फसल की चराई पर गोली का फरमान

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संतोष कुमार सिंह

नीलगाय चर्चा में है। किसानों की फसल बर्बाद कर देता है इसलिए उसे गोली मार देनी चाहिए। केंद्र सरकार का फरमान है। आदेश पर अम्ल कर रही हैं। राज्य सरकारे। विगत दिनों नीलगाय मारने के लिए शार्प शूटर का प्रयोग किया जिसने अपने कौशल से सैकड़ों बेजुबान जानवर की हत्या कर दी। लेकिन वो दोषी नहीं है,क्योंकि कानून इसकी इजाजत देता है। जी हाँ, बिहार के मोकामा में हैदराबाद से आए शूटरों ने तीन दिनों में 250 नीलगायों को मार दिया है। कहा जा रहा है कि नीलगाय को मारे जाने से किसान खुश हैं।

किसान जरूरी है..नीलगाय नहीं

यूपी हो या बिहार या हो मध्य प्रदेश या फिर राजस्थान..कुछ अन्य राज्य भी। यहां के किसान लंबे समय से नीलगायों के उत्पात से परेशान होते रहे हैं। गुहार लगाते रहे हैं कि उनकी खड़ी फसल को नीलगाय न सिर्फ चट कर जाते हैं, बल्कि रौंदते हैं, जिससे कई एकड़ की फसल किसी काम की नहीं रहती। उन्हें लाखों करोड़ों का नुकसान होता रहा है। अब अन्न दाता किसान जब गुहाड़ लगा रहा है तो हुक्मरान सुने भी कैसे न। किसानों का बड़ो वोट बैंक है। नीलगायों का नहीं। आनन फानन में कानून बना दिया जाता है और शुरू हो जाता है नीलगाय वध का सिलसिला।

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क्या है कानून

दावे के मुताबिक देश के अलग अलग हिस्से में किसान नीलगायों के आतंक से परेशान है। साल 2015 के अंत में जैसे ही केंद्र सरकार ने नीलगाय को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची 3 से हटाकर अनुसूची 5 में फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले जीवों (वर्मिन)  की श्रेणी में डाला, राज्य सरकारों  के लिए इस पशु को खत्म करने का रास्ता भी साफ हो गया। केंद्रीय कृषि मंत्री राधमोहन सिंह के , ‘फसल को होने वाली क्षति और किसानों की परेशानी को समझते हुए हमने केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्रालय को वन्यजीव संबंधित कानून में ढील देने का सुझाव दिया था। जिन राज्यों ने इस आशय का प्रस्ताव भेजा था उन्हें प्रभावित इलाकों में शिकार की अनुमति दी गई।’

बिहार की घटना

मोकामा टाल में फसलों की बर्बादी को देख अब वहां के किसान डीएम के आदेश से शूटरों की मदद से नीलगायों का सफाया कर रहे हैं। मोकामा टाल इलाके में पिछले 3 दिनों में ढाई सौ से ज्यादा नीलगायों को मारा जा चुका है और दो हजार से ज्यादा नीलगायों को जंगली इलाकों में खदेड़ा जा चुका है। हैदराबाद के शूटर नवाब शफाथ अली खान और उनके सहयोगी पिछले 4 दिनों से मोकामा इलाके में ऑपरेशन नीलगाय में जुटे हुए हैं। एक अनुमान के मुताबिक मोकामा टाल में दस हजार से अधिक नीलगाय हैं और सालाना लाखों रुपए की फसलों का नुकसान टाल इलाके में होता है।

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बिहार के 31 जिले नीलगाय से प्रभावित हैं। इनमें से 20 जिले पूरी तरह और 11 जिले आंशिक रूप से प्रभावित हैं। बिहार के किसान नेता हरिदयाल कुशवाहा बताते है, ‘नीलगाय झुंड में बहुत तेज दौड़ती हैं, जिससे सड़कों और रेलवे ट्रैक पर आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं। सिर्फ चंपारण में अब तक नीलगायों की वजह से कई लोगों की मौत हो चुकी है।’ अब सूबे के 31 जिलों में नीलगायों को प्रतिबंधित की सूची से बाहर रख दिया गया है। बिहार के मुख्य वन्यप्राणी प्रतिपालक एस. के. चौधरी कहते हैं, ‘पर्यावरण और वन मंत्रालय की अधिसूचना के मुताबिक अब किसान अपनी फसल या संपत्ति की रक्षा के लिए खुद निर्णय ले सकते हैं।’

उत्तर प्रदेश में भी परेशानी

उत्तर प्रदेश का हाल भी कुछ बेहतर नहीं हैं। राज्य के कृषि विभाग के मुताबिक, हर साल 10,000 से ज्यादा किसान नीलगायों से फसल खराब होने की शिकायत करते हैं। वन विभाग के मुताबिक, प्रदेश में नीलगायों का सबसे ज्यादा प्रकोप ललितपुर में है। विभागीय पशुगणना बताती है कि बुंदेलखंड के इस इलाके में साढ़े चौदह हजार से अधिक नीलगाय हैं। इसके बाद इटावा का नंबर है जहां इनकी संख्या करीब 11,000 है।

