992 को मैं कल्याण सिंह के मंत्रिमंडल में शिक्षा मंत्री था। अयोध्या के एक विवादित ढांचे में चोट पहुंचने की खबर मिली और जब खबर मिली कि वहां भारी तोड़फोड़ हुई है। तो कल्याण सिंह ने शाम को इस्तीफा दे दिया। लेकिन आश्चर्य की बात है कि पूर्ण बहुमत की सरकार का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया बल्कि सरकार को बर्खास्त कर दिया गया।

 

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