जिले में तैयार होंगे जैविक खेती के चार प्रक्षेत्र

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new-logo_nपंचायत खबर टोली
मऊ : कृषि और किसानों की उन्नति की दिशा में सरकार के स्तर पर लगातार प्रयास हो रहे हैं। क्योंकि स्पष्ट है यदि हमारे किसान खुशहाल नहीं होंगे तो इतनी बड़ी जनसंख्या को खाद्य सुरक्षा मुहैया कराना अपने आप में चुनौती है। लेकिन बड़ी बात यह है सरकार न सिर्फ खेती किसानी की बेहतरी की दिशा में काम कर रही है अपितु हमारे किसान भाई जैविक कृषि को अपनायें इस दिशा में भी पुरजोर प्रयास किया जा रहा है। इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए जिले में जैविक खेती को बढ़ावा दिए जाने के लिए कृषि विभाग द्वारा नए वर्ष में विशेष योजना बनाई गयी है। किसानों के आर्थिक विकास के साथ रोजगार सृजन के लिए जिले के चार स्थानों पर 25 से 100 हेक्टेयर क्षेत्रफल का क्लस्टर बनाया जाएगा। टिकाऊ खेती के साथ मिट्टी की सेहत के लिए इन क्षेत्रों में रासायनिक उर्वरक का प्रयोग प्रतिबंधित होगा। हरी खाद, वर्मी कम्पोस्ट, नैडफ कम्पोस्ट व गोबर की खाद के साथ इन प्रक्षेत्रों पर जैविक उवर्रक उत्पादन की इकाई भी स्थापित किया जाएगा। इसके लिए विभागीय अनुदान व तकनीकी ज्ञान के साथ प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा। जिले में 2.61 लाख किसानों का खाता पंजीकृत कर चुका विभाग शत प्रतिशत अनुदान सीधे-सीधे खाते में भेजने के प्रति भी प्रतिबद्धता दर्शा रहा है। इस वित्तीय वर्ष में जिले में 1.27 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में खेती की गई है। इस दौरान रबी सीजन में 17 हजार कुंतल नए बीज का वितरण विभाग द्वारा किया गया है।

organic-farm-image_1459426092क्या है खेती-किसानी का हाल
इस वित्तीय वर्ष में जिले में कुल 1.27 लाख हेक्टेयर प्रक्षेत्र पर खेती की गई है। इसमें से 1.04 लाख हेक्टेयर में गेहूं, जौ, चना, मसूर, सरसों सहित दलहन-तिलहन की बोआई की गई है। जिले में सब्जी व बाग उत्पादन में 20 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल का प्रयोग किया गया है। 17 हजार कुंतल नए बीज वितरण करने के साथ ही विभाग द्वारा 15-20 प्रतिशत उत्पादकता बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। पर्याप्त मात्रा में उर्वरक होने की दशा में इस सीजन में उर्वरक को लेकर किसानों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। धान की अच्छी उपज के साथ अब तक बन रहे मौसम के अनुसार रबी में अच्छी उपज का अनुमान बना हुअा है। प्रदेश भर में चना में बगली पिजड़ा के किसान को श्रेष्ठ उत्पादक पुरस्कार मिलने सहित दर्जनों किसानों ने मंडल स्तर पर कृषि क्षेत्र में अपना जलवा दिखाया है।

dalhan-jagran2जैविक खेती के बनेंगे चार क्लस्टर
उपकृषि निदेशक डा.आशुतोष मिश्र का कहना है कि इस वर्ष जैविक खेती के प्रोत्साहन संग आर्थिक विकास व रोगजार मुहैया कराने के लिए जिले में जैविक जोन के चार क्लस्टर स्थापित किए जाएंगे। प्रत्येक क्लस्टर 25 से सौ हेक्टेयर क्षेत्रफल का होगा। इस क्षेत्र में जैविक उत्पादन किया जाएगा। विभाग द्वारा मृदा परीक्षण से लेकर जैविक उर्वरक उत्पाद इकाई की स्थापना भी किया जाएगा। इससे वहीं पर रोजगार का सृजन भी किया जाएगा। इस प्रक्षेत्र के विकास के लिए कृषि विज्ञान केंद्र पिलखी व बीज अनुसंधान निदेशालय से तकनीकी सहयोग लेने के साथ बीज प्रमाणीकरण संस्था द्वारा पंजीकृत भी कराया जाएगा। इससे उत्पादन का मूल्य डेढ़ गुना तक प्राप्त किया जा सकता है। हरी खाद, वर्मी कम्पोस्ट, नैडफ कम्पोस्ट व गोबर की खाद पर आधारित कृषि से मिट्टी के स्वास्थ्य सुधार के प्रति भी किसानों को जागरूक किया जाएगा।

javikवन स्टाप योजना ने रचा कीर्तिमान
प्रदेश सरकार खेती किसानी की बेहतरी की दिशा में कितनी गंभीर है इस बात को इससे समझा जा सकता है कि एक स्थान पर कृषि संबंधित सभी सामग्री उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा वन स्टाप शाप योजना की शुरुआत की गई। इतना ही नहीं इस योजना के तहत कृषि स्नातक को रोजगार प्रदान करने के लिए संचालित इस योजना में चार लाख रुपये का प्रावधान है। लाभार्थी को 50 हजार रुपये अंशदान के रूप में लगाना पड़ता है। शेष 3.5 लाख रुपये की धनराशि विभाग द्वारा बैंक द्वारा स्वीकृत कराया जाता है। इसके ब्याज की पांच प्रतिशत धनराशि का भुगतान सरकार द्वारा किया जाता है। इसके साथ ही एक हजार रुपये की धनराशि वर्ष भर तक किराया की रूप में दिया जाता है। जिले में 10 इकाई की स्थापना का लक्ष्य शासन द्वारा निर्धारित किया गया था। विभाग द्वारा 14 इकाई की स्थापना की गई है।

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