उत्तर प्रदेश वन विभाग के अधिकारी आर. एस. नेगी कहते हैं, ‘नीलगाय ज्यादातर उन इलाकों में पाई जाती हैं जो वन्य क्षेत्र से दूर हैं। इनकी जनसंख्या तेजी से बढ़ती है इसलिए ये किसी भी इलाके में खेती के सामने चुनौती बन जाती हैं।’ पूरे प्रदेश में करीब 2.33 लाख नीलगाय हैं जो वन विभाग और किसानों के लिए सिरदर्द बनी हुई हैं।

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मध्य प्रदेश में नीलगाय हुआ रोजर..मारने की खुली छूट

किसान नीलगाय को मारता नही हे क्यों की उसके पीछे गाय शब्द जुड़ा हुआ हे मार्च 2016 में मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार ने नीलगाय का आधिकारिक नाम ‘रोजड़’ रख दिया और इसे मारने की इजाजत दे दी. मध्य प्रदेश के रतलाम, नीमच और मंदसौर जिले उनके आतंक से खासे प्रभावित हैं. यहां के किसान कंवर लाल बताते हैं, ‘नीलगायों के झुंड सैकड़ों एकड़ फसल खराब करके चले जाते हैं.’ नीलगाय को रोजड़ बनाकर अब इस जानवर को मारने पर किसी तरह की सरकारी पाबंदी नहीं है.’ अब राजस्थान का वन विभाग भी नीलगाय को मारने के अधिकार सरपंचों को देने जा रहा है.

 

राजस्थान

राजस्थान के उदयपुर संभाग में नीलगायों से परेशान किसानों ने खेतों को नीलगाय से बचाने का तोड़ निकाल लिया है। सब्जियां व फसलों की पारंपरिक खेती छोड़ तुलसी की खेती शुरू कर दी है। असल में नीलगाय फल और सब्जी की फसल खा जाती है, लेकिन तुलसी को नहीं।

      केंद्रीय  मंत्रियों में ठनी

केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने इसके लिए पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को जिम्मेदार ठहराया है। नीलगायों को खत्म करने की सरकार की कोशिश में उसके ही दो मंत्री भिड़ गए हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने कहा कि बिहार में पहली बार इतना बड़ा नरसंहार (नीलगायों का) हुआ है। यहां कोई इस काम के लिए तैयार नहीं हुआ तो बाहर से लोगों को बुलाया गया। इन्हें मारने की जरूरत क्यों है। जंगली जानवरों को मारना शर्म की बात है। इस घिनौने काम के लिए क्यों इजाजत दी गई है।

प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, ‘किसने क्या कहा जब किसानों को नुकसान होता है. ..बहुत तकलीफ होती है। अगर राज्य सरकार प्रस्ताव भेजती है तो ही हम किसी विशेष कार्य के लिए साइंटिफिक मैनेजमेंट के लिए राज्य सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दी जाती है। ये केंद्र का कार्यक्रम नहीं है। यह पहले से बने कानून के हिसाब से हो रहा है।

क्या गोली ही एक मात्र उपाय

नीलगाय को खेतो से दूर भागने के तरीके:-

1 काटेदार तार बाउन्ड्री

2 दवाइयो के प्रयोग:-फिनाइल के गोल को एक लीटर पानी में डाल के पंप से स्प्रे भी कर सकते है। गधो के गोबर,मुर्गो मुर्गियों की बिट, गोमूत्र,नीम की पत्तियो का गोल,बीएससी पावडर को मेडो पर बिखेर कर और लहसुन के गोल बनाकर उसमे नीम की पत्तियो और धतूरे का रस मिला कर भी उसकी गंध से नीलगायों को फसलो से दूर रखा जा सकता हे। लेकिन उसका असर केवल उसकी जब तक गंध रहेगी तब तक ही असर करता हे। गन्ध का असर 20 से 25 दिन तक रहता हे ।

3 फटाके आतिशबाजी:- बहुत सारे किसान  रात में ज्यदा आवाज़ और धमाका करने वाले फटाके फोड़ कर उन्हें डरा के भी भगाते है। फटाको की तेज रोशनि और आवाज़ के साथ साथ बारूद की गंध से भी निलगाय भाग जाती है ।

4 इलेक्ट्रानिक उपकरण:- किसान  फसलो की सुरक्षा के लिए कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरणो से भी करते है जैसे खेतो पर बल्प लाइट लगा कर, चमकदार लाइट सीरीज बंद चालू होने वाले छोटे छोटे बल्प लगा के । इसके अलावा चारो और लाइट देने वाला यन्त्र 5 मिनिट के अंतराल में अलार्म बजाने वाला सर्किट लगा के भी कई इलाको में फसलो की सुरक्षा की जा रही है।

5 काकभगोडा:- काफी पुराने समय से ही किसान अपने खेतो की रखवाली के लिए काकभगोड़ा का उपयोग करता आया है लेकिन अब उसका उपयोग नीलगाय को भगाने के लिए भी किया जा रहा हे। अब कुछ आधुनिक तरीके से काक भगोड़ा बनाया जा रहे हे जिसमे सफ़ेद कपडे पहना कर सर को मिट्ठी के गड़े में 2 आखो जेसे छेद कर के उसमे लाइट लगा दी जाती हे जिससे रात में वो नीलगाय को आदमी जैसा लगे और उस से डर के नीलगाय खेत में ना आये।

6 इन पोधो का मेडो पर रोपण करे:- करौंदा,जैट्रोफा,जंगली तुलसी,खस,जिरेनियम,अलसी,पामारोजा जेसे पोधो को खेत की मेड पर लगाने से भी नीलगाय के नुक्सान से बचा जा सकता है।

 

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