नितेन्द्र सिंह
नयी दिल्ली: दिल्ली के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज के कलावती शरण अस्पताल में मातृ दूध बैंक खुला है। जिसका नाम वात्सल्य मातृ अमृत कोष है। वैसे तो देश में सरकारी और निजी क्षेत्र के 30 मदर मिल्क बैंक काम कर रहे हैं लेकिन दिल्ली के सरकारी अस्पताल में ये पहला मदर मिल्क बैंक है। इसका मकसद है हर बच्चे को मां का दूध मिले।
मदर मिल्क बैंक का उद्घाटन करते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव सीके मिश्रा ने कहा कि यह एक राष्ट्रीय मानव (मातृ) दुग्ध बैंक और दुग्धपान परामर्श केंद्र है जो कि यह समूचे उत्तर भारत में सार्वजनिक क्षेत्र का सबसे बड़ा राष्ट्रीय मानव (मातृ) दुग्ध बैंक और दुग्धपान परामर्श केंद्र होगा। दिल्ली के आस-पास के सभी नवजात बच्चों को जीवन रक्षक दुग्ध की उपलब्धता से विषम परिस्थितियों में लाभ होगा।
क्या है खासियत
मिश्रा ने बताया कि स्वास्थय की दृष्टि मां का दूध काफी लाभप्रद होता है। देश में मातृ दुग्ध के प्रति लोगों में जागरुकता का अभाव है जबकि माता का दूध बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाने का सबसे अच्छा स्त्रोत है। इस बारे में जागरुकता फैलाने के लिए माँ- मदर्स अबसल्यूट अफेक्शन कार्यक्रम शुरू किया गया है। सरकार की कोशिश है कि हर बच्चों को मां का दूध मिले। इसी पहल को आगे बढ़ाते हुए दिल्ली में मदर मिल्क बैंक शुरू किया गया है। ये देश का सबसे बड़ा मदर मिल्क बैंक है जिसकी क्षमता तीन सौ लीटर दूध रखने की है। नार्वे सरकार की मदद से बने इस दूध बैंक में तीन महीने तक माँ का दूध सुरक्षित रह सकता है। जहां पर कोई भी स्वस्थ्य मां अपने बच्चे को दूध पिलाने के बाद बचे हुए दूध को दान कर सकती है। ये मां का दूध उन नवजात को दिया जाएगा जो समय से पहले पैदा हो जाते है।
मां के दूध का मोल नहीं
खास बात ये है कि ना दूध देने की ना ही दूध लेने की कोई कीमत है यानी माँ का दूध किसी भी जरूरतमंद नवजात को मुफ्त में मिलेगा। लेडी हार्डिंग मेंडिकल कॉलेज की बात करें तो यहां हर साल करीब पन्द्रह हजार बच्चे पैदा होते है जिसमें करीब ढ़ाई हजार बच्चे समय से पहले पैदा होते है। जिनके लिए मां का दूध जरूरी हो जाता है। जन्म से छह महीने तक मां दूध फायदेमंद होता है। मां का दूध कई जानलेवा बीमारियों से बचाता है यहां तक कि मोटापा,डायबिटीज और हाइपरटेंशन से भी बचाता है।
स्तनपान कराने से मां को भी स्तन कैंसर का खतरा कम हो जाता है।
इस अवसर पर नॉर्वे के भारत में राजदूत नील्स रैंगनर कमस्वाग ने कहा कि मातृ दुग्ध की उपलब्धता से उन नवजात शिशुओं के जीवित रहने की दर को बढ़ाई जा सकेगी जिनकी माताएं पर्याप्त दुग्धपान कराने में सक्षम नहीं हैं। इस केंद्र की स्थापना के बाद इस तरह के और भी केंद्र शुरू होने की प्रेरणा मिलेगी।

