
Karwa Chauth 2024: करवा चौथ का त्योहार पति-पत्नी के बीच के प्यार और विश्वास को मज़बूत करने के लिए मनाया जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सफलता की कामना के लिए व्रत रखती हैं। वहीं अविवाहित युवतियां सुयोग्य वर की कामना के लिए इस व्रत को धारण करती हैं। करवा चौथ का व्रत कृष्ण पक्ष में रखा जाता है। इस दिन लोग भगवान गणेश के लिए भी व्रत रखते हैं। करवा चौथ का व्रत उसी दिन रखा जाता है जिस दिन संकष्टी चतुर्थी होती है।
करवा चौथ से जुड़ी कई कहानियां
वीरवती की कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार प्राचीन काल में वीरवती नाम की एक सुंदर और धर्मनिष्ठ राजकुमारी थी। वह अपने सात भाइयों की इकलौती बहन थी। विवाह के बाद वीरवती ने पहली बार अपने पति की लंबी उम्र के लिए करवा चौथ का व्रत रखा। उसने दिनभर अन्न-जल ग्रहण नहीं किया और पूरी श्रद्धा के साथ व्रत का पालन किया। लेकिन दिन ढलते-ढलते भूख और प्यास के कारण वह अत्यधिक कमजोर हो गई। वीरवती की यह दशा देखकर उसके भाई चिंतित हो गए। वे अपनी बहन की हालत देखकर दुखी हो गए और उसे व्रत तोड़ने के लिए मनाने लगे। लेकिन वीरवती ने कहा कि जब तक चंद्रमा उदित नहीं होता वह व्रत नहीं तोड़ेगी।
वीरवती के भाइयों ने अपनी बहन की हालत देखकर एक उपाय सोचा उन्होंने पेड़ की आड़ में छल से एक दर्पण का उपयोग करके नकली चंद्रमा बना दिया। भाइयों ने वीरवती से कहा कि चंद्रमा निकल आया है और उसे देखकर व्रत तोड़ लो वीरवती ने वह नकली चंद्रमा देखकर व्रत तोड़ दिया और जल ग्रहण कर लिया जैसे ही उसने व्रत तोड़ा उसे यह सूचना मिली कि उसका पति गंभीर रूप से बीमार हो गया है।
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वीरवती को तुरंत आभास हुआ कि उसने चंद्रमा की पूजा किए बिना और सही समय से पहले व्रत तोड़ दिया जिसके कारण यह अनहोनी हुई वह अत्यधिक दुखी हुई और पश्चाताप करने लगी। अपने पति की लंबी आयु के लिए वीरवती ने दृढ़ संकल्प किया और पूरी श्रद्धा के साथ करवा चौथ का व्रत फिर से रखा। उसकी भक्ति और समर्पण से प्रसन्न होकर माता पार्वती ने उसे आशीर्वाद दिया और उसका पति स्वस्थ हो गया।
महाभारत काल से जुड़ी कथा
महाभारत में भी एक कहानी है जो करवा चौथ से जुड़ी हुई है। जब अर्जुन युद्ध करने नीलगिरी पर्वत पर गए थे। तो द्रौपदी बहुत चिंतित थीं। उन्होंने भगवान कृष्ण से अपने पति की सुरक्षा के लिए मार्गदर्शन मांगा कृष्ण ने उन्हें करवा चौथ का व्रत रखने और शिव-पार्वती की पूजा करने की सलाह दी। द्रौपदी ने व्रत रखा जिससे अर्जुन सुरक्षित रहे।
करवा और पति की कथा
तीसरी प्रसिद्ध कथा करवा नामक महिला की है। जो अपने पति के प्रति अत्यधिक समर्पित थी एक दिन जब उसका पति नदी में स्नान कर रहा था तब एक मगरमच्छ ने उसे पकड़ लिया। करवा ने अपने पति की रक्षा के लिए दृढ़ संकल्प किया और मगरमच्छ को एक सूती धागे से बांध दिया। फिर उसने यमराज से प्रार्थना की कि मगरमच्छ को दंड दें और उसके पति की रक्षा करें। यमराज करवा के समर्पण से प्रभावित हुए और मगरमच्छ को दंडित किया और उसके पति को दीर्घायु का आशीर्वाद दिया। इस तरह की और भी पौराणिक कथाएं हैं जिन्हें करवा चौथ के व्रत से जोड़कर देखा जाता है।
श्रृंगार के अलावा
इस साल करवा चौथ का व्रत 20 अक्टूबर रविवार को रखा जाएगा। सुहागिन महिलाएं इस व्रत का इंतजार बेसब्री से कर रही हैं और इस दिन 16 श्रृंगार कर तैयार होती हैं। करवा चौथ के दिन श्रृंगार के अलावा कुछ अन्या चीजों को खरीदना भी शुभ माना गया है।
बिछिया भी है महत्वपूर्ण
हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाएं पैरों में बिछिया पहनती हैं और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार करवा चौथ के दिन चांदी की नई बिछिया खरीदना और पहनना बेहद ही शुभ होता है। कहते हैं कि इससे करवा माता प्रसन्न होकर आपको अखंड सौभाग्यवती का आशीर्वाद देती हैं।
रजनीगंधा भी है शुभ
वास्तु शास्त्र के अनुसार रजनीगंधा को बेहद ही शुभ माना गया है और कहते हैं कि करवा चौथ के दिन घर में रजनीगंधा का पौधा लगाने से वैवाहिक जीवन में मिठास आती है। लेकिन ध्यान रखें यह पौधा घर की उत्तर दिशा में ही लगाना चाहिए।
मोरपंख है प्यार का प्रतीक
अगर आपके दांपत्य जीवन में परेशानियां चल रही हैं तो करवा चौथ के दिन घर में मोरपंख जरूर लेकर आएं। इसे घर में लाना शुभ व लाभकारी माना जाता है। क्योंकि यह प्यार का प्रतीक है। मोरपंख बेडरूम या किसी ऐसी जगह लगाना चाहिए जहां पतिपत्नी की नजर पड़े।
कांच की चूड़ियां
कांच की चूड़ियों को शुभ व सुहाग की निशानी माना जाता है और यदि लाल रंग की कांच की चूड़ियां हो तो और भी शुभ होती हैं। इसलिए करवा चौथ के लिए लाल रंग की कांच की चूड़ियां अवश्य खरीदनी चाहिए।
न खरीदें ये चीजें
करवा चौथ के दिन गलती से भी सफेद रंग के कपड़े नहीं खरीदने चाहिए। इसे अशुभ माना जाता है। ध्यान रखें कि इस व्रत में सफेद रंग से जुड़ा कोई भी श्रृंगार का सामान न लें।

